
संसार की सर्वश्रेष्ठ सभ्यता सनातन सभ्यता- कमिश्नर
शहडोल
25 अप्रैल 2023- शंकराचार्य जी के प्राकट्य दिवस पर संगोष्ठी को संबोधित करते हुए आदि शंकराचार्य पर अपनी खोजपूर्ण पुस्तक “विद्रोही सन्यासी” के लेखक और शहडोल के कमिश्नर राजीव शर्मा ने कहा
जो चुनौतियां तत्कालीन सामाजिक व्यवस्था में शंकर के पास थी वही चुनौतियां आज भी हमारे आसपास है. और इन चुनौतियों के बीच में अपनी बुद्धि और कौशल से आदि शंकराचार्य ने सबका दिल जीता. उन्होंने जिस ज्ञान का संदेश दिया उसमें सिर्फ जीतना सुनिश्चित होता था किसी की हार नहीं होती थी और इसलिए तत्कालीन समस्त भारतवर्ष में आदि शंकराचार्य स्वीकार्य हुए.
राजीव शर्मा ने कहा वर्तमान परिवेश में कोई हारना नहीं चाहता उन्होंने शंकराचार्य जी के स्थापित सिद्धांतों में सहज स्वीकार्यता और जीतने के कला को बड़े ही भावनात्मक तरीके से प्रतिपादित किया. राजीव शर्मा ने कहा आज जब इस बात के लिए विवाद होता है कि कौन सी सब्जी बनेगी, विवाह संबंध शादी का बिल भुगतान होने नहीं पाता है और विवाह बिखरने लगते हैं, तमाम प्रकार के विवाद घर-परिवार, पति-पत्नी, माता-पिता से लेकर पास-पड़ोसी और विवादों के मूल में खुद को समझने का ज्ञान नहीं है इसलिए विवाद होते हैं .आदि शंकराचार्य ने जीवन के एकात्म अद्वैतवाद का संदेश दिया, जहां हर व्यक्ति ईश्वर का अंश है जहां पर शिवांश होने का अनुभव होने पर कोई विवाद ही नहीं पैदा होता है. हर सामने वाली दिखने वाली वस्तु या व्यक्ति ईश्वर अंश है इसका अनुभव होने पर समस्त विवाद खत्म हो जाते हैं. उन्होंने एक दृष्टांत में अंग्रेज के एक साधु जो मौन व्रत किए रहता है उसके साथ व्यवहार का वर्णन किया कि किस प्रकार से साधु से पूछा, कि तुम कौन हो तुम और मौन व्रत में रहने वाला साधु कुछ बोल पाता इसके पहले उसकी हत्या कर दी जाती है. उन्होंने व्याख्या किया साधु ने क्या बोला होगा.. राजीव शर्मा के अनुसार साधु में कहां होगा अहम् ब्रह्मास्मि ..(मैं ब्रह्म हूं ..), तत् त्वम् असि or तत्त्वमसि (और तुम भी वही हो) उस भावना को समझने के पहले ही उसकी हत्या हो जाती है…
इतना महान उदार सनातन धर्म व्याख्या आदि शंकराचार्य जी ने अपने कम जीवन काल में, चाहे वह गंगा आरती हो या नर्मदा जी की वंदना हो, यमुना जी की भी संस्कृत रचनाएं आदि शंकराचार्य जी ने किया है. वर्तमान परिवेश में उनको समझने जानने की आवश्यकता है उन्होंने कहा आदि शंकराचार्य जी ने अपनी बंदना में स्पष्ट रूप से तत्कालीन नदियों की जैव विविधता, पर्यावरण, परिस्थितिकी का संपूर्ण चित्रण किया था और आज हम जब उसे देखना चाहते हैं तो पाते हैं कि हमने बहुत कुछ खो दिया है… उन्होंने नर्मदा जी में मगर या घड़ियाल के नहीं होने पर भी प्रश्न उठाया… जबकि शंकराचार्य जी की वंदना में इसका संपूर्ण समावेश है. इसी तरह उन्होंने कहा सुनिश्चित है सनातन धर्म में इतनी ताकत है संपूर्णता और उस एकाग्रताएकाग्रता के साथ अध्ययन हो तो वह सब कुछ समाधान और विश्व शांति संदेश देता है. आदि शंकराचार्य ने शिवोहम शिवोहम रचना का संदेश दिया है उसे मात्र कुछ दिन आत्मसात कर लिया जाए वर्तमान में तमाम प्रकार के नकारात्मक पूर्ण, अहंकार पूर्ण भावनाओं से बचा जा सकता है. जो वर्तमान की सबसे बड़ी आवश्यकता है. राजीव शर्मा के अनुसार इसमें कोई शक नहीं होना चाहिए, भारत का सनातन धर्म, विश्व का सर्वश्रेष्ठ धर्म है और वह भारत को विश्व गुरु बना सकता है, बनेगा उसे कोई नहीं रोक सकता…
कमिश्नर शहडोल संभाग राजीव शर्मा ने कहा है कि संसार की सर्वश्रेष्ठ सभ्यता सनातन सभ्यता है, हमारी सनानत सभ्यता के बाद दूसरी सभ्यताएं आई किन्तु जल्दी ही समाप्त हो गई। हमारी सनानत सभ्यता और हमारे संस्कार आज तक इसलिए जीवित है क्योकि इस सभ्यता में हमारे महात्माओं, ऋषि मुनियों की कोई संक्रीण दृष्टि नही थी। हमारी सभ्यता को गढ़ने वाले ऋषि मुनियों, तीर्थकंर, थें। जिन्होंने संक्रीणता से सोचा नही। भगवान आदि शंकराचार्य जिस संस्कृति के प्रवक्ता थे उसने हमारे डीएनए में ऐसे संस्कार दिये कि इस पृथ्वी पर कोई दूसरा है ही नही अद्वेत का अर्थ है दो नही एक है परमात्मा एक है। आचार्य आदि शंकर के जीवन दर्शन पर आयेाजित संगोष्ठी को सम्बोधित कर रहे थें। उन्होंने कहा कि आज अदालतों में आपसी लड़ाई, झगडो, विवादों के मुकादमें भाई-बहनो और परिजनों के बीच चल रहे है। आदि शंकर का अद्वेतवाद सभी को एकता के सूत्र में बाधता है। उन्होंने कहा कि भगवान आदि शंकर का अद्वेतवाद हमें आपस में प्रेम करना सिखाता है। अद्वेतवाद यह भी बताता है कि पृथ्वी के किसी भी जाति, सम्प्रदाय एवं धर्म में हम क्यों न पैदा हुए हो सम्पूर्ण सृष्टि में कुछ नही है जो कुछ है परमात्मा है। कमिष्नर ने कहा कि हम अपमान का उत्तर दुगने अपमान से देते है हम संस्कृति प्रलय में अपनी संस्कृति को भूल गये है हम सनातनी है जो हमेषा था और हमेषा रहेगा, हमारा धर्म मानव धर्म है। हमारा मानव धर्म प्राणी मात्र में भी ईश्वर के दर्शन कराता है।
संगोष्ठी को सम्बोधित करते हुए एडीजी डीसी सागर ने कहा कि मनुष्य को अपना लक्ष्य निर्धारित कर आगे बढना चाहिए। लक्ष्य को प्राप्त करने के लिये कडी मेहनत करना चाहिए। उन्होंने कहा कि लालच किसी भी चींज का हो सकता है,लालच को अपनी जींदगी से निकालकर फेकिये और अपने कार्य को पवित्रता के साथ पूरा कीजिए, इंसानियत का पाठ पढिए और जनमानस को इंसानियत का पाठ पढ़ाइए।
संगोष्ठी कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कलेक्टर श्रीमती वंदना वैद्य ने कहा कि आदि शंकर ने सनानत धर्म को पुनःस्थापित किया, वेदंत के प्रचार-प्रसार के लिये चारो दिशाओं में मठों की स्थापना की किन्तु उनके व्यक्तित्व उनके विचार का एक अन्य पहलू उसमें समाहित वैज्ञानिकता, सबलता, तथा उन्हें पुनः स्थापित करने की सोच को आज हमे जानने का अवसर प्राप्त हुआ है। उन्हेांने कहा कि उनकी रचनात्मक सोच, दूर दृश्यता इतनी प्राकट्य थी कि उसे सोच नही सकते। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद व आदि शंकराचार्य की समय एक समान रूप क्रियाशील दी, स्वामी जी ने जिसतर्क के सहारे अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त की। यदि हम वास्तव में जाने तो आदि शंकराचार्य की प्रस्तुत प्राकट्य का अनुशरण किया है।आज की संगोष्ठी का आयोजन जन अभियान परिषद शहडोल की जिला इकाई के द्वारा किया गया था|

