
भागलपुर
भारत में ब्राह्मणों और पंडितों के खिलाफ वोट बैंक की राजनीति के चलते दिए गए अपने बयान पर आरएसएस प्रमुख
भागवत पलटी मार गए हैं,अब उन्होंने कहा है कि” उन्होंने ब्राह्मण का नाम नहीं लिया और पंडित कहा है, पंडित किसी भी जाति का हो सकता है” किंतु हकीकत यह है कि आरएसएस प्रमुख को जल्द ही समझ में आ गया है कि उन्होंने गलती की है किंतु माफी मांगने में शायद उन्हें शर्म आ रही है इसलिए उन्होंने तकनीकी पहलू बताकर विषय को घुमाने का काम किया है.. किंतु उनकी मंशा बहुत ही स्पष्ट हो चुकी है कि वह वोट बैंक के लिए किसी भी तथाकथित हिंदुत्व और राष्ट्रवाद का सब्जबाग दिखाकर सत्ता में बने रहना चाहते हैं|
सोशल मीडिया में चल रही खबरों के अनुसार भागलपुर में उन्होंने यह बात कही है राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने भागलपुर में ब्राह्मणों पर दिए अपने बयान को स्पष्ट किया है। उन्होंने कहा कि मैंने कभी ब्राह्मण शब्द नहीं कहा। मैंने पंडित कहा था, वो किसी भी जाति का हो सकता है। पंडित उसे कहते हैं जाे बुद्धिमान है।
भागलपुर में महर्षि मेंहीं परमहंस के आश्रम में शुक्रवार को मोहन भागवत ने ये बातें कहीं। इस दौरान उन्होंने नसीहत दी कि विवाद से जुड़े मसलों पर अनावश्यक चर्चा करने के बजाय राष्ट्र निर्माण काे लेकर बातें करें। यह ज्यादा बेहतर हाेगा।
अब जानते हैं कि मोहन भागवत ने क्या बयान दिया था?
देशभर में रामचरितमानस की एक चौपाई को लेकर छिड़े विवाद के बीच मोहन भागवत ने बयान दिया था। रविवार को मुंबई में संत रविदास जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा था – जाति भगवान ने नहीं बनाई है, जाति पंडितों ने बनाई जो गलत है। भगवान के लिए हम सभी एक हैं। हमारे समाज को बांटकर पहले देश में आक्रमण हुए, फिर बाहर से आए लोगों ने इसका फायदा उठाया। हमारे समाज को बांटकर लोगों ने हमेशा से फायदा उठाया है।
सालों पहले देश में आक्रमण हुए, फिर बाहर से आए लोगों ने हमें बांटकर फायदा उठाया। नहीं तो हमारी ओर नजर उठाकर देखने की भी किसी में हिम्मत नहीं थी। इसके लिए कोई जिम्मेदार नहीं। जब समाज में अपनापन खत्म होता है तो स्वार्थ अपने आप बड़ा हो जाता है.अब देखना होगा कि भारत के तमाम ब्राह्मण समुदाय इस पर क्या रुख आते हैं….?

