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इन दिनों भाजपा से भगवान लगता है बहुत नाराज चल रहे.., इसीलिए भाग्यवान नरेंद्र मोदी जी के साथ कहीं बजरंगबली तो कहीं इंद्र भगवान धोखा देते नजर दिख रहे हैं… शहडोल के लालपुर हवाई अड्डे में कहते हैं करोड़ों रुपए की लागत से इलेक्शन प्रोपेगेंडा इवेंट खड़ा किया गया जिससे कथित तौर पर शिवराज जी ने 1 तारीख तक के लिए खड़े रहने का आदेश कर दिया। क्योंकि इंद्र ने नरेंद्र मोदी जी के 27 तारीख के कार्यक्रम पर पानी गिराने की धमकी दे दी थी । हालांकि शहडोल में पानी उस स्तर पर नहीं गिरा जिसका प्रभाव पड़ता… बहरहाल अब कार्यक्रम की तारीख की पेशी 1 तारीख तक कथित तौर पर बढ़ा दी गई है. यानी तब तक शादी का मंडप लालपुर में लगा रहेगा, अगर मंडप वाले वास्तव में व्यापारी हैं तो उन्हें कंप्रोमाइज करना पड़ेगा अपने पुराने ग्राहक के साथ. अगर व्यापारी कॉर्पोरेट पॉलिटिकल इंडस्ट्रीज के बिजनेस पार्टनर नहीं है तो उन्हें उसी प्रकार से शिवराज हठ में रोना पड़ेगा…..; जिस प्रकार से चुप चुप के 2006 में बनी प्रियदर्शन द्वारा निर्देशित हिन्दी भाषा की हास्य-नाट्य फिल्म में नायिका की शादी होने तक मंडप को नायिका के भाई ने लगाए रखने का आदेश किया था की शादी तो इसी मंडप में होगी…
बहरहाल शहडोल के भाग्यशाली बैगा जनजाति को अपने भगवान के लिए 1 तारीख तक और इंतजार करना पड़ेगा ताकी वह स्वयं पधार कर उनकी कुटिया का उतार कर सकें उनके यहां रोटी भात में शामिल हो सके क्योंकि जाति के हित में समर्पित मोदी सरकार का संदेश हिंसा ग्रस्त मणिपुर के विभिन्न जनजाति समाज को हिलसा रास्ता छोड़ने और राष्ट्रभक्ति के रास्ते में लौटने का इससे अच्छा संदेश नहीं आगे जा सकता है कि हमारे प्रधानमंत्री उनके साथ उनके परिवार की तरह ही रहते हैं और उनके हित में लगातार सोचते रहते हैं. दो धारी रास्ता अवश्य निकलता है एक तो चुनाव प्रदेश वाले मध्यप्रदेश में जनजाति समाज के नए भगवान का अवतार की घोषणा भी हो सकती है की दयालु-कृपालु उनके घर स्वयं आधुनिक सुदामा की कुटिया उद्धार करने आए हैं.. दूसरा मणिपुर को हिंसा मुक्त करने का भी रास्ता खुल जाता है अगर वे हिंसा के साए मुक्त होगा राष्ट्रवाद को समर्पित हो जाते हैं. मणिपुर के हिंसा के विशेषज्ञ रिपोर्टर तो वहां पर नशीले कारोबार के माफिया राज को हिंसा का कारण बताते हैं शहडोल में भी बिना हिंसा के अहिंसक-हिंसा का माफिया राज सफलता के साथ चलता रहता है. इसका भी इलाज 27 तारीख को हो सकता था किंतु भगवान शायद जनजाति समाज से थोड़ा नाराजगी रहते हैं इसलिए जनजाति समाज के नए भगवान का अवतार होने से रोक दिया। पॉलिटिकल कॉर्पोरेट इंडस्ट्री को कुछ नया दिखाना चाहिए . शहडोल का दुर्भाग्य है कि यहां की जनता इस मनोरंजन को देखने में चूक गई अब नई तारीख 1 तारीख को इस बिग इवेंट को देखने का अवसर मिल सकता है अगर वर्षा के भगवान इंद्र को सेट कर लिया जाए तो शायद सब कुछ संभव है .देखना होगा 1 तारीख को वर्षा बीतने के बाद किन-किन चीजों की बरसात आदिवासी विशेष क्षेत्र के जनजाति समाज के ऊपर बरसात होने वाली है अन्यथा “का वर्षा जब कृषि सुखाने…?”के हालात पैदा हो जाएंगे 1 दिन का ही इवेंट शहडोल की माफिया गिरी को युक्त अथवा मुक्त कर सकता था. कम से कम 1 दिन तो उत्कृष्ट मनोरंजन का जरिया बन सकता था. आगामी 1 तारीख को इस बिग इवेंट फिर से एक अवसर के रूप में आप आमंत्रित स्वाभाविक रूप से, अगर आपदा वर्षा की नहीं आई तो अन्यथा आपदा में ही अवसर निकालने के रास्ते ढूंढने पड़ेंगे…?

