
गृह मंत्रालय पत्रकारों के लिए मानक संचालन प्रक्रिया तैयार करेगा(जनसत्ता ब्यूरो)
पत्रकारों के लिए माफिया की मौत वरदान बनेगी या अभिशाप यह तो भविष्य बताएगा किंतु जिस तरह से पत्रकारों का नकाब पहनकर की पूर्व सांसद माफिया डॉन अतीक अहमद और उसके भाई की पुलिस कस्टडी में हथकड़ी लगी हालत में हत्या कर दी गई उसके बाद सीधे प्रधानमंत्री और गृहमंत्री यानी नरेंद्र मोदी और अमित शाह मिलकर पत्रकारों की सुरक्षा के लिए सतर्क सतर्कता पूर्ण चिंतन-मंथन कर रहे हैं. वैसे भी पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश श्री चंद्रचूड़ ने रामनाथ गोयनका पुरस्कार के दौरान स्पष्ट कहा था की “पत्रकारिता के बिना लोकतंत्र जिंदा नहीं रह सकता” यह अलग बात है कि पिछले 75 साल में पत्रकारिता को जिंदा रखने के लिए सकारात्मक प्रयास नहीं किए हैं.. बल्कि अखबार या मीडिया के नाम पर एक ऐसा वर्ग तैयार हो गया है जो जमीन पत्रकारों को उनके अधिकार और उनकी माली हालत को ठीक करने के लिए कोई ठोस प्रयास नहीं किए हैं …बल्कि सरकारी फंड लेकर के सत्ता की चाटुकारिता के तमाम प्रयास करते रहे हैं… जबकि विकेंद्रीकरण के युग में तमाम प्रकार के डिजिटल प्रयोग किए जा रहे हैं यदि सरकार अखबारों और मीडिया को भुगतान कर रही प्रक्रिया में कोई नीतिगत फैसला लेकर सीधे संबंधित पत्रकारों को आर्थिक व गुणवत्तापूर्ण उत्थान के लिए लाभ देने का भी प्रयास करती तो शायद सुधार दिखते किंतु हालात जमीन में इतने खराब हैं की आज भी पत्रकारिता का कंट्रोल अथवा विधायिका या फिर कार्यपालिका ने कंट्रोल कर रखा है और रिमोट कंट्रोल की तरह पत्रकारिता को भोपू बनाकर छोड़ दिया है.. जो उनकी तरफ से मुर्ग-लड़ाई पर विश्वास करने वाली पत्रकारिता करते हैं.. यह लगभग टीवी चैनल में भारतीय नागरिकों ने देख लिया है इस संबंध में दैनिक जनसत्ता इस प्रकार की खबर प्रकाशित की है..
____________________________________( त्रिलोकीनाथ )________________
केंद्र सरकार ने गिरोहबाज से नेता बने अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की प्रयागराज में मीडिया कर्मी बनकर आए तीन हमलावरों द्वारा हत्या किए जाने के बाद पत्रकारों की सुरक्षा के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार करने का फैसला किया है। गृह मंत्रालय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में और गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में पत्रकारों की सुरक्षा के लिए एसओपी तैयार करेगा।
अधिकारियों ने बताया कि प्रयागराज में पत्रकार बनकर आए तीन हमलावरों द्वारा अतीक और उसके भाई अशरफ की हत्या किए जाने के बाद यह कदम उठाया जा रहा है। अहमद और अशरफ की शनिवार रात को उस समय हत्या कर दी गई थी, जब वे पत्रकारों से बात कर रहे थे।
प्रधानमंत्री व गृह मंत्री की देखरेख में तैयार किए जाएंगे ,दिशानिर्देश प्रयागराज में पत्रकार बनकर आए तीन हमलावरों द्वारा अतीक और उसके भाई अशरफ की हत्या किए जाने के बाद यह कदम उठाया जा रहा है। यह घटना तब हुई, जब अतीक और अशरफ को पुलिसकर्मी चिकित्सा जांच के लिए एक मेडिकल कालेज लेकर जा रहे थे। मानक संचालन प्रक्रिया तैयार करने की समय सीमा अभी तय नहीं की गई है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि किसी भी घटना के दौरान कवरेज के दौरान पत्रकारों की पहचान से लेकर उन्हें सुरक्षा मुहैया कराने के लिए विस्तृत दिशानिर्देश बनाना होगा, जिसका पालन देश में सभी पुलिस को करना होगा। कुछ सुरक्षा के ऐसे मापदंड होंगे, जिनका पालन पत्रकारों को भी करना होगा।
तो अच्छा है की माफिया डॉन की मौत पत्रकारों के लिए प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के लिए चिंता का सबब बनी हुई है देखते हैं यह चिंता पत्रकारों के लिए वरदान बनती है अथवा अभिशाप..

