
शहडोल ईमानदारी और सादगी का अपना महत्व होता है, बेईमान और भ्रष्ट कितना भी शिखर पर क्यों ना हो उसकी तुलना तब होती है जब इमानदारी का कोई एक प्रतिफल प्रकट होता है। शहडोल में प्रिंटिंग प्रेस पर अपनी स्वावलंबन की जिंदगी शुरुआत करने वाले स्वर्गीय पंडित श्यामाकांत तिवारी बहुत पहले एक प्रेस में काम करते थे बाद में जरूरत के हिसाब से जोखिम उठाकर स्वयं का प्रिंटिंग प्रेस प्रारंभ किया । प्रोफेसर शिव कुमार दुबे से मिली जानकारी के अनुसारप्रेस कॉलोनी में रहने वाले तिवारी परिवार की नातिन साक्षी मिश्रा जो इन दिनों अनूपपुर में रहती हैं अपने माता-पिता के शैक्षणिक परिवेश में उन्होंने विकास की एक लक्ष्य को पार किया है। और ईमानदारी और मेहनत की संस्कार की पृष्ठभूमि से निकलकर उन्होंने यूपीएससी पर 299 रैंक पर परीक्षा पास की है। अनूपपुर जिले वाले जो कभी शहडोल का हिस्सा था यूपीएससी परीक्षा के परिणाम में अनूपपुर की साक्षी मिश्रा ने 299 रैंक प्राप्त की है। इस सफलता के श्रेय वह अपनी मां को देती हैं। अनूपपुर स्थित केंद्रीय विद्यालय में पदस्थ प्राचार्य प्रीति मिश्रा ने बताया कि नौकरी में रहने के कारण साक्षी की प्रारंभिक शिक्षा अलग-अलग स्थापनों पर हुई हैं। 12वीं की पढ़ाई शहडोल से की और फाइनल करने उन्हें दिल्ली जाना पड़ा। पहले ही बार में यूपीएससी की परीक्षा में 299 रैंक हासिल की।
आज जब साक्षी के बारे में यह जानकारी आई कि वह तिवारी जी की नातिन हैं तो उनकी तमाम इमानदारी जीवन के प्रति निष्ठा नैतिकता और उनकी मेहनत जो साइकिल पर सवार होकर इस बुलंदी तक पहुंची निश्चित रूप से यह उन्हें गौरवपूर्ण श्रद्धांजलि देने का मेरे लिए बड़ा अवसर है । हर व्यक्ति अपना भाग्य और अपना कर्म स्वयं लेकर आता है। बावजूद किस व्यक्ति का पृष्ठभूमि और संस्कार उसे किस लक्ष्य तक पहुंचाता है यह साक्षी मिश्रा के यूपीएससी की सफलता में हम ब्राह्मण समाज के लिए ही नहीं बल्कि संपूर्ण शहडोल क्षेत्र के लिए यह गौरव की बात है। साक्षी को और उनके माता-पिता को और विशेषकर ननिहाल पक्ष को बहुत बधाई।

