लोकतंत्र की लाइव रियलिटी,ठाएं ..ठाएं… ठाएं….. प्रत्यक्षण किम् प्रमाणम -( त्रिलोकीनाथ )

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लोकतंत्र में पूर्व सांसद और लंबे समय तक विधायक रहे अतीक और उसके भाई अशरफ की हत्या ने सिर्फ यह साबित किया हैShooter Sunny Singh:शालू गैंग का सक्रिय गुर्गा रहा है सनी, आदतन अपराधी  था...कई वारदातों को दे चुका है अंजाम - Atiq Ahmed Murder Case, Sunny Singh  Has Been An Active Henchman Of कि उन्होंने जो सांस्कृतिक-विरासत अपराध की दुनिया में कायम किए थे, उससे ज्यादा.. कम नहीं, तरीके से इस लोकतंत्र उनके उनके पद चिन्हों पर चलते हुए हत्या के अपराध को आगे बढ़ाया है… कुछ नए गैंगस्टर-क्रांतिकारी हत्यारे कायरों की तरह है वीरता के साथ हत्या को अंजाम दिया. शहडोल में फरसा-धारी परशुराम जयंती देखी गई.  जिसमें आईजी ,एसपी से लेकर तमाम पुलिस अधिकारी गण बुलेट-प्रूफ जैकेट के साथ अगर मैं सही समझ रहा हूं तो तैयारी के रूप में दिखे.. जैसे वह कोई किसी भी भयानक हिंसा को सामना कर सकते हैं…? और इसका स्वरूप धर्म के रूप में हमने पहली बार देखा कि जब तलवार, फरसा और दुधारी-फरसा, धनुष-बाण नहीं रहा, जो हमारे आदिवासी संस्कृति का प्रतीक है इसके बावजूद भक्तों ने जमकर डांस में थिरकते नजर आए और शायद शहडोल का पुलिस सुरक्षात्मक तैयारी शायद इन्हीं तलवारों-फरसों और उसमें छुपी भय, पहले तो लगा ए ईद के खतरों से पैदा हुआ सुरक्षा चक्र है… बाद में समझ में आया नहीं, लोकतंत्र में सांस्कृतिक रैलियों में सुरक्षा चक्र संतों की रूप में जन्म लेने लगा है क्योंकि सांस्कृतिक शांतिप्रिय और उत्साह आनंद की रैलियों के अंदर  सड़यंत्रों का बाजार इतना विकसित हो चुका है कि जिसकी  गंध पुलिस को जब इनपुट के रूप में मिलती है तब वह ऐसी बुलेट-प्रूफ सुरक्षा चक्र शांति और सद्भावना तथा कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए किया जाता है.

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एक अलग बात है कि षड्यंत्रकारी किसी भी गैंगस्टर जो धर्म का नकाब पहने होता है उसका सार्वजनिक सम्मान करने में अपना अपने स्वाभिमान की सफलता समझते हैं.. तो क्या स्वाभिमान इतना षड्यंत्रकारी हो चुका है या लोकतंत्र ही धर्म के रंग को गंधहीन और विषैला बना दिया है.. शहडोल के परशुराम यात्रा के सुहागपुर पार्ट1 और सुहागपुर पार्ट 2 की रैली में कुछ इस प्रकार का सुरक्षा चक्र सनसनी का कारण भी बना रहा है… नगर वासियों के लिए.

हालांकि ब्राह्मण कभी इतना खतरनाक नहीं रहा, वह बहुत उदारवादी और शांतिप्रिय प्रतीक का पुजारी रहा है.. बरहाल बात सुरक्षा चक्र की चल रही थी प्रयागराज में इलाहाबाद का निवासी पूर्व सांसद अतीक और उसके भाई की हत्या के तरीके में कुछ इस प्रकार का पुलिसिया-ड्रामा प्रस्तुत किया जैसे बकरे को हलाल करने के लिए रस्सी में बांधकर बलिदान करने की परंपरा को लोकतंत्र ने पूरे मीडिया के सामने प्रस्तुत कियाअतीक अहमद और अशरफ के हत्यारों का अब ये होगा अंजाम, जानकर चौंक जाएंगे? एक ही हथकड़ी में दो बकरे जिसमें एक भारतीय संसद का सदस्य रहा और लंबे समय तक उत्तर प्रदेश विधानसभा का विधायक भी रहा… उन्हें जय श्री राम का नारा बुलंद करने वाले  बलिदानी नवोदित-गैंगस्टर के सामने कुछ इस तरह लाइव टेलीकास्ट के जरिए हत्या के अपराध को फिल्माया गया जैसे तालिबानी राष्ट्रों में सीरिया अथवा तालिबान के धार्मिक उन्मादी मुस्लिम कट्टरपंथी विरोधियों की हत्या कर देते हैं..

भारत में पहली बार यह फिल्म देखने को मिली, जब  जय श्रीराम-जय श्रीराम का नारा लगाकर  हिंदू तालिबानी बंद  रस्सी में बंधे बकरों को अपनी संपूर्ण  वीरता पूर्वक  40 सेकंड में हत्या कर देते हैं…. लगता है बाहुबली हाथी और सांड के साथ युद्ध को अंजाम देते हैं..  यह नए भारत का या तो प्रतिनिधित्व करता है या फिर उसका सांस्कृतिक-राष्ट्रवाद इस कायरता पूर्ण कृत्य से गौरव का अनुभव कराता है…  इस रोमांचक हिंसक और उत्तेजना पूर्ण प्रयागराज के लाइव रियल स्टोरी में शायद सब कुछ भूल जाता…

किंतु  जैसे ही गौतम अदानी, महाराष्ट्र के नेता शरद पवार से मुलाकात करते हैं तो लगता है जैसे वह इस बहुचर्चित प्रयागराज के रियल स्टोरी के ड्रामे को हत्या कर रहे होते हैं . गौतम अडानी फिर जीवित हो जाते हैं, भारतीय राजनीति में उनकी एंट्री एक शानदार परिदृश्य के रूप में लाई जाती है.. और जैसे ही कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और नेहरू-गांधी वंश के प्रतिनिधि ऐतिहासिक पदयात्रा करने वाले राहुल गांधी अपने मकान की चाबी सरकारी कर्मचारियों को सौंपते हैं उससे चुपचाप चल रहे खतरनाक राजनीति फिर गर्म आ जाती है.. Rahul Gandhi vacates govt-allotted bungalow, says 'paying the price for  speaking truth' - India Todayराहुल गांधी ने साफ कहा है कि उनका अपना घर इस देश में नहीं है क्योंकि उन्होंने कभी मकान नहीं बनाया.. क्योंकि भारत उनका अपना मकान है. और  कन्याकुमारी तक से कश्मीर तक  ऐतिहासिक यात्रा में उन्हें लोगों का जो प्यार मिलता है. वह हर व्यक्ति राहुल गांधी को अपने घर में जगह देने की भरपूर कोशिश करता है. क्योंकि राहुल गांधी भारतीय राजनीति में कॉर्पोरेट इंडस्ट्री से चलने वाली पॉलिटिकल कॉर्पोरेट  इंडस्ट्री पर बड़ा हमला करते हैं…

और जिसका प्रतिबिंब या असर कहना चाहिए दिल्ली विधानसभा में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के शब्दों में लिखा जाता है कि “गौतम अदानी तो मैनेजर है.. मोदी का.”Gautam Adani: शरद पवार से अचानक मुंबई में मिले गौतम अदाणी, एनसीपी प्रमुख ने  हिंडनबर्ग विवाद पर किया था सपोर्ट - Gautam Adani meets NCP Chief Sharad  Pawar in Mumbai जो इस बात का प्रतीक है कि राहुल गांधी ने जिस मोदी पर प्रश्न उठाए वह मोदी पर दिल्ली विधानसभा में भी खुली चर्चा हुई.. यह भी एक अलग बात है कि इसके बाद अरविंद केजरीवाल का क्या होगा….? यह अभी भी प्रश्न के घेरे में है..? फिलहाल सीबीआई ने उन्हें भी बुलाया था.. वही शराब के नशे में.. आखिर कितनी नशाखोरी की गई थी, इसकी जांच के लिए.. फिलहाल शराब के नशे यानी आबकारी नीति फिल्म का हो सकता है यह ट्रेलर हो… ; फिल्म बाकी हो.. जिसे हम पूर्व सांसद अतीक की हत्या के लाइव टेलीकास्ट की तरह लाइव देख पाएंगे अथवा नहीं …?यह भविष्य के अंधेरे में छुपा हुआ है.. ?

क्योंकि रियल स्टोरी लाइव टेलीकास्ट होता है रोमांचक होता है.. उसे कम से कम गैंगस्टर और उसके भाई की हत्या या उसके परिवार को मिट्टी में मिलाने की हसरत की तरह एक से दो हफ्ता जीवित करके रखा जा सकता है… फिल्म की रोचकता खत्म होने लगती है.., फिर नई स्टोरी को करना पड़ता है. Jay Talking To Mausi - Amitabh Bachchan in Sholay (1975) - YouTubeअब शोले फिल्म की माने तो मौसी को समझाते हुए विजय याने अमिताभ बच्चन साफ कह दिया था कि अब “क्या कहें मौसी  लोग कमबख्त लोग हर बार तो जीत नहीं पाते” तो मौसी कहती है “..तो राम राम क्या वह जुआरी था…?, विजय कहता है .”..अरे नहीं मौसी मेरा दोस्त ऐसा नहीं था, और अपने दोस्त  धर्मेंद्र “वीरू” की शादी लगाने आया उसका दोस्त तमाम बुराइयों की लगातार, तारीफ करता रहा. विजय नई नई कहानियां सुनाने लगता है..

अब भारतीय लोकतंत्र में नागरिकों को नई कहानियां सुनने की आदत डाल लेनी चाहिए… क्योंकि समस्याएं जस की तस है इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट.. सबका साथ-सबका विकास की गति बहुत तेज है..तय  हुआ है की महान मन की बात को रिपीट किया जाएगा ,,दुबारा मेहनत नहीं किया जाएगा…बहुत बोलना पड़ता है….

कम से कम शहडोल में पर्यावरण और पारिस्थितिकी के साथ शहडोल नगर के पूरे तालाब और नदियां 12 दशक में लगभग लाइव टेलीकास्ट के जरिए हत्या कर दी जाएगी क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सपने प्रधानमंत्री आवास को इन्हीं तालाबों के अंदर बनाने की तेज रफ्तार चल पड़ी है सरकारी आंकड़े तो फिलहाल की यही चिल्ला रहे हैं….अनूपपुर जिले में यह सुखद खबर कि पानी खत्म हो गया है कलेक्टर अनूपपुर के द्वारा बोरिंग पर रोक लगा दी गई है, आ चुकी है..

किंतु सुखद खबर भी है कलेक्टर शहडोल ने 1768 ऐसे अवैध निर्माण कार्यों को पकड़ने का दावा किया है जो गैरकानूनी है…  और उससे ज्यादा सुखद संदेश यह भी है दोषी पटवारी, आर-आई के खिलाफ कार्रवाई होगी… यह एक अलग बात है शहडोल के मोहन राम मंदिर में गैंगस्टर द्वारा खड़ी कराई गई अवैध दीवाल और उसके संरक्षण में करीब 5 वर्ष पूर्व मर गए एक किराएदार की भूत द्वारा बनाए गए डबल स्टोरी मकान पर कोई कार्यवाही नहीं होती….? क्योंकि वह भारतीय जनता पार्टी की पवित्र विचारधारा के अनुरूप अवैध, किंतु पारदर्शी  प्रक्रिया का हिस्सा होता है… अब बिचारी मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय सिर्फ आदेश ही तो दे सकती है…? उनके आदेश की हत्या हर बार पिछले 10 वर्ष से लगातार किसी न किसी रूप में गैंगस्टर द्वारा किया जा रहा है. चुकी लोकतंत्र  में गठित भगवान राम के मंदिर की सुरक्षा के लिए स्वतंत्र कमेटी  परतंत्र व निरीह उसी प्रकार से दिखाई दे रही है जैसे कि अतीक अहमद की रस्सी में बांधे 17 पुलिस अफसर दिखाई दे रहे थे…. और तीन नए क्रांतिकारी गैंगस्टर सम्मान आकर मीडिया का नकाब पहनकर पूर्व सांसद की भी हत्या कर देते हैं… उसी तरह शहडोल के मोहन राम मंदिर के प्रकरण  उच्च न्यायालय  आदेश की हत्या की हत्या भी लाइव टेलीकास्ट के जरिए  कर रहा है.. हमें कोई शर्म नहीं है पूरी कायरता के साथ हम गौरव का अनुभव कर रहे हैं… यही नए भारत की सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का नायाब नमूना भी है…. ऐसे में राहुल गांधी से उसका मकान छिन जाए… पूर्व सांसद अतीक अहमद की रस्सी में बांध कर हत्या कर दी जाए अथवा मोहन राम मंदिर, मध्य प्रदेश के राम राज्य में लगातार लुटता रहे और गैंगस्टर सम्मानित होते रहे यही व्यवस्था है…. ऐसा मानकर चलना चाहिए….? किंतु यह सच नहीं है, अगर अधिकारियों का और जिम्मेदार लोगों का जमीर जिंदा हो गया तो….?

किंतु जमीर ही तो है.. कब लोकतंत्र से प्यार करने लगे…? कब नफरत…? और कब षड्यंत्र….? कहा नहीं जा सकता…? फिलहाल यही लोकतंत्र की लाइव-रियलिटी का प्रत्यक्षण किम् प्रमाणम है..


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