
नई दिल्ली
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“मोदी हटाओ देश बचाओ” यह उस आयरन लेडी इंदिरा गांधी के तानाशाही के खिलाफ लगाये गये तब के क्रांतिकारी जयप्रकाश नारायण का अहम नारा का नकल है। देश में लोकतंत्र इसी प्रकार के नारों से जिंदा रहता है। इस बार गलतफहमी हुई होगी आम आदमी पार्टी वालों को कि देश में नये तानाशाह नरेंद्र मोदी आ गए हैं और उनको हटा करके देश को बचाया जा सकता है। तो उन्होंने इस नारे का इजाद किया। और आप द रिकॉर्ड जगह-जगह पोस्टर लगाए, करीब 10,000 पोस्टर प्रिंटेड फ्लेक्स के आम आदमी पार्टी के संरक्षण में पाए गए। किंतु सभी पोस्टरों में एक तकनीकी त्रुटि हो गई प्रकाशक का नाम और प्रिंटिंग प्रेस का नाम नहीं दर्शाया गया। नीचे यह लिखाना हो सकता उनकी नीति का हिस्सा हो कि यह पोस्टर आम आदमी पार्टी ने प्रकाशित कराए हैं। ताकि इससे नियोजित तरीके से करीब 36 पुलिस के एफ आई आर किए जा सके इसलिए भी इसमें प्रकाशक का नाम नहीं पाया। और यह भी हो सकता है नीतिगत तरीके से की जब भाजपा का कोई भी चाहने वाला अथवा कर्तव्यनिष्ठ नेता ट्विटर से ट्वीट करेगा तो f.i.r. संबंधित थाने में दर्ज हो जाएगी ।इससे यह तो स्पष्ट हो गया कि भारत ने पुलिस की कार्यप्रणाली में सिर्फ ट्वीट करने पर भी एफ आई आर दर्ज हो जाती है। यह हमारी नई तकनीकी प्रणाली है। हो सकता है यह सब देश की श्रेष्ठ पुलिस व्यवस्था में एक दिल्ली पुलिस का नवाचार हो।
लेकिन हम भारत के संविधान की पांचवी अनुसूची में अनुसूचित शहडोल संभाग के क्षेत्र में रहते हैं शहडोल संभाग मुख्यालय से करीब 1 किलोमीटर दूर स्थित मुड़ना नदी पार गांव मेड़की तहसील/थाना पाली जिला उमरिया मैं रात के 9:30 बजे रेत ट्रैक्टर को जो प्रधानमंत्री आवास के लिए रेता ला रहा था किंतु हितग्राही के विरोधियों ने अपने सड़क के सामने से रेता परिवहन पर आपत्ति जताई और उस पर विवाद हुआ फिर हितग्राही आसमां को हाथ पकड़कर घसीट कर उसे घर के अंदर ले जाकर मारपीट की गई। जिसमें विवाद हुआ और हंड्रेड डायल पाली थाने को फोन गया, हंड्रेड डायल रफ्तार के साथ मौका स्थल पर पहुंचा भी और इसके बाद वह आसमां वी और उसके पति को यह कहकर रात 11बजे 30 किलोमीटर दूर पाली थाना ले गए कि रिपोर्ट करनी है। किंतु वहां पर पूरी रात बैठाए रखा और तथाकथित कोई परमानेंट दलाल के हाथ से थाने में ही शिकायत थाना पाली को लिखी गई; f.i.r. नहीं किया गया और प्रताड़ित महिला और उसके पति को 4:30 बजे सुबह थाने से बाहर जाने के लिए कह दिया गया। फिर उन्होंने ट्रेन पकड़कर शहडोल आए और अपने मेड़की गांव गए और परिस्थितियों को समझ कर अपनी सास के साथ अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक शहडोल को आकर पूरी घटनाक्रम की जानकारी दी ।उनके अनुसार एडीजीपी सागर ने कहा आपके साथ न्याय होगा । इस आश्वासन को लिए उसकी बूढ़ी सास और पति अब एक खतरनाक भरे माहौल पर सांस ले रहे हैं ।खतरनाक इसलिए क्योंकि आसमां की सास की माने तो हमलावरों पक्ष के अन्य लोगों ने उसके एक लड़के की हत्या कर दी थी। अब उनका एक ही लड़का है जो उनका सहारा है ।तो यह समझने की बात है कि दिल्ली से हमारी शहडोल की पुलिस कितनी दूर है ।दिल्ली में 138 f.i.r. चट मंगनी पट ब्याह की तरह हो जाते हैं और शहडोलजोन में पूरी रात महिला को थाने में बैठाए रखा जाता है और f.i.r. नहीं की जाती है । और मामला जब एडीजीपी के पास आता है तो उन्हें आश्वासन का एक झुनझुना मिलता है ।
वह भी उस पाली थाने में जहां के पास में नरोजाबाद थाना है जहां आदिवासी केवल सिंह का 17000000 रुपए लूट जाता है और वह आश्वासन का झुनझुना बजाते बजाते अंततः यह आशा छोड़ देता है कि उसे न्याय मिलेगा…. यह भी अलग बात है की मामला आदिवासी मंत्री के क्षेत्र का है और पूर्व सांसद के रिश्तेदार का है. इस तरह मुस्लिम महिला आसमा वी को क्यों न्याय मिलेगा …? इस आश्वासन पर क्यों यकीन करना चाहिए। बजाय इसके की उनके जीवन में पुनः कोई बड़ा प्राणघातक हमला पाली पुलिस के धंधे का बड़ी अदायगी का कारण क्यों न बन जाए और जिसका बंदरबांट बेहतरीन पारदर्शी तरीके से पांचवी अनुसूची क्षेत्र में होता ही रहता है। क्योंकि केवल आदिवासी के मामले में तो अब तक यही होता दिखाई दे रहा है। तो मुस्लिम महिला को न्याय क्यों मिलना चाहिए …? यह बड़ा प्रश्न है ।
27 वर्षीय आसमा बी ने एडीजीपी को पत्र लिखकर कहा है दिनांक 20 मार्च 2023 को रात को करीब 9:00 जब मेरे अपने प्रधानमंत्री आवास निर्माण के लिए ट्रैक्टर रेता लेकर आया तो उपरोक्त तहसीना और अन्य लोगों ने ट्रैक्टर को रोक रहे थे कि ट्रैक्टर इस रास्ते से नहीं जाएगा। जबकि वही एकमात्र रास्ता रहा जहां से मेरे घर में रेता को अनलोड किया जा सकता है। इसी बात को लेकर विवाद हुआ और उपरोक्त लोगों ने मेरे साथ जबरदस्ती हाथ पकड़कर घसीटते हुए अपने घर में ले गए और कमरे में बंद करके मारपीट किए । मैं जब चिल्लाई तो मेरे पति बाहर दौड़े उन्हें पत्थर फेंककर मारे गए जिससे उनके सिर पर चोट हो गया, मेरे पीठ पर चोट के निशान हैं और उनके पति मुन्ना मां बहन की गंदी गंदी गालियां गलौज कर रहे थे। कि तू यहां से कैसे ट्रैक्टर निकालेगी। इस घटना की शिकायत हंड्रेड डायल में मेरी नंद नजमा ने फोन किया तब पुलिस आई और वह मुझे और मेरे पति को गाड़ी में बैठा कर थाने में शिकायत कराने के लिए यहां से करीब 30 किलोमीटर दूर पाली थाने में 100 गाड़ी में बैठा कर ले गए जहां पर मेरी शिकायत मेरे कथन अनुसार ना करके मनमानी तरीके से वहां पर उपस्थित एक व्यक्ति से लिखाई जा रही थी।
मैंने आपत्ति भी किया किंतु थाने वालों ने अनसुना कर दिया ।मुझे देर रात थाने में मेरे पति के साथ बैठा रखा गया और करीब 4:30 बजे घर जाने के लिए वापस छोड़ दिया गया। किंतु कोई गाड़ी नहीं होने से बाद में मैं और मेरे पति इम्तियाज ट्रेन पकड़कर शहडोल आये। और रास्ते भर परेशान रहे। मेरा मेडिकल भी नहीं कराया गया जिससे मुझे शक है कि मेरी रिपोर्ट लिखी ही नहीं गई है। क्योंकि एफ आई आर की कोई कॉपी नहीं दी गई है। और एक सादे पन्ने में एक शिकायत मेरी पति इम्तियाज खान की ओर से उपस्थित एक बिना पुलिस ड्रेस वाला के द्वारा लिखा गया है। और उसी में मुझे पावती दे दी गई है।
आसमा बी ने एडीजीपी को कहा कि मेरे साथ जबरदस्ती घसीट कर मारपीट करने वाले सभी दोषी जनों के विरुद्ध समुचित कार्यवाही करने की कृपा की जाए ताकि दोषी लोगों का मनोबल ना बढ सके अन्यथा वह राजविरात कभी भी मेरे और मेरे परिवार के जान के दुश्मन बन जाएंगे और घर में घुसकर मारपीट करेंगे। मेरे घर में मेरी बूढ़ी सास और मेरे पति रहते हैं जो अक्सर काम पर रहते हैं। दया कर तत्काल कानूनी कार्यवाही करने की कृपा की जाए और दोषियों को दंडित कराया जाए ।
देखना होगा कि दिल्ली पुलिस की रफ्तार और कर्तव्यनिष्ठा के सामने शहडोल जॉन की पुलिस क्या मुस्लिम महिला आसमां और उसके सास को सुरक्षा और न्याय दे पाती है अथवा किसी बड़ी घटना का इंतजार में समय काटती है….

