
पुणे| सरकार लंबित की संख्या कम करना चाहता है मामलों। उन्होंने कहा कि 4.98 से अधिक करोड़ मामले लंबित हैं भारत के विभिन्न न्यायालय। ये सबकुछ आसान नहीं है केस लोड को कम करने के लिए, जैसा कि नए मामलों की संख्या दोगुनी है कितने प्रकरणों का निस्तारण किया जा रहा है। वह कहा कि सामान्य परिस्थितियों में एक न्यायाधीश औसतन निपटारा करता है एक दिन में 50 से 60 मामले केंद्रीय कानून मंत्री ने कहा जिसका कुछ जजों ने निस्तारण किया है एक दिन में 200 मामले, लेकिन पेंडेंसी बढ़ रही है। ( sabhar jansatta)
अकेले शहडोल कोतवाली के प्रकरणों को यदि समीक्षा करूं तो पाता है कि 2 प्रकरण तो ऐसे हैं जिन्हें मैं जानता हूं कि इसे संबंधित पुलिस वालों ने जानबूझकर फर्जी प्रकरण तैयार किए हैं निश्चित तौर पर और भी कई फर्जी प्रकरण तैयार किए गए होंगे.. मान ले की शहडोल जोन में कोई 100 थाने हैं तो अपनी सीमित संज्ञान को आधार मानो तो 200 प्रकरण फर्जी न्यायालय में भेजे गए हैं जो न्यूनतम से भी न्यूनतम कहलायेंगे, यानी पुलिस के गैर जिम्मेदार और भ्रष्ट अधिकारियों की वजह से झूठी प्रकरण का बोझ न्यायालयों में बढ़ता चला जा रहा है… अगर वह सफलता पूर्ण तरीके से षड्यंत्र करके रखे गए हैं तो भी किसी अंजाम में पहुंचेंगे..,अगर नहीं पहुंचेंगे तो निरस्त हो जाएंगे.
किंतु इस प्रकार से यदि न्यायालयों में फर्जी प्रकरण संख्या बढ़ा रहे हैं तो कानून मंत्री रिजिजू में यदि यह कहा है कि करीब 5 करोड़ प्रकरण लंबित हैं तो इसमें पुलिस विभाग के द्वारा रचित फर्जी प्रकरणों की संख्या ज्यादा है यह कहना गलत नहीं होगा तो इस बात की समीक्षा और सुनिश्चित कौन करेगा कि यदि फर्जी प्रकरण न्यायालय में पाए जाते हैं तो उसके लिए दोषी जांचकर्ता अधिकारी/ थाना अधिकारी के खिलाफ क्या कार्यवाही की गई है…? या फिर वह इस चोर-सिपाही के खेल को मनोरंजन की तरह उपयोग कर न्यायालय का कीमती वक्त बर्बाद कर रहे हैं. और इसकी समीक्षा का कोई तकनीकी निष्कर्ष भी नहीं दिखता है.

