
नई दिल्लीPIB
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता दिवस के अवसर पर नई दिल्ली के प्रगति मैदान में 17वीं भारतीय सहकारी कांग्रेस को संबोधित किया। 17वीं भारतीय सहकारी कांग्रेस का मुख्य विषय ‘अमृत काल: जीवंत भारत के लिए सहयोग के माध्यम से समृद्धि’ है। श्री मोदी ने सहकारी विपणन, सहकारी विस्तार और सलाहकार सेवा पोर्टल के लिए ई-कॉमर्स वेबसाइट के ई-पोर्टल लॉन्च किए।
उपस्थित जनसमुदाय को संबोधित करते हुए, प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर सभी को बधाई दी और कहा कि देश ‘विकसित और आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य की दिशा में अग्रसर है। उन्होंने इन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए ‘सबका प्रयास’ की आवश्यकता को दोहराया, जहां सहयोग की भावना सभी के प्रयास का संदेशवाहक बनती है। प्रधानमंत्री ने भारत को दुनिया का अग्रणी दूध उत्पादक देश बनाने में डेयरी सहकारी समिति के योगदान और भारत को दुनिया के शीर्ष चीनी उत्पादक देशों में से एक प्रमुख देश बनाने में सहकारी समितियों की भूमिका का उल्लेख किया। उन्होंने रेखांकित किया कि देश के कई हिस्सों में सहकारी समितियां छोटे किसानों के लिए एक बड़ी समर्थन प्रणाली बन गई हैं। प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि डेयरी क्षेत्र में महिलाओं का योगदान लगभग 60 प्रतिशत है। इसलिए सरकार ने विकसित भारत के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए सहकारी क्षेत्र को सुदृढ़ बनाने का फैसला किया। इसलिए पहली बार एक अलग मंत्रालय का गठन किया गया था और सहकारी समितियों के लिए बजट का आवंटन किया गया। इसके परिणामस्वरूप सहकारी समितियों को कॉर्पोरेट क्षेत्र की ही भांति एक मंच पर प्रस्तुत किया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने सहकारी समितियों को सुदृढ़ करने के उपायों की भी जानकारी दी और कर की दरों में कमी का उल्लेख किया। उन्होंने सहकारी बैंकों को मजबूत करने के उपायों के बारे में भी जानकारी दी और इनकी नई शाखाएं खोलने और आपके घरों तक सहकारी बैंकिंग सेवाओं (डोरस्टेप बैंकिंग) को पहुंचाने का उदाहरण दिया।
इस आयोजन से बड़ी संख्या में जुड़े किसानों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले 9 वर्षों में किसानों के कल्याण के लिए किए गए उपायों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि अतीत में किसान बिचौलियों के चुंगल में फंसे थे, अब करोड़ों किसानों को सीधे उनके खातों में किसान सम्मान निधि मिल रही है। पिछले 4 वर्षों में पारदर्शी माध्यम से इस योजना के तहत 2.5 लाख करोड़ रुपये हस्तांतरित किए गए हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 से पहले के 5 वर्षों के कुल कृषि बजट पर विचार करें तो यह राशि 90 हजार करोड़ रुपये से कम थी। इसकी तुलना में 2.5 लाख करोड़ रुपये एक बड़ी राशि है। इसका अर्थ है कि उन पांच वर्षों के कुल कृषि बजट का तीन गुना से अधिक सिर्फ एक योजना पर खर्च किया गया था।
प्रधानमंत्री ने यह सुनिश्चित करने के तरीकों के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी कि किसानों पर उर्वरकों की बढ़ती वैश्विक कीमतों का बोझ न पड़े। उन्होंने कहा कि “आज एक किसान यूरिया की एक बोरी के लिए लगभग 270 रुपये का भुगतान करता है, जबकि बांग्लादेश में इसी बैग की कीमत 720 रुपये, पाकिस्तान में 800 रुपये, चीन में 2100 रुपये और अमेरिका में 3000 रुपये है।” उन्होंने कहा कि यह प्रमाणित करता है कि किसानों के लिए यह सुविधा गारंटी किस प्रकार प्रदान की गई है और किसानों का जीवन बदलने के लिए बड़े प्रयासों की आवश्यकता है। प्रधानमंत्री ने बताया कि पिछले 9 वर्षों में सिर्फ उर्वरक सब्सिडी पर 10 लाख करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए हैं।

