उत्सर्जन, अमीर देशों से फिर भी नुकसान निम्न आय वाले देशों को: यह अतुलनीय अन्याय है -बिल गेट्स

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नई दिल्ली

Bill Gates Ram nath Goenka

कोरोना महामारी के बाद विश्व ने कई चुनौतियों का सामना किया है। ऐस में भारत ने इन चुनौतियों से निपटने में पूरी दुनिया के सामने एक अहम भूमिका निभाई है। बिल गेट्स ने बुधवार को कहा कि कोविड महामारी के पहले 25 हफ्तों में वैश्विक स्वास्थ्य क्षेत्र की 25 साल की प्रगति नष्ट हो गई और तीन साल बाद, अधिकांश देशों की स्वास्थ्य प्रणालियां अभी भी पूरी तरह से पटरी पर नहीं आई हैं। उन्होंने कहा कि महामारी ने भारत में इनोवेशन को आगे बढ़ाया है।

गेट्स ने यहां पांचवें रामनाथ गोयनका स्मृति व्याख्यान में कहा कि टीका विकास और डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचा मंच के अपने कीर्तिमान के साथ भारत में ‘नवाचार और सरलता’ के केंद्र के रूप में विकसित होने की क्षमता हैजलवायु संकट पर गेट्स ने कहा, ‘अधिकांश उत्सर्जन अमीर देशों से होते हैं और फिर भी अधिकांश नुकसान मध्यम आय और भूमध्य रेखा के पास स्थित निम्न आय वाले देशों को होता है। यह अतुलनीय अन्याय है। और, भले ही यह आप को प्रभावित कर रहा है, हमें तुरंत कार्रवाई करने की आवश्यकता है, हमें बहुत बड़े पैमाने पर कार्य करने की आवश्यकता है।’

गेट्स ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के साथ की चुनौतियों में से एक ‘ग्रीन प्रीमियम’ है जो ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन के बगैर निर्मित उत्पादों के साथ आती हैं। उन्होंने कहा, ‘यदि आप हरित जेट ईंधन खरीदने की कोशिश करते हैं, तो यह दोगुना महंगा है। यदि आप उत्सर्जन के बगैर सीमेंट खरीदना चाहते हैं, तो यह दोगुना महंगा है।

अब कोई कह सकता है कि जलवायु महत्त्वपूर्ण है, इसलिए चलो किसी को उस अतिरिक्त लागत के लिए चेक लिखने के लिए कह दें। लेकिन दुख की बात है कि यह एक वर्ष में खरबों डालर होगा। और, कोई निधि नहीं है … यहां तक कि अमीर देशों में भी,’ उन्होंने कहा कि जलवायु संकट एक नवाचार चुनौती है जो हरित प्रीमियम को कम कर रही है।


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