दफन हुआ दमदार गैंगस्टर-माफिया…?, मंत्री ने कहा आसमानी फैसला -2 ( त्रिलोकीनाथ )

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विधानसभा में आदित्य योगी (मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश) का यह वादा कि वह उन्हें मिट्टी में मिला देंगे…  खंभा ठोक करके प्रयागराज में कब्रिस्तान के अंदर पूर्व सांसद और वर्षों विधायक रहे गैंगस्टर अतीक और उसके कुनबे भाई-ateek ahmad death news in hindi : अतीक अहमद की हत्या किसने कराई है वीडियोलड़के मिट्टी में कल रात के दफन कर दिया गया… किंतु जितना माफिया गिरी  उसके जिंदा रहते बरकरार रहा है उससे ज्यादा खतरनाक असर उसे उसके समाज में जैसे स्वीकार कर लिया है… कम से कम राजनीतिक जमात ने  अतीक की हत्या के तरीके बाद में आदित्य योगी के मंत्रि का यह बयान की “यह आसमानी कुदरत का फैसला था” के तौर तरीके से नई राजनीति के शतरंज की बिसात क्या भारत  चल चुकी है और भविष्य की राजनीति इसी के इर्द-गिर्द वोट-बैंक की खेती करेगी… ताकि कारपेट इंडस्ट्री कबजा रहे | यह कहना जल्दबाजी होगी… गैंगस्टर दफन हो चुका है या फिर मरने के बाद नए-नए प्रकार की राजनीति का आदर्श के रूप में उत्तर प्रदेश-भारतीय राजनीति मैं जिंदा रहेगा…?

______________________________________( त्रिलोकीनाथ )____________

इसके साथ यह बात भी अब उभर कर आने लगी है कि क्या उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी का योग मुख्यमंत्री बनने का खत्म हो चुका है या उनका टाइमलाइन सिस्टम में खत्म कर दिया है ताकि नए प्रकार की राजनीति जो कॉरपोरेट इंडस्ट्री से खड़ी होगी उसमें  संतों  का भेश में रहने वाले राजनीतिज्ञों का रोल सीमित कर दिया जाए. मध्यप्रदेश में धुआंधार अपनी चुनाव प्रचार शैली से कांग्रेस-सरकार को उखाड़ फेंकने वाली तत्कालीन युवा सन्यासी उमा भारती राजनीति के अखाड़े से लगभग कट कर दी गई हैं. और उन्हें अंततः स्वयं संघर्ष करके यानी कानून को अपने हाथ में लेकर शराब की दुकानों में पत्थर फेंक कर शराबबंदी का अभियान चलाना पड़ा और समझौते में उमा दीदी को संतुष्ट करने के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह सरकार ने शराब के अहाते शराब पीने के स्थान बंद करने की घोषणा करनी पड़ी.

हिंदुत्व की राजनीति के नाम पर कॉर्पोरेट इंडस्ट्री ने उमा भारती को संतुष्ट किया, किंतु हिंसा की राजनीति, उत्तेजना रोमांच और भावनात्मक ध्रुवीकरण के लिए हत्या की राजनीति क्या भारतीय राजनीति की सच्चाई होती जा रही है…? इस पर तो प्रश्न खड़े ही होंगे, किंतु दुखद पक्ष है कि जब उच्चतम न्यायालय के संज्ञान में होने के बावजूद यानी कानून के संरक्षण में होने के बावजूद भी हथकड़ी में बंधे लोगों की सार्वजनिक हत्या करने वाले जय श्री राम का नारा लगाते हैं तो भारतीय सनातन धर्म शर्म और कायरता से शर्मसार होने लगता है …क्योंकि इतना कायर तो नहीं है. राम ने रावण को अपनी मान मर्यादा और शक्ति स्वरूपा सीता के अपहरण के बाद भी रामायण में रावण की मर्यादा को उतना ही महत्व दिया गया और रावण से ही शिव की आराधना करा कर उसे बार-बार अपराध मार्ग से हट जाने का चेतावनी दी गई.

और अंततः सुनिश्चित तत्कालीन कानून व्यवस्था के तहत समस्त चराचर बल के साथ राम ने समुद्र पार करके रावण के घर में युद्ध कर उसका वध किया था |  अब जो भारतीय राजनीति में राम भक्त होने का दावा करते हैं वह लोग हथकड़ी में बांधे हुए  निरीह व्यक्तियों की गोली मारकर जय श्रीराम-जय श्रीराम बोलकर जश्न मनाते हैं ,तो लगता है क्या राम इस प्रकार का शक्तिशाली व्यक्ति थे..?  बिल्कुल नहीं ; मर्यादा पुरुषोत्तम इनके आदर्श नहीं है जो हथकड़ी में बंधे हुए व्यक्ति को तालिबानियों की तरह हत्या कर देते हैं.. यह तो तालिबानी आदर्श का एक उदाहरण था, जो भारत में शायद पहली बार हुआ है.. या फिर राम के नाम पर कायरों का साम्राज्य स्थापित हो रहा है.. यानी हत्यारे हत्या का खेल खेलते हैं और राम बोलकर उसी प्रकार से मुक्त हो जाना चाहते हैं जिस प्रकार से हत्या करने के बाद कुछ कट्टर इस्लामी पंथ के लोग सर तन से जुदा का नारा लगाते हैं..

यह अलग बात है कि दोनों ही लोग अलग-अलग ध्रुवीकरण कर रहे होते हैं.. बहरहाल लोकतंत्र में सुप्रीम कोर्ट के आदेश की भी एक प्रकार से हत्या की गई है प्रयागराज में..? हमारे शहडोल में भी हाईकोर्ट जबलपुर के आदेश में शहडोल के मोहनराम मंदिर को स्वतंत्र कमेटी के प्रबंधन में तब तक संचालित रखने का  2012 में आदेश पारित किया गया था…, 2023 में हम आ गए हैं हाईकोर्ट के आदेश की हत्या यहां  भी पंडित-पुजारी का नकाब पहनकर लोग लगातार कर रहे हैं…हम इस पर आगे भी चर्चा इसलिए करते रहेंगे क्योंकि खबर है कि  शहडोल में अपराधी प्रवृति के व्यक्ति लवकुश पांडे को सम्मानित करने की षड्यंत्र, कमिश्नर राजीव शर्मा के हाथों करने वाले हैं.. तो क्या शहडोल कमिश्नर, प्रयागराज में हथकड़ी में बंद गैंगस्टर की हत्या के बावजूद शहडोल के किसी मोहनराम मंदिर में गैंगस्टर की तरह ही कब्जा करके हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद गत दस 11 साल से कब्जा करते रहने वाले व्यक्ति को अपने हाथों से सम्मानित करेंगे…? अगर वह ऐसा करते हैं तो हमें आश्चर्य क्यों करना चाहिए…? यह बड़ा सवाल है हम इस पर चर्चा करते रहेंगे….(Jari-3)

 

 

 


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