
भोपाल ,करीब 19 वर्ष पहले जब तिरंगा यात्रा में मुलजिम बनी तत्कालीन मुख्यमंत्री उमा भारती ने अपनी गलती.., अपने मुख्यमंत्री का पद बाबूलाल गौर को सौं

पा था, तब उन्होंने यह नहीं सोचा था कि लौट कर उन्हें यह मुख्यमंत्री के पद को हमेशा के लिए गवाना पड़ेगा और वह नाराज भी जबरदस्त हुई और इतनी नाराजगी कि उन्होंने भोपाल ही छोड़ दिया था… फिर उन्हें गंगा सफाई अभियान के लिए केंद्र में जिम्मेदारी भी मिली, किंतु वहां भी वह नहीं टिकी. और फिर कुछ दिन बाद गंगा की लहरों में आनंद लेते हैं उनकी फोटो भी आई
तब जबकि अयोध्या के राम मंदिर में पूजन के वक्त उन्हें स-सम्मान वहां पर नहीं बुलाया गया.. उनकी नाराजगी बढ़ती ही चली गई और पूरा गुस्सा मध्यप्रदेश की शराब की दुकानों पर उतरा,
उन्हें याद आया कि शराब के कारण मंदिरों में स्कूलों के आसपास बहुत अत्याचार हो रहा है तो अक्सर वह शराब की दुकानों में पत्थर फेंक की नजर आती थी
. उनकी मांग थी कि शराब पर बंदिश लगाई जाए तो पूरी बंदी तो नहीं लगाई गई नोटबंदी की तरह, किंतु बैठकर-पीने में रोक लगा दिया गया. अपनी पूछ परख और सम्मान को बचता देख पूर्व मुख्यमंत्री सन्यासी उमा भारती इतना खुश हो गई कि वह अब शिवराज के श्रृंगार से कोई परहेज नहीं करती नजर आ रही है. और उन्होंने उनका फूल के साथ
श्रृंगार किया और कहा भी. तो क्या केंद्र सरकार की राजनीति और राज्य सरकार की राजनीति में कोई करवट बदल रही है… जिस कारण वे दोनों एक दूसरे का सम्मान करते हुए दिख रहे हैं…, अच्छा है मध्य प्रदेश के हित में दोनों पूर्व मुख्यमंत्री
और वर्तमान मुख्यमंत्री एक दूसरे का सम्मान करें .
पूर्व मुख्यमंत्री सुश्री उमा भारती ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री चौहान ने नई आबकारी नीति लाकर ऐतिहासिक कार्य किया है। इसके लिये उन्होंने मुख्यमंत्री को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि नई नीति से मैं बहुत खुश हूँ। मुझे आत्म-संतोष है। मुख्यमंत्री ने मेरे मन की कामना पूरी की है। ऐसी आबकारी नीति भारत के किसी भी राज्य में नहीं है। नई नीति में अहाते बंद करने का सराहनीय कार्य किया गया है। नई नीति में शराब पीकर वाहन नहीं चला सकते हैं और न ही सड़क पर चल सकते हैं। यह नीति ऐसे हालात पैदा कर देगी कि लोग शराब छोड़ने के लिए मजबूर हो जायेंगे। समाज की मर्यादा रखने में यह नीति मील का पत्थर साबित होगी।सुश्री भारती ने कहा कि नीति का पालन कराना प्रशासन के साथ जन-प्रतिनिधियों की भी बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि कृषि के मामले में मध्यप्रदेश पंजाब और हरियाणा से भी आगे निकल गया है। गौ-माता की रक्षा के लिए जैविक खेती कारगर होगी।

