
मुख्यमंत्री शिवराज ने कहा है कि रामचरितमानस जैसे ग्रंथ हमारे पाथेय और मार्गदर्शक हैं। रामचरित मानस सहित गीता और महाभारत के प्रसंगों को शालेय पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा। यह प्रसंग नैतिक शिक्षा और आध्यात्म की शिक्षा में सहायक होंगे। ज्ञान का सर्वश्रेष्ठ प्रकटीकरण अपनी मातृभाषा में होता है। अंग्रेजी के आधिपत्य को समाप्त कर मातृभाषा में शिक्षा को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य सरकार हरसंभव प्रयास करेगी। इसी दिशा में मेडिकल और इंजीनियरिंग की पढ़ाई हिन्दी में कराने की पहल की गई है। मुख्यमंत्री श्री चौहान नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की जयंती पर विद्या भारती मध्यभारत प्रांत, सरस्वती विद्या प्रतिष्ठान मध्यप्रदेश के सुघोष दर्शन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। श्री चौहान ने कहा कि भारत अत्यंत प्राचीन और महान राष्ट्र है। यहाँ की परम्पराओं को अक्षुण्ण रखने के लिए विद्या भारती द्वारा किए जा रहे प्रयास सराहनीय हैं। शिक्षा के क्षेत्र में भारत प्राचीन काल से ही विश्वगुरू रहा है। शिक्षा के तीन उद्देश्य हैं ज्ञान अर्जित करना, कौशल विकास और नागरिकता के संस्कार विकसित करने की दिशा में विद्या भारती द्वारा संचालित गतिविधियों से विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा के प्रकटीकरण के अवसर प्राप्त हो रहे हैं। सुघोष दर्शन जैसे कार्यक्रमों से विद्यार्थियों की शारीरिक क्षमता में वृद्धि के साथ सामूहिक रूप से कार्य करने की प्रवृत्ति में वृद्धि कर संगठन क्षमता बढ़ाने में सहायक है।

