
उमरिया -तो क्या न्यूज़ पॉइंट बन गए हैं पर्यावरण संरक्षण के मुद्दे…? यही कहना पड़ रहा है, क्योंकि पर्यावरण संरक्षण के लिए कुछ होता दिखता तो नहीं कहने के लिए प्रदूषण नियंत्रण विभाग का एक वृत्त कार्यालय शहडोल में खुल गया है जहां अधिकारी उसे विलासिता की वस्तु मानता है. उसका इस क्षेत्र से पर्यावरण विनाश से कोई लेना-देना दिखता नहीं. उसी प्रकार से काम करता है जिस तरह से हमारा प्रशासन न्यूज़ पॉइंट ढूंढता रहता है. उमरिया जिले का उमरार नदी इसी तरह की नौटंकी बन गई है. हर साल वहां कुछ इस प्रकार से मेला लग जाता है जैसे की वह उमरिया जिले का पर्यावरण संरक्षण का सबसे बड़ा केंद्र है.
—————————————————– ( त्रिलोकीनाथ )-———————
अभी पिछले सालों हमने देखा है शहडोल के सीएफ ऑफिस के बगल में जो तालाब है जिसे चौपाटी के रूप से जाना जाता है उस वक्त सड़क के बगल में खड़े होकर तालाब गहरीकरण के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह श्रमदान करने आए थे, मुख्यमंत्री हैं तो बाकी तमाम उनके सभी चाहने वाले सांसद विधायक तो होंगे ही होंगे, प्रशासन तो उसका अभिन्न भाग है… तो पूरा अमला इस बात का साक्षी रहा की एक तालाब है और गहरीकरण कई बार हुआ. उस बार मुख्यमंत्री शिवराज सिंह कर रहे थे.. स्वयं श्रमदान भी किए .तो यह तो तय है कि वहां पर तालाब को गहरीकरण किया गया..
फिर इसी शासन-प्रशासन ने तालाब के ऊपर ही चौपाटी बना दिया उसमें भी लाखों रुपए पूरी पारदर्शिता के साथ भ्रष्टाचार के लिए उपयोग करअब चौपाटी बनी है .शुक्र है इसके बाद गहरीकरण के क्रांतिकारी अभियान इस तालाब में तो रुक गया है. क्योंकि चौपाटी के लिए तालाब को बड़ा हिस्सा पाट दिया गया.तालाब अभी भी वहां जिंदा है. अब शहडोल के यही हाल इस चौपाटी के ठीक सामने वाले तालाबों का हुआ. तलाब का बड़ा रखवा छोटा कर दिया गया. सुंदरीकरण के नाम पर लाखों करोड़ों रुपए तालाबों में खर्च हो गए, क्योंकि तालाब निर्माण के वक्त या गहरीकरण के वक्त उसके इनपुट और आउटपुट के लिए कोई सिस्टम डिवेलप नहीं हुआ. तो यह पूरे तालाब सिर्फ न्यूज़ पॉइंट के रूप में हर साल शासन और प्रशासन के लिए इवेंट का काम करते रहे. जहां पैसा भी खर्च होता रहा और पब्लिक को लुभाने के लिए एक न्यूज़ भी बन जाता था, कुछ इसी अंदाज में उमरिया जिले की उमरार नदी न्यूजप्वाइंट बनती दिख रही है. जिसमें हर साल एक उत्सव की तरह उसे सरकारी कार्यक्रम का हिस्सा बना दिया गया है . ऐसा लगता है जैसे शासन और प्रशासन नाम की कोई चीज ही नहीं है छोटी सी नदी को स्थाई तौर पर जिंदा रखने के रास्ते निकाल सके. गाहे-बगाहे फोटो सेशन का यह एक जरिया मात्र बन गया है. यही हालात चाहे तो शहडोल की मुड़ना नदी के मामले में भी इवेंट हर साल बन सकता है. लेकिन शायद इस तरफ इनके आयोजकों का ध्यान नहीं गया है. और यह सब इसलिए हो रहा है क्योंकि जिम्मेदार तब का शासन और प्रशासन इमानदारी से
पर्यावरण संरक्षण के लिए इस आदिवासी विशेष क्षेत्र में काम नहीं करना चाहती. कम से कम इस मामले में कोई भी डाटा हम अगर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से लेना चाहे तो एक तो उनके अधिकारी विभागीय-विलासिता से मुक्त नहीं हो पाते. दूसरा उनके पास कोई डाटा कलेक्ट किया ही नहीं गया है…? क्षेत्र की तमाम नदियों तालाबों के प्रदूषण संबंधी निवारण के लिए तो ऐसे में क्योंकि इनके अधिकारियों को भी मालूम है कि सब डपोल शंख है और टाइम काटो ,भ्रष्टाचार करो और वेतन उठाओ इससे ज्यादा उनका कोई दायित्व भी नजर में नहीं आता है. और यही कारण है कि नदी अपने आप में एक ऐसा उदाहरण बन गई है कि इस नदी के अलावा पूरे उमरिया जिले में में श्रमदान का शायद कोई मॉडल नहीं बचा इसीलिए अक्सर हर साल यह नदी इवेंट मात्र बनकर रह गई है या एक मॉडल बन गई है राजकाज कैसे चलाया जाता है…. और न्यूजप्वाइंट तो है ही आखिर मीडिया में मूर्ख बनाने के लिए इससे बेहतरीन धूर्तता का कोई दूसरा काम भी नहीं है. अन्यथा इमानदारी से मीडिया के जरिए यह सुनिश्चित होना चाहिए की जिम्मेदार संस्थान कितनी जिम्मेदारी से पर्यावरण संरक्षण के लिए डाटा प्रस्तुत कर सकते हैं अगर उनके पास है तो….
बहरहाल फिलहाल सरकारी समाचार कुछ इस प्रकार है, उमरार नदी पुर्नजीवन अभियान गति पकड़ता जा रहा है। जिला प्रषासन द्वारा नदी पुर्नजीवन अभियान के तहत उमरार नदी सफाई अभियान के 20वें दिन कलेक्टर डा कृष्ण देव त्रिपाठी के मार्ग दर्शन में ज्वालामुखी घाट में नगर प्रस्फुटन समिति एवं जलज नीर सामाजिक संस्था ने श्रमदान किया। कलेक्टर डा कृष्ण देव त्रिपाठी ने कहा कि उमरार नदी के पुर्नजीवन के अभियान लागतार समाज सेवियों, विभिन्न संस्थानों के द्वारा श्रमदान किया जा रहा है। उन्होंने नगर वासियो, समाज सेवियों से अपील की है कि उमरार नदी के पुर्नजीवन अभियान में अधिक से अधिक संख्या में श्रमदान करने हेतु आगें आएं। श्रमदान में जन अभियान परिषद के जिला समन्वयक शिव शंकर शर्मा , नगर विकास प्रस्फुटन समिति के कमल प्रसाद बैगा, हरि सिंह सहित जलज नीर सामाजिक सेवा संस्था के लोगों ने श्रमदान किया ।

