
शहडोल
17 फरवरी23
आदिवासियों की जमीन अधिग्रहण कर मुआवजा नौकरी नहीं देने पर ढोलू कम्पनी का आदिवासी ग्रामीण कर रहे विरोध। जिनके द्वारा विरोध प्रदर्शन करते हुये एसईसीएल की मेगा प्रोजेक्ट रामपुर बटुरा कोयला खदान का कार्य बन्द कराया गया।
एसईसीएल की रामपुर बटुरा कोयला उत्पादन शुरू होने से पहले आदिवासी ग्रामीण भूमि अधिग्रहण को लेकर सख्त विरोध जता रहे हैं। जिनके द्वारा आज काम बन्द कराकर अपना विरोध जताते हुये अधिग्रहण की गई भूमि का मुआवजा देने तथा नौकरी देने की मांग की जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि कम्पनी द्वारा भूमि अधिग्रहण के पूर्व यह वादा किया गया था कि भूमि का उचित मुआवजा तथा परिवार के एक सदस्य को नौकरी दी जायेगी। लेकिन इस पर कम्पनी अमल नहीकर रही । कम्पनी के उदासीन रवैया के कारण ग्रामीणों मे कम्पनी के प्रति भारी नाराजगी देखी जा रही है।
शहडोल जिला अनुसूचित क्षेत्र होने के साथ ही संविधान की पांचवी अनुसूची में शामिल विशेष आदिवासी क्षेत्र है जिसके लिए इन दिनों मध्यप्रदेश शासन भी खूब जोर शोर से प्रचार प्रसार करके पेशा एक्ट लागू कराने पर काम कर रही है बावजूद इसके कि पूरे भारतवर्ष में सिर्फ शहडोल ऐसा क्षेत्र है जहां महामहिम राष्ट्रपति स्वयं शहडोल आकर आदिवासियों के हित में पेसा एक्ट लागू करने के लिए 14 नवंबर 2022 को घोषणा की थी किंतु उसका असर अभी कोयला खदान क्षेत्रों में या अन्य जगह ना के बराबर दिख रहा है। शोषण और दमनकारी अनवरत अपने अपने तरीके से पुलिस व प्रशासन के लोगों को मिलाकर स्थानीय लोगों की अनदेखी करते हुए मनमानी काम करने पर उतारू है परिणाम स्वरूप ग्राम सभा में होने वाली कार्यवाही पर भी प्रशासन द्वारा कोई कार्यवाही नहीं की जाती है जिसका असर यह है कि रामपुर बटुरा कोयला खदान में लोगों की जमीन तथाकथित तरीके से अधिग्रहण तो कर ली गई है किंतु अधिग्रहण किए गए शर्तों का पालन किए बिना ही मनमानी तरीके से कोयला निकालकर नौ दो ग्यारह हो जाना चाहती है..? बहरहाल इस जागरूकता से क्षेत्र में हड़कंप मचा हुआ है

