ब्यौहारी थाना दलाल मुक्त थाना घोषित..,एक नवाचार..?

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शहडोल

जिले का ब्यौहारी थाना जिसके अंतर्गत कई महीने पहले एक साथ पुलिस-प्रशासन का सोन नदी पर रेत की स्मगलिंग का छापा पड़ा और करीब आधा सैकड़ा से ज्यादा गाड़ियां, डंपर, जेसीबी और अन्य मशीनें पकड़ी गई. वंशिका ठेकेदार कंपनी के आदमी ज्ञात रूप से और अज्ञात रूप से भी पकड़े और छोड़े गए. मुकदमा चल रहा है बावजूद इस क्षेत्र में माफिया गिरी कम नहीं है जितना रेत का अवैध उत्खनन उस समय होता था उससे ज्यादा इस समय हो रहा है. हाल में कांग्रेस पार्टी ने इसके लिए एक ज्ञापन भी दिया है, क्षेत्र के जिला पंचायत सदस्य पुष्पेंद्र पटेल के नेतृत्व में ग्रामसभा के लोग धरना भी दिए कि उन्हें माफिया से बचाया जाए और इस क्षेत्र में भू-माफिया वन माफिया और अनेकानेक माफिया खुलेआम माफिया गिरी करते हैं. पुलिस और प्रशासन यहां तब तक मूकबधिर बना रहता है जब तक की भोपाल की राजनीति करवट ना बदले… यानी भोपाल की राजनीति के सीधे नियंत्रण में ब्यौहारी थाना क्षेत्र के तमाम माफियाओं का साम्राज्य फल फूल रहा है, ऐसे में ब्यौहारी थाना क्षेत्र के थानेदार की क्या औकात होगी…? कि वह क्षेत्र के तमाम माफियाओं के दलालों को अपने थाना क्षेत्र में आने से रोके….

सब जानते हैं की आरटीओ ऑफिस में अगल-बगल काफी सारी खुली दुकानें होती हैं जिसमें एजेंट दलाल अवैध रूप से आरटीओ के वैध कारोबारी बने रहते हैं.. और उनकी मदद करते हैं स्वभाविक है आरटीओ ऑफिस की कार्यप्रणाली पुलिस विभाग की तरह ही छापामारी आदि की होती है, इसके बावजूद अवैध रूप का कारोबार और उसके दलाल उसके इर्द-गिर्द अवैध रूप से बने रहते हैं.

अब ब्यौहारी पुलिस के लिए यह अवैध रूप से काम करने वाले दलाल ही उनके वैध कार्यकर्ता इसलिए भी बन गए हैं क्योंकि जब रेत की अवैध गाड़ियां शहडोल जिले से बाहर जाती थी तो हर गाड़ी को पहुंचाने के लिए ब्यौहारी थाना क्षेत्र से लेकर बाणसागर थाना क्षेत्र तक मॉनिटरिंग यह अवैध दलाल ही करते थे.. ऐसे में इनका हिस्सा अब थाना क्षेत्र में दखल ज्यादा बढ़ गया है.. क्योंकि पुलिस की कमजोरियों को माफिया भली-भांति समझने लगा है..

जानता है कि देशभक्ति और जन सेवा का नकाब उसे कितना लाभ पहुंचा सकता है… इसलिए उसने पुलिस अफसरों को भजना बंद कर दिया नतीजतन व्यवहारी थाना क्षेत्र में माफिया राज भोपाल से संचालित होने वाला स्वर्ग बन गया.. प्राकृतिक संसाधनों की खुली लूटपाट और स्मगलिंग करने वाले स्मगलर राजनीति के बड़े खिलाड़ी हैं… ऐसे में थाना का अधिकारी की हैसियत सलूट मारने के अलावा कुछ नहीं रह जाती.. जो टुकड़ा फेंक दिया जाता है उसी पर उसे संतुष्ट होना था.

अब यह बात नागवार गुजरने लगी खाकी वर्दी का एहसास और उसका जमीर अचानक जब जागने लगा तब उसे पता चला कि बहुत देर हो गई है.. सिस्टम अन-कंट्रोल हो गया है, नतीजतन पोस्टर लगाकर आम आदमियों को यह समझाना पड़ रहा है कि पुलिस, माफिया, दलाल यह सब अलग-अलग लोग हैं और थाने का मालिक वहां का थानेदार होता है ….,और वह निशुल्क काम करता है, यह बताने का प्रयास इस पोस्टर के जरिए इसलिए एक आवश्यकता बन गई.

अन्यथा कोई जरूरत नहीं थी कि पुलिस और थाना को बताना पड़े कि वह निशुल्क; दलाल-मुक्त थाना है. इससे तो यह साबित होता है कि ब्यौहारी क्षेत्र को छोड़कर बाकी सभी थाने दलालों के अड्डे हैं…? अन्यथा सब जगह इस पोस्टर को लगा देना चाहिए.

और भी काफी हद तक शहडोल में नियमित रूप से दलाल, पुलिस के परमानेंट गवाह होते हैं पुलिस की बनाई फर्जी मुकदमों की हस्ताक्षर करते हैं.., पुलिस के बनाए फर्जी प्रकरणों को न्यायालय में पहुंचाने के लिए पूरा षड्यंत्र रचते हैं.., और शायद इसीलिए अब शहडोल थाना क्षेत्र को भी चिन्हित दलालों से मुक्त करने के लिए ऐसा पोस्टर लगा देना चाहिए. क्योंकि शहडोल संभागीय मुख्यालय है और यह मॉडल बनता है कि हमारी पुलिस कैसे काम करती है…? बाकी शहडोल जोन के तमाम पुलिस थानों के लिए…

तो सबसे पहले एक पोस्टर चिन्हित दलालों की फोटो लगाते हुए शहडोल कोतवाली को लगाना ही चाहिए अगर पता ना चले तो चार पांच साल के प्रकरणों में जो परमानेंट गवाह है पुलिस के, जिसमें कोई देवेश है.., कोई राम प्रमोद है.., कोई मजीद है.. इस तरह कुछ अन्य नाम भी हैं उन्हें अगर थोड़ा सा मेहनत करेंगे तो ऐसे नाम कई बार मिल जाएंगे शहडोल सुहागपुर और आसपास के थानों में इन व्यक्तियों को गवाह बनाकर फर्जी प्रकरण तैयार किए जाते हैंइससे पुलिस वालों का परिवार का पेट पलता है और शुरू से लेकर गृहमंत्री तक मुकदमों की खानापूर्ति भी होती है…? इनके पोस्टर लगाते हुए इन दलालों से मुक्त करने का काम शहडोल पुलिस को करना चाहिए, अगर इमानदारी से देशभक्ति जनसेवा का 10 परसेंट भी जिंदा रह गया हो तो.. अन्यथा पोस्टर लगाकर ग्राहकों को अपनी तरफ आकर्षित करने का प्रोपेगेंडा, आदिवासी विशेष क्षेत्र के लिए ईमानदारी के मुंह में करारा तमाचा है… यह मानना चाहिए. इसके अलावा कुछ नहीं और इसी प्रकार से पूरे थाने में अपने परमानेंट दलालों को जिन्हें वह चिन्हित किए हुए हैं..

उनकी फोटो लगाकर दलाल मुक्त थाना घोषित कर देना चाहिए.. यह भी एक नवाचार होगा..


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