
न्यायाधीशों की नियुक्ति में देरी का मामला |
जल्द मंजूरी देंगे : केंद्र
नई दिल्ली
हालांकि राम, रामायण और रामचरितमानस को लेकर इस समय अलग-अलग इवेंट चल रहा है, गंडक नदी से राम के मूर्ति के नाम पर पत्थर लाया जा रहा है तो दूसरी तरफ रामचरितमानस को लेकर संसद में छीछालेदर हो रही है.. क्योंकि 2024 में और इसके पहले कई चुनाव के लिए वोट बैंक को तराशा भी जाएगा…. इस तरह धार्मिक भावनाओं को अलग-अलग तरीके से भड़का कर अलग अलग तरीके के वोट बैंक का ध्रुवीकरण हो रहा है |यह हमारे लोकतंत्र की पहचान बनती जा रही है| लेकिन इसी रामायण, राम और रामचरितमानस में एक चौपाई है कि—
विनय न मानत जड़ जलधि,गए 3 दिन बीत…बोले राम सकोप तब, भय बिन होत न प्रीत…..
इस अंदाज में लोकतंत्र का प्रमुख स्तंभ न्यायपालिका अब अहंकारी व्यवस्था को चुनौती देता नजर आ रहा है क्योंकि उसे ऐसा लग रहा है की विधायिका, कार्यपालिका मिलकर न्यायपालिका की संस्था को इस लोकतंत्र में क्षतिग्रस्त करने वाले हैं.. तो देखते हैं न्यायपालिका ने अब क्या कहा है लगातार चल रहे विवाद के बीच..
3 फरवरी।न्यायाधीशों की नियुक्ति में देरी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को फिर अपना कड़ा रुख दिखाया। न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति एएस ओका की पीठ ने केंद्र से कहा कि हाईकोर्ट के जजों के तबादले पर कालेजियम की सिफारिश पर फैसलालेना बहुत ही गंभीर और किसी भी चीज स ज्यादा गंभीर है।
न्यायमूर्ति कौल ने कहा कि हम कर रहे हैं और हम करेंगे दोनों में फर्क होता है। हमारे पास जो था, हमने आपको भेज दिया है। आपका रवैया हमारे लिए परेशान करने वाला है। आप हमें मजबूर न करें कि हम कोई गंभीर फैसला लें। हम किसी तीसरे को इस मामले में खेला नहीं करने देंगे। हमे गंभीर फैसले लेने को विवश न करें।
इस पर सरकार ने भरोसा दिया कि रविवार तक निर्णय हो जाएगा। कहा कि सरकार जल्द ही पांच न्यायाधीशों की पदोन्नति को मंजूरी देंगे, जिसकी सिफारिश कालेजियम ने की थी। सुनवाई की शुरुआत में केंद्र की तरफ से अटानी जनरल पीठ 2021 में सुप्रीम कोर्ट कालेजियम द्वारा दोहराए गए 11 नामों को नहीं देने के खिलाफ एडवेकेट्स एसोसिएशन बंगलुरु द्वारा दायर एक अवमानना याचिका पर सुनवाई कर रही थी। पीठ ने कहा कि जब हमें लगता है कि किसी जज को किसी वजह से किसी खास अदालत में होना चाहिए, तभी हम सिफारिश करते हैं, लेकिन आप उसे भी लटकाए रखते है। यह गंभीर मुद्दा है। सुनवाई के दौरान वकील प्रशांत भूषण ने केंद्र द्वारा नामों की नियुक्ति नहीं करने का मुर्दा उठाया था। मामले की अगली सुनवाई 13 फरवरी को होगी।
न्यायमूर्ति एएस ओ वेंकटरमणी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट कालेजियम से 13 प्रस्ताव हमारे पास आए हैं। अदालत इस मामले
की सुनवाई अब 13 फरवरी को करेगी। पीठ ने सरकार को सुप्रीम कोर्ट में पांच जजों की नियुक्ति लंबित सिफारिशों पर फैसला लेने को भी कहा है। सुप्रीम कोर्ट कालेजियम ने सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति के लिए पिछले साल 13 दिसंबर को सरकार को पांच नाम की सिफारिश की थी। इनमें राजस्थान उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति पंकज मित्थत, पटना उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजय करोल, मणिपुर उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश पीवी
संजय कुमार, पटना उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा का नाम शामिल है। जबकि सरकार ने भरोसा दिया कि रविवार तक निर्णय हो जाएगा। वेंकटरमणी ने आश्वासन दिया कि नामों की नियुक्ति का वारंट जल्द हो जारी होने की उम्मीद है। अटानी जनरल ने कहा कि मुझे बताया गया कि रविवार तक इसे जारी किया जा सकता ( साभार जनसत्ता)
3/2/23

