पत्रकारिता का असर:अडाणी का बयान , निवेशकों को लौटाए जाएंगे पूरे पैसे

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नई दिल्ली,

Gautam Adani: the man behind the mine

पूंजीवादी हेरा फेरी के घटनाक्रम के बाद जब मीडिया रिपोर्ट में विदेशी पत्रकारिता ने अदानी समूह की हेराफेरी को उजागर किया तो ना खाऊंगा ना खाने दूंगा की परिभाषा गढ़ने वालों के मित्र गौतम अडानी की कंपनी अडानी समूह ने पहले तो इस हेराफेरी को राष्ट्रवाद पर हमला बताया था किंतु अब वह समझ गए हैं की वातावरण ऐसे ठीक नहीं होगा इसलिए उन्हें बिना राजनीति को नुकसान पहुंचाए चीजों को ठीक करना चाहिए और शायद इसीलिए अडानी इंटरप्राइजेज में निवेशकों की राशि को वापस लौटाने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है

अडाणी एंटरप्राइजेज ने बुधवार को अपने 20
हजार करोड़ रुपए के अनुवर्ती सार्वजनिक निर्गम(एफपीओ) को वापस लेने और निवेशकों का पैसा लौटाने की घोषणा की। हालांकि, कंपनी के एफपीओ को मंगलवार को पूर्ण अभिदान मिल गया था। समझा जाता है कि अडाणी एंटरप्राइजेज ने
यह कदम अमेरिका की कंपनी हिंडनबर्ग की रिपोर्ट के बाद उठाया है। बीएससी के आंकड़ों के अनुसार, अडाणी एंटरप्राइजेज के एफपीओ के तहत 4.55 करोड़ शेयरों की पेशकश की गई थी, जबकि इसपर 4.62 करोड़ शेयरों के लिए आवेदन मिले थे। गैर संस्थागत निवेशकों के लिए आरक्षित 96.16 लाख शेयरों पर करीब तीन गुना बोलियां मिली थीं। वहीं पात्र संस्थागत खरीदारों के खंड के 128 करोड़ शेयरों पर पूर्ण अभिदान मिला था। हालांकि, एफपीओ को लेकर खुदरा निवेशकों और कंपनी के कर्मचारियों की प्रतिक्रिया ठंडी रही थी। अडाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड के अध्यक्ष गौतम अडाणी ने कहा कि पिछले हफ्ते कंपनी के शेयर में काफी उतार चढ़ाव के बावजूद एफपीओ मंगलवार को सफलतापूर्वक बंद हुआ। कंपनी और उसके कारोबार के प्रति आपका भरोसा हमारा विश्वास
बढ़ाने वाला है जिसके लिए हम आपके आभारी हैं। अडाणी ने कहा कि आज कंपनी के शेयर में अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव रहा। उन्होंने कहा कि असाधारण परिस्थितियों के मद्देनजर, कंपनी के निदेशक मंडल ने फैसला किया है कि एफपीओ
पर आगे बढ़ना नैतिक रूप से ठीक नहीं होगा। निवेशकों का हित हमारे लिए सर्वोपरि है और उन्हें किसी तरह के संभावित नुकसान से बचाने के लिए निदेशक मंडल ने एफपीओ को वापस लेने का फैसला किया है।

‘हिंडनबर्ग रिसर्च’ की पिछले हफ्ते आई रिपोर्ट के बाद अडाणी समूह की कंपनियों के शेयरों में लगातार गिरावट आ रही है। गिरावट का यह सिलसिला बुधवार को भी जारी रहा। पिछले पांच कारोबारी सत्रों में समूहों की कंपनियों का सामूहिक बाजार पूंजीकरण सात लाख करोड़ रुपए घट गया है। वहीं, बंदरगाह से ऊर्जा क्षेत्र तक विस्तृत कारोबारी समूह के प्रमुख गौतम अडाणी दुनिया के शीर्ष अरबपतियों की सूची में पिछड़ गए हैं।

गौतम अडाणी अब सबसे अमीर एशियाई या भारतीय नहीं हैं। उनके प्रतिद्वंद्वी कारोबारी मुकेश अंबानी एक बार फिर भारत और एशिया के सबसे धनी व्यक्ति वन गए हैं। अंबानी पिछले साल अप्रैल में अडाणी से पिछड़ गए थे। अडाणी एक सप्ताह पहले फोर्ब्स की अरबपतियों की सूची में दुनिया के तीसरे सबसे धनी व्यक्ति थे और वह बुधवार को 15वें स्थान पर फिसल गए। अमेरिकी शार्ट रोलर हिंडनबर्ग की रिपोर्ट के बाद अडाणी समूह की कंपनियों के शेयरों में गिरावट जारी है।                                                       (1 फरवरी ,भाषा)

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 


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