
मेरठ में शहीद कोतवाल धनसिंह गुर्जर की प्रतिमा का अनावरण
मेरठ11 MAR
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कहा आज अपना भारत बहुत ऊपर जा रहा है पर कुछ लोगों ने ठान लिया है कि हमें भारत की प्रतिष्ठा को धूमिल करना है। और उनमें एक देखिये जो मैं अपनी आंखे के सामने देखता हूँ- मै राज्यसभा का सभापति हूं- लोकसभा बहुत बड़ी पंचायत है, जिसमें आज तक माइक ऑफ नहीं हुआ और है और कोई बाहर जा कर कहता है की देश में माइक ऑफ होता है।कैसे बर्दाश्त कर सकते हैं? देश के अंदर संकट आया था इमरजेंसी के दौरान माइक भी बंद हुए थे और उन लोगों को जेल में रख दिया गया था जो राष्ट्र भावना से प्रेरित थे। वो दिन अब कभी वापस नहीं आ सकते। ऐसे मौके पर मैं आप सब से विनती करूँगा, आप अपने विचारों को खुल कर रखिये, उन शक्तियों के बारे में चुप्पी मत साधिये। निर्भीक होकर अपनी बात कहिये। ये आपका दायित्व है, आप ही कर सकते हैं। यदि आपको संसद में व्यवस्था चाहिए कि आपका सांसद ठीक आचरण करे, संसद के अंदर सही बहस हो, उस मंदिर के अंदर किसी भी प्रकार की डिस्टर्बेंस न हो, तो आप ऐसे मामलों के अंदर दखलअंदाजी करने वालों को प्रोत्साहन नहीं देंगे, उनसे सवाल करेंगे, तो निश्चित रूप से सब रास्ते पर आ जायेंगे।
इसके पूर्व मेरठ में उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कहा पुलिस प्रशिक्षण केंद्र में आकर जब शहीद कोतवाल धनसिंह गुर्जर जी की प्रतिमा का अनावरण किया तो मेरे मन में कई विचार आ रहे थे। पहले तो मैं, उनके माँ और पिता को नमन करना चाहता हूं। उनकी प्रतिमा का अनावरण करना मेरा परम सौभाग्य है।ये बदलते भारत की तस्वीर है। आपके उत्तर प्रदेश में भी बड़ा बदलाव आया है। और ऐसा बदलाव आया, कि पिछले 6 वर्ष में आपने देखा है, जो सोचा नहीं था वो मुमकिन हो रहा है। इसीलिए इस अमृत काल में मुझे ये परम सौभाग्य मिला है कि मैंने ऐसे महापुरुष की प्रतिमा का अनावरण किया है जिसने 1857 के स्वाधीनता संग्राम में इतनी बड़ी भूमिका निभाई। जरा सोचिये दिमाग पर जोर लगाइये कोतवाल जी का कार्यक्षेत्र बहुत लंबा था। उनको ये करने की आवश्यकता नहीं थी। आराम से रह सकते। इतना बड़ा जज्बा था। कितनी बड़ी राष्ट्रभक्ति उनमें थी। और क्या काम किया? 800 से ज्यादा लोग जो बंदी थे उनको छुड़ाया पूरे देश के अंदर एक नई चिंगारी उत्पन्न हुई।
मैं इस घटना के बारे में पहली बार मैं तब जागरूक हुआ, जब मै पश्चिम बंगाल का राज्यपाल था। और बैरकपुर में उस जगह गया जहां मंगल पांडे ने शुरुआत की थी, और तब ये जानकारी मिली।तब मेरे मन में एक बहुत निराशा भी थी कि हमारे शहीदों को क्यों भूल गए? सन 47 की आजादी के बाद ऐसा क्या हुआ? जिन लोगों ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम के उस महायज्ञ में इतनी बड़ी आहुति दी उनको हम नमन क्यों नहीं कर पाए? उनको याद क्यों नहीं कर पाए? हमारी इतिहास में ये बातें सही तरीके से दिखाई नहीं गई।
कल ही मेरठ महापंचायत में किसान नेता राकेश टिकैत ने केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए किसानों को दिल्ली चलने का आवाहन किया था

