
अनूपपुर 20.3.23
कबूतरों की सामूहिक मौत वैसे तो बड़ी घटना है, लेकिन कोरोना कार्यकाल में मेडिकल कॉलेज में जब सामूहिक मौत मनुष्यों की हुई थी तो उसे जिस प्रकार से दबा दिया गया या फिर गुमराह कर दिया गया उससे यह लगता है कि कबूतरों की इस सामूहिक मौत के मामले में हम कितने संजीदा होंगे…? और संजीदा क्यों होंगे…? यह भी एक बड़ी बात है. अन्यथा अब तक इसमें पुलिस प्रकरण दोषी व्यक्ति के विरोध दर्ज हो जाना चाहिए चाहे वह अज्ञात ही सही क्यों ना हो…? जो अभी तक तो होने की खबर नहीं आई है. तो हर शांति के प्रतीक के रूप में उड़ाए जाने वाले इन कबूतरों में से करीब 200 कबूतरों की मौत ने हमें यह सोचने को विवश किया क्षेत्र का पर्यावरण और प्रदूषण विभाग जिंदा है..? और अगर वह जिंदा है तो कितना जिंदा है…? वैसे इस विभाग के मुखिया अपने आप को सिर्फ एक समूह जो राजा महाराजाओं की तरह विलासिता पर विश्वास करता है उस राज्य का अधिपति मानते हैं इसलिए उन्हें ना तो मेडिकल कॉलेज में हुई मौतों की चिंता रही और ना ही कबूतरों की मौत की सैकड़ों कबूतरों की मौत की चिंता हुई होगी…? क्योंकि वह स्वयं कबूतर बाजी पर ज्यादा विश्वास करते हैं. तो पर्यावरण परिस्थितिकी के लिए भारतीय संविधान में पांचवी अनुसूची में संरक्षित शहडोल आदिवासी विशेष क्षेत्र जिसमें अनूपपुर जैसे कई जिले भी शामिल है पर्यावरण के हित के विरुद्ध कबूतरों की सामूहिक हत्या के लिए किसे चिन्हित करेगी…? करेगी भी या नहीं, अभी यह बात प्रश्न के घेरे में है..? तो जान लीजिए कि हुआ क्या है…..
कीटनाशक दवाई मिला गेहूं खाने से मौत का आशंका
विजयमत में प्रकाशित एक समाचार के अनुसारअनूपपुर जिले में लगभग 200 कबूतर मृत मिले हैं। मामला जिला मुख्यालय स्थित वार्ड क्रमांक 2 का है। यहां स्थित वेयर हाउसिंग लॉजिस्टक कॉर्पोरेशन शाखा अनूपपुर का वर्ष 2019-20 से एक गोदाम बंद प? है। इसके अंदर लगभग 200 कबूतर मृत पाए गए। इस बंद प? गोदाम के अंदर रखे एक्सपायरी डेट की कीटनाशक दवाईयों के कारण इतनी बड़ी संख्या में कबूतरों की जान गई है। जिसकीजानकारी लगते ही पशु विभाग के उपसंचालक डॉ. एटी पटेल के साथ पांच सदस्यीय डॉक्टर की टीम निरीक्षण करने वेयर हाउस पहुंची। लेकिन, वेयर हाउस के जिला प्रबंधक अशोक रघुवंशी किसी कार्य से भोपाल में होने के कारण गोदाम का ताला नहीं खुल सका। हालांकि, बाद में वेयर हाउस का ताला खुलवा लिया गया। इसके बाद डॉक्टरों की टीम ने कबूतरों की जांच की है।
खाद्यात्र की सुरक्षा के लिए उपयोग में लाए जाने वाले तीन पेटी कीटनाशक दवाई (सल्फास) तथा वर्ष वर्ष 2009-10 में खाद्य विभाग ने की कार्यवाही में 25 बोरी गेहूं जब्त कर वेयर हाउस को सुपुर्द किया था। जहां गेहूं खराब होने की स्थिति में उसे भी गोदाम के अंदर रखकर ताला लगा दिया था। इस बीच बारिश के दिनों में गोदाम में रखे कीटनाशक दवाई व गेहूं
दोनों खराब हो गए, और कीटनाशक दवाई (सल्फास) गेहूं में मिल गई। गेहूं के दाने को चुगने के लिए गोदाम के ऊपर
लगी टूटी सीट से अंदर आए लगभग 200 कबूतरों की गेहूं के दाने को खाने से मौत हो गई। इस संबंध में प्रीति शर्मा प्रभारी वेयर हाउस प्रबंधक से बात की गई तो उनका कहना था कि कीटनाशक दवाई गोदाम के अंदर रखी गई थी। जिसे
संभवत कबूतर की मौत हुई हैं। इसकी जानकारी वरिष्ठ कार्यालय को प्रेषित करूंगी।

