
रायपुर
आईआईएम, रायपुर ने अपने परिसर में बहुत उत्साह और धूमधाम के साथ दो दिवसीय युवा-20 परामर्श कार्यक्रम का सफलतापूर्वक आयोजन किया। कल (25 फरवरी, 2023) इस कार्यक्रम के पहले दिन के विचार-विमर्श में युवा कार्यक्रम और खेल मंत्री श्री अनुराग सिंह ठाकुर की ‘युवा संवाद’ में उपस्थिति महत्वपूर्ण रही। यह कार्यक्रम छात्रों के बीच बहुत उत्साह के साथ शुरू हुआ
संघर्ष समाधान में युवाओं को शामिल करना” विषय पर एक पैनल चर्चा आयोजित की गई। डॉ. अजय कुमार सिंह पूर्व मुख्य सचिव असम बोडोलैंड शांति वार्ताकार के अनुसार, युवा पीढ़ी को शांति की स्थापना का पालन करना चाहिए और उसे कायम रखने में योगदान देना चाहिए। डॉ. मोहित गर्ग आईपीएस एसपी बलरामपुर अग्रिम पंक्ति वामपंथी उग्रवाद का अनुभव रखते हैं। उन्होंने कहा कि शासन प्रणाली और सरकार में धीरे-धीरे विश्वास होने का अनुभव नक्सल प्रभाव वाले क्षेत्रों में देखा जा सकता है। इन क्षेत्रों की युवा पीढ़ी के संपर्क में रहकर, उनके साथ बातचीत करके, शैक्षिक, सांस्कृतिक और एथलेटिक गतिविधियों में भाग लेने के लिए बनाई गई गतिविधियों से ही उनका विश्वास अर्जित किया जा सकता है। श्री मो. एजाज असद आईएएस उपायुक्त श्रीनगर ने इस बात पर जोर दिया कि आतंकवाद और हिंसा के कारनामे युवाओं की आकांक्षाओं को प्रभावित करते हैं। श्री रेनहार्ड बॉमगार्टन, प्रतिष्ठित पत्रकार, अंतरराष्ट्रीय संघर्ष क्षेत्र जर्मनी ने सूडान में संघर्ष का मामला उठाते हुए यह सुझाव दिया कि प्रेम ही स्थायी शांति की नींव के रूप में काम कर सकता है। नेहरू युवा केंद्र की यूथ आइकॉन सुश्री प्रियंका बिस्सा ने कहा कि युद्ध की चर्चा मात्र से भोजन, पानी, संसाधन और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दे भी सामने आ जाते हैं।
शांति स्थापना, शांति निर्माण और शांति बनाए रखने के बारे में अनुभव साझा करने के बारे में दूसरी पैनल चर्चा श्री रजत बंसल आईएएस (डीसी बलोडाबाजार) द्वारा आयोजित की गई। इस सत्र के पैनलिस्टों में ब्रिगेडियर बसंत के पोंवार (सेवानिवृत्त), एवीएसएम, वीएसएम (पूर्व निदेशक, आतंकवाद-विरोधी और जंगल युद्ध महाविद्यालय), श्री रतन लाल डांगी, आईपीएस (निदेशक, सीजी राज्य पुलिस अकादमी), श्री रॉब यॉर्क (निदेशक, क्षेत्रीय मामले, प्रशांत फोरम, यूएसए) और डॉ. अदिति नारायणी (ट्रैक चेयर युवा-20) ने भाग लिया। इस सत्र का मुख्य निष्कर्ष यह रहा कि हथियारों के उपयोग के माध्यम से समस्याओं का समाधान प्रभावी नहीं है और सोचने का तरीका उपलब्ध उपकरणों की तुलना में बहुत ही महत्वपूर्ण है।
तीसरी पैनल वार्ता में डॉ. सर्वेश्वर नरेंद्र भूरे, आईएएस (डीसी रायपुर) की देखरेख में, आयोजित किया गया जिसमें समुदायों के बीच आम सहमति बनाने पर ध्यान केंद्रित किया गया। इस पैनल में मुंगेली, छत्तीसगढ़ के युवा नेता श्री नितेश कुमार साहू, जीन मौलिन विश्वविद्यालय में सहायक प्रोफेसर डॉ. फिलिप आइबे अवोनो और आईआईएम रायपुर से पीजीपी द्वितीय वर्ष की छात्रा सुश्री श्वेता करंबेलकर शामिल थीं। इस सत्र के महत्वपूर्ण वक्ताओं में से एक पूर्व नक्सली श्री बी. मरकाम भी रहे, जिन्होंने आत्मसमर्पण कर दिया था और समुदायों में शांति और परिवर्तन लाने में योगदान दिया। इस सत्र में संयुक्त राष्ट्र और भारतीय नेताओं जैसे गांधी और बुद्ध के शांति स्थापना में योगदान पर प्रकाश डाला गया है। भारत का जनसांख्यिकीय लाभांश इसकी युवा आबादी है, जो विश्व में सबसे बड़ी है। हालाँकि, जब समुदायों के निर्माण और शांति को बढ़ावा देने की बात आती है, तो नागरिक पूरी तरह से उसमें शामिल नहीं हो पाते क्योंकि शांति निर्माता संघर्ष का हल करने के बजाय उन्हें दबाने पर ध्यान केंद्रित करते हैं। आईआईएम रायपुर के पीजीपी प्रथम वर्ष के छात्रों द्वारा संचालित एक और सत्र सुलह के विविध परिप्रेक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित किया गया। वक्ता डॉ. प्रेम सिंह बोगज़ी (प्रतिष्ठित प्रोफेसर, आईआईएम रायपुर के अतिथि) ने यह कहा कि समाधान में यह पहचानना भी शामिल है कि पिछले कार्य आदर्श या प्रभावी नहीं होते, लेकिन इसके लिए सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिवर्तन करने और उसे आगे बढ़ने के लिए एक साझा दृष्टिकोण स्थापित करने की आवश्यकता है।

