फर्जीवाड़ा या घोटाला; अहीर को बैगा जनजाति बना, हाईवे से लगी भूमि की हुई थी रजिस्ट्री…

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शहडो़ल

माननीय मुख्यमंत्री जी का डायलॉग……
“माफियाओं म.प्र.छोड़ दो वरना जमीन मे गाड दूगा”लगता है सपना ही रहेगा क्योंकि मुख्यमंत्री जी की बात को जिले के राजस्व अधिकारी गंभीरता से नही ले रहे भूमाफियाओं दिन दूनी रात चौगनी तरक्की करो हम हर कदम मे आपके साथ है राजस्व अमला यही कह रहा है ठीक बात है जब बाडी़ ही खेत को खाने लगे तो खेत कैसे सुरक्षित रहेगा।

                                                 संदीप तिवारी
(पूर्व शासकीय अधि.शहडो़ल)

बात आदिवासी बहुल्य जिला शहडो़ल के ग्राम कंचनपुर के आदिवासी जनजाति फगुना बैग की है।
ग्राम कंचनपुर प.ह. कंचनपुर तहसील सोहागपुर जिला शहडो़ल स्थिति आराजी खसरा नं. 1505 रकवा 3.00(तीन)एकड. भूमि फगुना पिता सेमरिहा बैगा के स्वत्त्व व पट्टेदखल की आराजी थी।
दिनांक 10-04-1991को उपरोक्त आराजी को फर्जी व कूटरचित तरीके से फगुना पिता सेमरिहा बैगा को फगुना पिता सेमरिहा अहीर बनाकर व अगूंठा निशानी लगाकर राजेश कुमार  निवासी बलपुरवा द्वारा विक्रय पंजीयन करा लिया फगुना पिता सेमरिहा बैगा की म्रत्यु हो चुकी है तथा उसके वारिस जीवित है वर्तमान मे उक्त आराजी का बटांकन होकर 1505/1 मुबारक हुसैन पिता सत्तार बख्श मंसूरी एवं उनकी पत्नी खुर्शीदा बेगम निवासी धनपुरी एवं लक्ष्मण प्रसाद गुप्ता पिता रामखेलावन गुप्ता निवासी शहडो़ल के नाम राजस्व रिकार्ड मे दर्ज है।
इसी तरह ग्राम गोरतरा,जमुआ, कुदरी,की कई आराजिया जो पूर्व मे आदिवासियों के स्वत्त्व व पट्टेदखल की रही है जिन्हें गलत व अवैधानिक गैरकानूनी तरीको से राजस्व अधिकारियों की मिलीभगत से गैर आदिवासियों के नाम राजस्व रिकार्ड मे दर्ज है और क्रय- विक्रय का खेल निरंतर जारी है।हलांकि..
भू.रा.संहिता की धारा 170(ख) का प्रावधान भी आदिवासी समाज के लिए बने है कुछ ममलो मे अनुविभागीय अधिकारी सोहागपुर के न्यायालय द्वारा आदेश पारित किया गया है आज भी शहडो़ल का आदिवासी समाज न्याय की बाट जोह रहा है।
यहा यह भी उल्लेखनीय है कि माननीय राष्ट्रपति महोदया के शहडो़ल आगमन पर प्रदेश मे सरकार के मुखिया मननीय मुख्यमंत्री जी द्वारा बडे़ जोर शोर से प्रदेश भर मे पेशा कानून लागू किया है एवं पिछले कुछ दिनो पहले पेशा कानून के नियमो को लेकर पंचायत स्तर पर जागरूकता सम्मेलन किया गया लेकिन आदिवासी बहूल्य शहडो़ल जिले मे पेशा कानून का कोई असर जमीन पर दिखाई नही दे रहा है आज भी आदिवासियों की जमीनों पर अवैध कब्जे, भवनो,शोरूम का निर्माण अनवरत जारी है साथ ही आदिवासियों की जमीनों को बेनामी तरीकों से क्रय विक्रय का खेल जारी है व भोले भाले आदिवासियों का शोषण हो रहा है। पेशा कानून के नियम 17 मे भू-अभिलेखों का संधारण के सम्बंध मे नियम बनाए गये है जिसके नियम 17(6)मे अनुसूचित जनजाति की कोई भी भूमि विधिक कारणो के बिना गैर अनुसूचित जनजाति के ब्यक्ति के नाम अन्तरित हो गयी है उसे अनुसूचित जनजाति के ब्यक्ति अथवा उसके परिवार के नाम वापस करने की पहल होगी।
शहडो़ल के राजस्व रिकार्ड मे दर्ज समस्त तालाबों मे कुछ तालाब अपने अस्तित्व को पूर्ण रूप से खो चुके है कुछ तालाब अस्तित्व की लडाई लड़ रहे है वो भी कितने दिन…? प्रशासन तो मौन रहकर अतिक्रमण कारियो को स्वीकृति दे रहा है नेशनल हाईवे से लगे ग्राम जमुआ की आराजी खसरा न.327/1,327/2,327/3,327/4,328,337/1,337/2 जो तालाब शासकीय भीठा दर्ज है शासन के पक्ष मे डिक्री पारित होने बाद भी बेदखली की कार्यवाही राजस्व विभाग ने अबतक नही की जबकी उक्त शासकीय सम्पत्ति लगभग 5(पांच करोड )की है।
इसी प्रकार जिला मुख्यालय नगरीय क्षेत्र ग्राम सौखी कि आराजी खसरा न.33,40 जो वर्तमान खसरे मे शासकीय तालाब एवं भीठा दर्ज है और अवैध कालोनी बस रही है उक्त तालाब की भूमि मे पचासों बहुमंजिला माकान बने है कोई देखने वाला नही है।
ग्राम कुदरी की आराःजी खसरा क्र.513,514,515,516,नेशनल हाईवे से लगी शासकीय भूमि है जहा पर नाला को पाटकर अवैध निर्माण कर उसका इस्तेमाल ब्यवसायिक रूप से किया जा रहा है खबर यह भी है कि राजस्व अमला को मिलाकर उक्त आराजी का दूसरा नं बताकर बेचने का प्रयास हो रहा है।
राजस्व अधिकारियों की मेहरबानी से तालाबो, नालो को पाटकर कालोनियों का निर्माण निरंतर जारी है।
प्रशासन द्वारा कुछ छोटे लोगों का अतिक्रमण हटाकर खानापूर्ति करने का काम किया जा रहा है किन्तु अभीतक बडे़ और प्रभाव साली ब्यक्तियो पर कोई कार्यवाही नही हो सकी आखिर क्यों..?

 


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