
शहडोल।
मोहन राम मंदिर शहडोल का मंदिर निर्माण कार्य काल के दौर से स्थापित वर्षों पुराना पीपल का पेड़ जहां शहडोल की कई पीढ़ियों ने अपने पितरों को श्राद्ध दिया और अपने धार्मिक अनुष्ठान करके मोक्ष का रास्ता देखने का प्रयास करते हैं वह पेड़ अब शहरवासियों से अलविदा हो चुका है। सिर्फ सूखी लकड़ियां, ईश्वर की कृपा से यहकिसी मौत का कारण नहीं बना.. ।बहराल इस पीपल के पेड़ से जब हम कभी निकलते थे तो हमें भूत के होने का डर था, क्यों कि मृतकों की कई मृत आत्माओं के घट यहां पर शांति का आश्रय पाते थे ।अब पेड़ नहीं रह गया है स्वाभाविक है भूत प्रेत के लिए कोई जगह नहीं रह गई, फिर भी मंदिर में कई ऐसे निर्माण कार्य हो रहे हैं जो सरकारी रिकार्डों में अज्ञात व्यक्ति या अदृश्य व्यक्ति जिसे हम भूत कहते हैं, वह करा रहा है; ऐसा माना जाना चाहिए ।
कोरोना कार्यकाल के दौरान तत्कालीन कलेक्टर सत्येंद्र सिंह
के संज्ञान में यह जानकारी लाई गई थी की मंदिर के बाजार मार्ग की तरफ पूर्व रथ भवन के पास कोई अज्ञात व्यक्ति मंदिर परिसर के मकान को तोड़कर अवैध निर्माण करा रहा है नायब तहसीलदार श्री शर्मा वहां पर आए उन्होंने पाया कि जहां कभी स्वर्गीय कुंजीलाल दुबे जो मंदिर के किराएदार थे जिनका निधन 4 साल पहले हो चुका है उस मकान को तोड़कर कोई डबल स्टोरी मकान बना रहा है मंदिर परिसर में गैरकानूनी तरीके से कब्जा कर के सामने रहने वाले पूर्व ट्रस्टी जो स्वयं को स्वामी जी गद्दी पुरानी लंका चित्रकूट का पावर ऑफ अटॉर्नी बताता है ,लव कुश पांडे से उन्होंने पूछताछ की उसने कहा, पता नहीं रात रात कैसे बन रहा है …? निश्चित तौर परइस चमत्कार पर नायब तहसीलदार चकित रहें होंगे।
कुछ समय फिर बीता अचानक मंदिर परिसर के सामने खाली पड़ी जमीन पर पिलर डालकर के दीवाल बनने लगे तो हमारी भी जिज्ञासा हुई इस दीवाल की आखिर क्या जरूरत है..?
और कौन बना रहा है..? वर्तमान में मंदिर प्रबंधन के जिम्मेदार मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के निर्देश में गठित स्वतंत्र समिति से हमने जानकारी चाहिए क्या उन्होंने दीवाल बनाने का कोई निर्णय लिया है और उसका बजट क्या है..? स्वतंत्र समिति ने स्पष्ट किया कि उनके द्वारा किसी भी प्रकार का कोई दीवाल निर्माण करने का कोई निर्णय नहीं लिया गया है।
तो हमें लगा जो भूत कुंजीलाल के मकान को बना रहा था शायद वही भूत पंडित पुजारियों के कहने पर इस दीवाल को बनाने लगा है। अभी तक हमें जवाब नहीं मिला इसलिए हम मानते हैं कि इसे भूत ही बना रहा है। क्योंकि काम तो हो ही रहा है चाहे मृतक कुंजीलाल के मकान को डबल स्टोरी बना दिया गया हो या फिर मंदिर की परिसर में लाखों रुपए चंदा एकत्रित करके दीवाल बना दी गई । अब यह अलग बात है की भूतों के आड़ में पंडित पुजारियों ने करोड़ों रुपए का चंदा एकत्रित किया।
खबर तो यह भी है कि अब दीवार को कई भूत मिलकर के अतिक्रमणकारियों की कथित सीमा नाला के पास एक और दीवाल भूतों ने बनाने का निर्णय लिया है ताकि अतिक्रमणकारियों को सुलभता प्राप्त हो जाए जो भूतों से सहमत हो यानी मंदिर परिसर में जो भूत रहते हैं वे बहुत चंदा एकत्रित करते हैं और दीवार बनाते हैं मकान बनाते हैं और मंदिर प्रबंधन को इस बात का पता ही नहीं लगता ..?
ऐसे में जबकि इसी मंदिर परिसर में भगवान भोलेनाथ जो भूतों के नाथ हैं
उनका मंदिर का छत गिरने के कगार पर आ गया सरकारी जानकारी में इस बरसात में उसे गिर जाना चाहिए, इसके लिए जब तहसीलदार से बातचीत की गई तो उन्होंने कहा की दीवार के मामले में हम जांच कर आएंगे लेकिन यह तय है कि शिव मंदिर के छत को बरसात के पहले बना दिया जाएगा ।
क्योंकि स्वतंत्र कमेटी के पास इतना पैसा है कि वह छत की दीवार बना सकें और यदि आवश्यकता पड़ेगी तो जनसहयोग से भी भूतों के नाथ भगवान भोलेनाथ के मंदिर को सुरक्षित रखा जाएगा।
बरसात भी आ गई…, शहडोल में तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी सिर्फ इसीलिए 4 दिन बाद आए क्योंकि बरसात बहुत तेजी से आने वाली थी। जब मुख्यमंत्री और सरकारी रिकार्ड चिल्ला रहे थे की बरसात बहुत तेजी से आने वाली है तब भी इस शिव मंदिर के छत को सुरक्षित करने की सोच आखिर क्यों नहीं बन पाई..?
क्या संबंधित मंदिर प्रशासन पूरा काम भूतों के हवाले छोड़ रखा है कि जब मृतक कुंजीलाल का डबल स्टोरी भूत बना सकते हैं जब खाली मंदिर परिसर में भूतों ने दीवार बना दिया तो फिर वह भूतों के नाथ भगवान भोलेनाथ का याने भूतों के अपने आश्रय दाता भगवान शिव का मंदिर छत क्यों नहीं बनाएंगे..?
यह आस्था को मोहन राम मंदिर ट्रस्ट में पिछले 12 वर्षों से चली आ रही है। इसीलिए जो कथित तौर पर स्वामी जी गद्दी पुरानी लंका चित्रकूट के नाम पर स्वयं को पावर ऑफ अटॉर्नी घोषित करके लव कुश पांडे भ्रामक तरीके से कभी मंदिर की स्वतंत्र कमेटी को अयोग्य साबित करते हैं और स्वयं काम करने लगते हैं तो कभी स्वतंत्र कमेटी को चुनौती भी देते हैं एक निरर्थक कमेटी है जो गैर जिम्मेदार है। और आश्चर्य तो यह है की अनुविभागीय अधिकारी सोहागपुर इसे स्वीकार भी करते हैं। और उसकी उपस्थिति को उसी तरह स्वीकार करते हैं जैसे कि हिंदूराष्ट्र की नए सृजनहार धीरेंद्र शास्त्री बागेश्वर सरकार हनुमान जी के सहारे भूतों को नियंत्रित करके लोकहित में तमाम कार्यों का संपादन कर रहे हैं।
तो अब वह दिन दूर नहीं कि जब शहडोल के मोहन राम मंदिर में भूतों का एक बड़ा सम्मेलन होगा जो पीपल में रहते थे पीपल के सूख जाने के कारण अब जगह-जगह रहेंगे और भूतों के कृपा से तमाम मनुष्य अपनी बेनामी संपत्तियों को जैसा कि बताया जाता है की चित्रकूट के पास रहने वाले गरीब ब्राह्मण लवकुश पांडे जैसे लोगों ने अब शहडोल व सतना कई स्थलों पर भारी नामी व बेनामी प्रॉपर्टी संग्रहित कर रहे हैं क्योंकि भलाई भूतों के भगवान भोलेनाथ का मंदिर व धर्मशाला इस बरसात में ढह जाए लेकिन तमाम भूत इन सबके लिए धन संग्रह का काम करते हैं। जैसे कि शहडोल की आराजी खसरा नंबर 138 हिस्ट्री डिसमिल जमीन में जो मोहन राम मंदिर ट्रस्ट की प्रॉपर्टी थी
उसे किसी राम जानकी धार्मिक संस्था के नाम पर कब्जा कर लिया गया है जबकि तहसीलदार ने उक्त निर्माण जब कब्जा किया जा रहा था तब स्थगन आदेश स्वतंत्र कमेटी के आवेदन पर दिया था जिसे अपने भूतों के सहारे और उनकी ताकत से लव कुश ने अनदेखा कर मोहन राममंदिर ट्रस्ट पूरी बिल्डिंग पर गैरकानूनी और उसे लाखों रुपए किराया देकर बारात घर के रूप में उपयोग कर रहा है जैसे कि मोहन राम मंदिर परिसर को अपनी दूध डेयरी के लिए इस्तेमाल कर रहा है..? बहरहाल।
कभी मृत किरायेदारों की बिल्डिंग बनाकर तभी मोहन राम मंदिर ट्रस्ट की प्रॉपर्टी पर कब्जा करके तो कभी खाली परिसर में दीवार बनाकर और अब जैसा की योजना है अतिक्रमणकारियों की कथित सीमा पर लंबी चौड़ी दीवार बनाने का प्लान भूतों ने किया है अब यह अलग बात है कि मोहनराम पांडे के वंशजों के अधीन मंदिर निर्माण किसी से संचालित भगवान भोलेनाथ का शिव मंदिर और पूरी धर्मशाला या पूरा तालाब परिसर नष्ट भ्रष्ट क्यों ना हो जाए तो क्या धीरेंद्र शास्त्री की तरह शहडोल में भी मोहन राम मंदिर के भूतों को किसी ने अपने अधीन कर रखा है जो जब चाहता है वह वहां निर्माण करा देता है हम यह बात इसलिए कह रहे हैं क्योंकि पिछले 12 वर्षों से शहडोल प्रशासन इस मंदिर ट्रस्ट प्रबंधन पर पर इन भूतों डर के कारण की ही वजह से अभी तक उच्च न्यायालय के निर्देश पर गठित स्वतंत्र कमेटी के सदस्यों को संपूर्ण प्रभाव नहीं दिला पाई है..? आखिर कोई ना कोई अज्ञात ताकत तो काम कर ही रही है। जबकि इस कमेटी में पूर्व भारतीय जनता पार्टी जिला अध्यक्षों स्वर्गीय डॉ राजेंद्र श्रीवास्तव और स्वर्गीय मार्तंड त्रिपाठी “चुन्ना भैया” जैसे सदस्य भी स्वतंत्र कमेटी के सदस्य रहे… स्वाभाविक है जहां भूतों का डेरा हो वहां पर आदमी की क्या हैसियत रह जाती है.…? ऐसे में मंदिर ट्रस्ट का क्या होगा जब भगवान भोलेनाथ का शिव मंदिर का छत और पूरी धर्मशाला धराशाई हो जाएगी या फिर यह भूतों के द्वारा योजनाबद्ध तरीके से संपादित हो रहा है ताकि मोहनराम पांडे के वंशजों के द्वारा संरक्षित इस मंदिर को संभालने वाले और देखने वाले पंडित पुजारी भी वहां से अलविदा हो जाए ताकि “राम की चिड़िया, राम का खेत; चुग ले चिड़िया, भर भर पेट…” के अंदाज में पूरी भूतों की जमात मंदिर ट्रस्ट को अपना घोषित कर सके।
जैसे इस बार के जगन्नाथ यात्रा में अजीबोगरीब चेहरे जगन्नाथ रथ यात्रा पर पूरी तरह से कब्जा कर रखे थे जबकि इस कार्यक्रम को मंदिर के बाजार के संभ्रांत लोग इस संचालित करती थी। इस बार उन्होंने आखिर क्यों दूरियां बनाएं रखी..? यह बड़ा प्रश्न है ।और अभी तक इसका हिसाब भी स्वतंत्र कमेटी ने सार्वजनिक नहीं किया है भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा ने किस प्रकार से अपनी यात्रा कार्यक्रम को संपादित किया …? जो वर्षों से होता चला आ रहा था। तो क्या भूतों के भय से शहडोल के निवासियों ने मंदिर से किनारा कर लिया है..?
लेकिन डरने की बात नहीं जब भूतों का डेरा पीपल के पेड़ से पीपल को सुखा दिया है तो भूत भी बहुत जल्दी मंदिर से भाग जाएंगे जब जिला प्रशासन या उच्च न्यायालय भूतों को भगाने की जिम्मेदारी गंभीरता से उठाएगा तब तक तो भूतों का उपद्रव जारी ही रहेगा ऐसा मानकर चलना चाहिए..आखिर धर्म का नशा बड़ा विचित्र होता है वह अगर आसाराम और राम रहीम को करोड़ों की भीड़ और आस्था का हीरो बनाता है क्योंकि यह लोग राजनीति के संरक्षण में अपराधों को अंजाम देते थे यह अलग बात है की उनकी जगह जेल में होती है…इसके लिए आसाराम व राम रहीम जैसे लोग तैयार भी रहते हैं तो “जब जागे, तभी सवेरा…” ऐसा मानकर चलना चाहिए, गुरु पूर्णिमा का चांद निश्चित ही नया सवेरा लाएगा… गुरु पूर्णिमा की बहुत-बहुत शुभकामनाएं……





