कोतमा विधानसभा के नए दावेदार मुन्ना भाई एमएलए-3-( त्रिलोकीनाथ )–

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शायद ही किसी नेता की स्थानीय समाचार पत्रों और मीडिया पोर्टल में ईतनी चर्चा पहले कभी हुई हो ,जो राजनीति में सफल नेता के रूप में स्थापित होने को बेताब हुआ हो.. किंतु राजनीति की पात्रता ही इस बात पर टिकी होती है कि वह कितना बदनाम है .. बदनामी के पीछे भी बदनाम जो है, वही है नाम वाला अंदाज छिपा होता है और राजनीति की मांग है कि आप चाहे बदनामी से हमें या बेईमानी से आपकी चर्चा हमेंशा होती रहनी चाहिए और यह सफल नेता के लिए पहली  पात्रता में “मुन्ना भैया एमएलए” सफल होते दिख रहे हैं… क्योंकि विधायक बनने के बाद तो बदनामी मिलती ही है फिर चाहे वह लड़की की छेड़खानी का मामला हो या फिर भ्रष्टाचार का… क्योंकि वही उसकी योग्यता बन जाती है और इसी बिना पर वह अपनी राजनीति आगे बढ़ाता है …तो अगर पहले से ऐसी योग्यताएं स्थापित हो तो वह एक प्रकार का चरित्र प्रमाण पत्र हो जाता है जो राजनीति में ऐसे लोगों का महत्वपूर्ण की सफलता के लिए एक पारदर्शी बायोडाटा  होता है| पारदर्शिता और ईमानदारी के साथ कोतमा विधानसभा में मुन्ना भैया डंके की चोट में आ रहे हैं.. चाहे राजनीतिक दल कोई भी हो …सबसे बरोबर का संपर्क है क्योंकि भ्रष्टाचार में संपूर्ण पारदर्शिता है.. और कोई राजनीतिक दल इतने पारदर्शी व्यक्ति को क्यों छोड़ना चाहेगा…? तो अभी तक जो बातें ब्लॉगर में लिखी गई उन्हें अब साइट पर लिखना एक जरूरत बन गई है तो अभी तक जो लिखा गया है उसके अनुसार

50करोड़ की गर्लफ्रेंड यह चर्चित शब्द का अविष्कार   सत्ता में आने के बाद उन्होंने किया था किंतु जब मध्य प्रदेश में सत्ता परिवर्तन हो रहा था तब 50 करोड़ में विधायक बिकता है बोलो खरीदोगे….के अंदाज में सत्ता का बाजार खुल गया था….. संयोग है उसकी शुरुआत इसी अनूपपुर जिले के एक विधायक से हुई थी जहां आज मुन्ना भाई  चुनाव लड़ने को बेताब है…

——————( त्रिलोकीनाथ )————

“ईमानदारी ही जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है” कोतमा विधानसभा से डॉक्टर मदन कुमार त्रिपाठीउर्फ मुन्ना भैया का यह संदेश निश्चित तौर पर पूरी ईमानदारी के साथ हाई कोर्ट जबलपुर के आर्डर में दिखता है ..पूरी ईमानदारी के साथ उन्होंने अपने जीवन की कर्तव्यनिष्ठ कृत्य दायित्वों का पालन किया है और उस पर किसी भी किसी को भी शंका नहीं करनी चाहिए…? एक निष्ठावान व्यक्ति की तरह डॉक्टर मदन त्रिपाठी का व्यक्तित्व कटप्पा  की तरह अपने आशाओं के लिए समर्पित रहा है और उसका पुरस्कार उन्हें अपने रिटायरमेंट के कार्यकाल में देने का आश्वासन भी उनके अपनों ने निश्चित तौर पर दिया है. यह अलग बात है कि ठीक चुनाव के पहले वे अथवा उनका आकार किस अलादीन का चिराग होगा, क्योंकि निष्ठा हवा के रुख में बदल जाती हैं.

 भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस से वह कराई कई निष्ठाएं वर्तमान में भाजपा की कर्तव्यनिष्ठा बनकर डंका पीट रही है जो कटप्पा की तरह सत्ता के साथ हमेशा समर्पित होती हैं. अब यह अलग बात है कि सत्ता किसकी होने वाली है…? लोकसभा के सांसद रामदास आठवले  एकमात्र सांसद है जो हवा के रुख को समझकर पूरी ईमानदारी के साथ अपने जीवन की पूंजी समझ करहमेशा सत्ताधारी पार्टी के साथ समर्पित रहे हैं और गाहे-बगाहे लोकसभा में अपने भाषण में निजी जीवन में भी पूरी पारदर्शिता के साथ अपनी ईमानदारी की व्याख्या करने में उन्हें कभी भी शंका नहीं हुई.

 कुछ इसी प्रकार मुन्ना भाई अपने सल्तनत के प्रति समर्पित हैं जीवन की शुरुआत में  मुन्ना भाई एमबीबीएस के आदर्श नायक स्टार्टिंग से ही इस बात पर कमिटेड रहे की किसी भी चीज को हासिल करने के लिए कुछ भी करना सब कुछ जायज है और वह पूरी ईमानदारी के साथ इसे पूरी पारदर्शिता के साथ करते भी रहे. मुन्ना भाई शिक्षा के क्षेत्र में तन मन धन समर्पित करके अपनी शिक्षा को टॉप में रखते थे. जो पूरे सिस्टम के लिए एक पारदर्शी माफिया गिरी था. लेकिन उस माफिया मुन्ना भाई को सब पसंद करते थे क्योंकि मुन्ना भाई सबके पसंदीदा नायक थे.ना जाने कितने  परिवार शिक्षाकर्मी भ्रष्टाचार में लूटपाट गए लुट गए किंतु मुन्ना भाई की मिलनसारता और उसके अनुभव से अब बारी विधानसभा की आ गई है. विधानसभा के चुनाव में ऐसे ही पारदर्शी और योग्य मुन्ना भाई की आवश्यकता है.

 कोतमा विधानसभा सामान्य लोगों के विधानसभा होने के साथ किसी को भी चुनाव जीता देने के लिए अब तक उसी प्रकार से उदाहरण बन गया है जैसे सोहागपुर विधानसभा क्षेत्र से शबनम मौसी को चुनाव जीता देने के लिए दुनिया में सोहागपुर विधानसभा उदाहरण बनकर विधानसभा क्षेत्र से अलविदा हो गया….

अब मुन्ना भाई को लग रहा है कि उन्हें जनता की सेवा करनी चाहिए. क्योंकि वह उनकी कर्मभूमि है और जनता का दुख उनसे नहीं देखा जा रहा हैऔर पूरी पारदर्शिता के साथ अब उस स्थगन को जो कि उन्हें शहडोल में बने रहने के लिए जरूरी था टिकाए रखने की जरूरत हाईकोर्ट में नहीं रह गई है. इसलिए इस पर हाईकोर्ट से आर्डर कराना एक आवश्यकता थी. ताकि मुन्ना भाई कोतमा विधानसभा चुनाव से जब चुनाव लड़े तब कोई सरकारी  अड़ंगा उनके सामने स्पीड ब्रेकर बन कर न खड़ा हो जाए.  उन्होंने पूरी ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ उच्च न्यायालय को के आदेश को सम्मान स्वीकार करने के ईमानदारी दिखाई है, तो उच्च न्यायालय जबलपुर में उनकी ईमानदारी को स्वीकार करते हुए उन्हें अपने मूल विभाग में वापस भेजने का रास्ता खोल दिया है.इस तरह कोतमा विधानसभा चुनाव में  मुन्ना भाई हरी झंडी लेकर बहुत जल्द जमीन में अपना झंडा लहराएगा अब यह उनके विरोधियों के लिए सतर्क हो जाने वाली बात है जिन्हें मुफ्त में विधानसभा चुनाव में विधायकी का रसमलाई खाने को मिला था .

चुकी हम 21वीं सदी की राजनीति में सरवाइव कर रहे हैं और या  जहां दुनिया में “ना खाऊंगा ना खाने दूंगा…” का पर्यायवाची “ अदाणी ” नाम से चर्चित हो   वहीं अब अपनी पूरी जीवन मे निजी तौर पर कटप्पा की तरह ईमानदार रहने वाले डॉक्टर मदन त्रिपाठी अपने इस स्लोगन के साथ पहली बार अवतरित हुए हैं की ईमानदारी ही जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है और कोतमा विधानसभा में हाथ जोड़कर वे स्वयं को भगवान की अवतार की तरह पेश कर दिए हैं जो बादलों में उतर कर जमीन में उतरने को लोकहित में समर्पित हो जाने को व्यग्र दिख रहा है| हाईकोर्ट का आदेश उसी दिशा में एक शुरुआत है..

तो इस पर चर्चा करते रहेंगे कि इस वैभवशाली व्यक्तित्व का पृष्ठभूमि किस कदर विरासत को लेकर जनता के दरबार में मसीहा बनकर उतरने वाला है ऐसा मुन्ना भाई का दावा अखबारों में छपवाया गया है जो इतना पारदर्शी है कि प्रतीत होता है किस शासन और प्रशासन ने इस दावे को अपना समर्थन दिया है और वही मुन्ना भाई को चुनाव लड़ने की खुली छूट दी है अच्छा है अन्य लोगों को भी किसी कलेक्टर अथवा एसपी को भी ऐसी छूट दे दी जाए ताकि अनूपपुर जिले के कलेक्टर या एसपी वहां से चुनाव लड़ सकें, इससे एसपी और कलेक्टर का निजी पैसा खर्च नहीं होगा क्योंकि निर्वाचन अधिकारी आखिर चुनाव जो लड़ेगा …? यह भी लोकतंत्र में एक प्रयोग कहलाएगा……..

 हम 21वीं सदी की राजनीति में सरवाइव कर रहे हैं और  जहां दुनिया में “ना खाऊंगा ना खाने दूंगा…” का पर्यायवाची “अदानी” नाम से चर्चित हो   वहीं अब अपनी पूरी जीवन में निजी तौर पर कटप्पा की तरह ईमानदार रहने वाले डॉक्टर मदन त्रिपाठी अपने इस स्लोगन के साथ पहली बार अवतरित हुए हैं की ईमानदारी ही जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है और कोतमा विधानसभा में हाथ जोड़कर वे स्वयं को भगवान की अवतार की तरह पेश कर दिए हैं जो बादलों में उतर कर जमीन में उतरने को लोकहित में समर्पित हो जाने को व्यग्र दिख रहा है| हाईकोर्ट का आदेश उसी दिशा में एक शुरुआत है.. तो इस पर चर्चा करते रहेंगे कि इस वैभवशाली व्यक्तित्व का पृष्ठभूमि किस कदर विरासत को लेकर जनता के दरबार में मसीहा बनकर उतरने वाला है ऐसा मुन्ना भाई का दावा अखबारों में छपवाया है.

यह अलग बात है की तब जिला पंचायत के सदस्य अध्यक्ष नरेंद्र मरावी ने शहडोल में धरना प्रदर्शन कर मुन्ना भाई के खिलाफ आंदोलन किया था और तब की भारतीय जनता पार्टी सरकार मुन्ना भाई के पक्ष में खड़ी रही. इसके बाद मामला हाईकोर्ट तब पहुंच गया जब मुन्ना भाई को उनके मूल विभाग में वापस भेजने के लिए नरेंद्र मरावी ने अपनी पूरी ताकत लगा दी और आर्डर भी करा दिया था किंतु  उन्हें हाईकोर्ट से स्थगन दिया था और वह शहडोल में कटप्पा की भांति अपने लोगों के लिए समर्पित रहे. अब इसकी कोई आवश्यकता नहीं, करोड़ों रुपए का डीएमएफ का फंड भी उपयोग कर लिया गया होगा…. आखिर चुनाव में इन सब की आवश्यकता तो पड़ती ही है… और pppनिष्ठावान लोगों को उन्होंने अपने आशाओं के संरक्षण में तब भी नहीं हटने दिया जब की उन्हें यानी खंड शिक्षा अधिकारियों को स्थानांतरण करके हटा दिया गया था… क्योंकि उन्हें लगा इससे सिस्टम बिगड़ जाएगा .और ईमानदारी से काम करना मुश्किल हो जाएगा|

 किंतु दूसरा पक्ष ऐसा नहीं मानता है उसका कहना है की हाईकोर्ट के सामने वह जिला पंचायत अध्यक्ष  pppp maraviस्वयं खड़े होकर माननीय हाईकोर्ट से कहा कि उन्हें हटा देना चाहिए क्योंकि वह नियम विरुद्ध शहडोल में पड़े हुए हैं..

 इससे क्या फर्क पड़ता है कि मुन्ना भाई शहडोल में रहे या विधानसभा में अथवा शहडोल के डीपीसी रहते हुए विधानसभा चुनाव की तैयारी करें…. वह कहते हैं शासन से जो काम कराती है वह काम करते हैं तो अब शासन ने उन्हें विधानसभा चुनाव लड़ने की छूट दे दी है इसलिए पूरी ईमानदारी के साथ और  शासन के कर्मचारी होने के बावजूद उन्हें विधानसभा चुनाव में लड़ने की छूट मिली हुई है…. जिसके वे तन मन धन और पूरी पारदर्शिता यानी प्रचार प्रसार के साथ अपने कर्तव्य निष्ठा को कटप्पा की भांति समर्पित करने को व्यग्र हैं…

 किंतु राजनीति के जानकार कहते हैं की कटप्पा गद्दार है उसने अपने मालिक राजा को तलवार से मार डाला था, क्योंकि कटप्पा तब राजा के लिए समर्पित था और उसकी निष्ठा उसे गद्दारी करने का पूरा अवसर दे दी थी…  अब कटप्पा, मुन्ना भाई के रूप में विधानसभा में कर्तव्य निष्ठा का पालन करने को बेचैन दिख रहे हैं… टिकट फिर चाहे कांग्रेस की हो या भाजपा की यह उसकी नीलामी पर निर्भर होगा… और फिलहाल कटप्पा ने अपनी इमानदारी से इतना धन तो अरजीत ही कर लिया है कि वह भाजपा अथवा कांग्रेस दोनों की टिकट खरीद लेने की हैसियत रखता है….? फिलहाल अनूपपुर जिले के एक विधायक ने इस  विधायक की कीमत 50 करोड़ रुपए तो घोषित ही कर दी थी. तो न्यूनतम बोली अगर मंत्री जी की माने तो विधायक पद के लिए ₹50.00.00.000 से तय होगी ऐसा भी मान कर चलना चाहिए …

एक  समाचार पत्र में छपी खबर के अनुसार शहडोल कलेक्टर को इस बात की जानकारी नहीं है कि वह वीआरएस ले रहे हैं बल्कि स्वास्थ्य कारणों के कारण वह छुट्टी पर गए हुए हैं अब इस नई खबर ने प्रशासन को सतर्क होने के लिए पर्याप्त कारण दिए हैं कि उन्होंने याने मुन्ना भाई ने इसी दौरान कई ऑनलाइन भुगतान कर डाले हैं तो सवाल यह है कि इन सब की जांच क्या “ना खाऊंगा ना खाने दूंगा के पर्यायवाची गौतम हटाने की तरह ही पारदर्शी है और जांच नहीं होगी क्योंकि उन्हें चुनाव लड़ने की छूट जो मिली है… ?

 जो खबर है उसके अनुसार न्यायालय द्वारा स्थगन समाप्त कर पद से हटाए गए डी.पी.सी. मदन त्रिपाठी  का अफिस प्रेम इन दिनों चरम पर है। सूत्रों की माने तो 25 फरवरी शनिवार अवकाश के दिन- रात भर अफिस संचालित रहा आज 28 फरवरी रविवार अवकाश में भी कुछ समय आफिस चला लेकिन फिर सारी फाइले गाडी में डाल कर मुन्ना भइया ले गए..? दरअसल कोतमा विधायक बनने के चक्कर में मुन्ना भइया को समय नहीं मिला एवं करोडो रूपयो का  फस गया। अधिकारियों द्वारा चुनाव करने की दी गई छूट का इतना बड़ा नुकसान होगा किसी अधिकारी की समझ में नहीं आया। अब बिल भुगतान कर इसे हजम करना आवश्यक है. क्योंकि मुन्ना भइया को चुनाव फंड भी जुटाना है. इसलिए मेडिकल अवकाश में होने के बावजूद मुन्ना भइया विलो का आनलाइन भुगतान करने में व्यस्त हैं…?

 सूत्रों की माने तो इन दो दिनों में अधिकारियों की मिली भगत से बैकडेट मे धड़ाधड़ फइले तैयार कर अधिकारियों के हस्ताक्षर करा कर करोडो का भुगतान किया गया एवं किया जा रहा है..!! ज्ञात हो कि कलेक्टर शहडोल द्वारा 2018 में ही डी.पी.सी. को शिक्षा विभाग के लिए कार्यमुक्त किया जा चुका है ये न्यायालीन स्थगन पर कार्य कर रहे थे

 कयास ये लगाया जा रहा है कि डी. एम. एफ. मद के स्कूलों को फर्नीचर सप्लाई के लगभग 5 करोड, स्कूलों की स्पोर्टस मामग्री के लगभग 2 करोड, स्कूलों को भेजी गई स्प्रे मशीन के लगभग 3 करोड आदि कई करोड रूपयो के बडे भुगतान चुनाव लड़ने के चक्कर में फंसे है जिनका भुगतान अधिकारियों की मिली भगत से रातो रात किया जा रहा है…. क्योंकि यदि मुन्ना भाई विधायक बन गए तो इसकी ब्याज सहित वापसी भी करनी पड़ सकती है…   अभी इतना ही…


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