
नई दिल्ली
जनजातीय कार्य मंत्रालय ने आज नई दिल्ली के सिविल सेवा अधिकारी संस्थान में अनुसूचित क्षेत्रों के जिला कलेक्टरों और परियोजना अधिकारियों (आईटीडीए) के लिए “सुशासन पर कार्यशाला” आयोजित की। दस राज्यों के अनुसूचित क्षेत्रों के 90 से अधिक जिला कलेक्टरों और परियोजना अधिकारियों (आईटीडीए) ने कार्यशाला में सहभागिता की और नीति तथा कार्यान्वयन में अंतराल पर अपने अनुभव साझा किए तथा अपने क्षेत्रों में परस्पर सीख के माध्यम से इस अंतराल को पाटने के लिए अनुशंसाएं/सुझाव दिए।
केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री अर्जुन मुंडा ने मुख्य अतिथि के रूप में इस कार्यक्रम की भाग लिया तथा अपने बहुमूल्य सुझाव प्रदान करते हुए कार्यशाला में सहभागिता की। श्री अर्जुन मुंडा ने कि हम यहां अनुसूचित क्षेत्रों में अनुसूचित जनजातियों के संरक्षण, संवर्धन और विकास के मुद्दों पर चर्चा करने के उद्देश्य से एकत्रित हुए हैं, ताकि उनके इच्छित लक्ष्य को अर्जित किया जा सके। अनुसूचित जनजातियों और अधिसूचित अनुसूचित क्षेत्रों के चरित्र को समझना, प्राथमिकता देना और उनके प्रति सांस्कृतिक रूप से संवेदनशील होना तथा ऐतिहासिक अन्याय के निवारण के लिए न्याय सुनिश्चित करना, जिसका उल्लेख वन अधिकार अधिनियम की प्रस्तावना में किया गया है, हमारे लिए महत्वपूर्ण है। गांवों के समग्र विकास को एफआरए, पीईएसए, एसटीसी, आईटीडीए, पंचायत और जनजातीय चरित्र से जोड़ा जाना चाहिए। जिलाधिकारियों को अनिवार्य रूप से जनजातीय क्षेत्र से सिकल सेल रोग के उन्मूलन पर बल देना चाहिए। उन्हें यह सुनिश्चित करने के लिए अपना मस्तिष्क, हृदय और आत्मा लगाना चाहिए कि एसटीपी और टीएसपी बजट आवंटन जनजातीय आबादी के अनुरूप किया जाए और इसका जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से उपयोग किया जाए। स्वामित्व लेने के साथ संस्थागत विकास का मिलान किया जाना चाहिए। जमीनी स्तर पर योजना जागरूकता सुनिश्चित करने का अभी सही समय है। हमें अपनी निर्बलता पर काम करके उसे अपनी शक्ति में रूपांतरित करना चाहिए।
इसलिए, प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में केंद्र सरकार ने ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ के मंत्र के साथ सदियों से वंचित रहे निर्धनों, दलितों, पिछड़ों और जनजातियों की आकांक्षाओं को पूरा करने का संकल्प लिया है।जनजातीय कार्य राज्य मंत्री श्रीमती रेणुका सिंह सरुता भी इस अवसर पर उपस्थित थीं और उन्होंने बातचीत में योगदान दिया। उन्होंने कहा कि यह उल्लेखनीय है कि जनजातीय कार्य मंत्रालय सीमित समय में नई ऊंचाइयों को छूने और ऐसी उपलब्धियां हासिल करने में सक्षम रहा है जो पहले कभी अर्जित नहीं की गई थी। जनजातियों का विकास तेजी से हो रहा है, क्योंकि हमारी सरकार प्रभावी दृष्टिकोण के माध्यम से जनजातीय मुद्दों पर ध्यान दे रही है और ऐसी रूपरेखा बना रही है जो जनजातियों के लिए लाभप्रद सिद्ध हुई हैं। यह नोट करना समुचित है कि जनजातियों की स्थिति में महत्वपूर्ण सुधार हुआ है, क्योंकि अब हमारी राष्ट्रपति और लगभग आठ मंत्री जनजातीय पृष्ठभूमि के हैं जो देश में प्रभावशाली पदों पर हैं। हाल ही में, हमारे मंत्रालय की झांकी, एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों पर ध्यान केंद्रित करते हुए, जहां जनजातीय शिक्षा पर बल दिया जाता है, ने कर्तव्य पथ पर गणतंत्र दिवस परेड में प्रथम स्थान प्राप्त किया। इसलिए, आज की संगोष्ठी जनजातियों के समग्र विकास को सुनिश्चित करने और देश के कल्याण के लिए अंतिम मील तक पहुंचने के लिए मंत्रालय की योजनाओं और नीतियों के बारे में जागरूकता पैदा करने पर बल देगी।
जनजातीय कार्य मंत्रालय के सचिव अनिल कुमार झा ने भी विचार-विमर्श में सहभागिता ककी और कार्यशाला में भाग लिया। उन्होंने कार्यशाला में जिला कलेक्टरों और परियोजना अधिकारियों की पूर्ण उपस्थिति पर प्रसन्नता जताई और इस बात पर बल दिया कि मंत्रालय की भूमिका जनजातीय समुदायों के कल्याण पर केंद्रित है क्योंकि समाज के इस वर्ग को जीवन के सभी क्षेत्रों – स्वास्थ्य, शिक्षा, आजीविका, सरकारी नीतियां आदि में सबसे अधिक सहायता की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी कहा कि हम एक अनुसूचित क्षेत्र प्रकोष्ठ का गठन सुनिश्चित करेंगे जो जनजातियों से संबंधित मामलों को समग्र और संपूर्ण समाधान के साथ हल करेगा।
इसके अतिरिक्त, शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. सुभाष सरकार ने भी कार्यशाला सत्रों में भाग लिया।अपर सचिव और संयुक्त सचिवों तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारियों सहित मंत्रालय के अधिकारियों ने विभिन्न समूह चर्चाओं को संचालित किया और निम्नलिखित चार प्रमुख विषयों पर प्रस्तुतियां दीं –
- भूमि हस्तांतरण विनियमों, जनजातीय भूमि विक्री तथा क्षतिपूर्ति मुआवजे, अत्याचार निवारण अधिनियम, राज्यपालों की विशेष शक्तियों का आह्वान और उसके कार्यान्वयन तथा आईटीडीपी/आईटीडीए, एमएडीए पॉकेट और अनुसूचित क्षेत्रों में क्लस्टर/सूक्ष्म परियोजनाओं के कामकाज पर विशेष ध्यान देने के साथ पांचवीं अनुसूची के प्रावधानों के कार्यान्वयन का प्रशासन और समीक्षा तंत्र।
- अनुसूचित क्षेत्रों में, अनुसूचित क्षेत्र अधिनियम (पीईएसए) 1996 में पंचायत विस्तार तथा वन अधिकार अधिनियम (एफआरए) 2006 के प्रावधानों के कार्यान्वयन का प्रशासन और समीक्षा तंत्र।
- अनुसूचित क्षेत्रों में अनुसूचित जनजातियों के विकास के लिए पीएमएएजीवाई, शैक्षिक, स्वास्थ्य, अन्य योजनाओं तथा केंद्र और राज्य की योजनाओं के एसटीसी का कार्यान्वयन और समीक्षा तंत्र।
- एमएफपी तथा वन धन विकास केंद्रों को (वीडीवीके) आजीविका एमएसपी।
इसके अतिरिक्त, दस से अधिक राज्यों (33 जिलों और 64 आकांक्षी जिलों) के जिला कलेक्टरों ने फोकस समूह चर्चाओं के निष्कर्षों पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। अनुसूचित क्षेत्रों के डीसी और पीओ के लिए सुशासन के विषयों पर चर्चा करने के लिए गठित सभी चार समूहों ने आज नई दिल्ली में सीएसओआई में आयोजित कार्यशाला में योजनाओं के कार्यान्वयन में आने वाली चुनौतियों और उनके समाधान पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया।

