
नई दिल्ली– लोकसभा।मणिपुर पर अविश्वास प्रस्ताव पर लोकसभा में करीब 1 घंटे से ज्यादा समय बीतने के बाद “मणिपुर-मणिपुर… “के विपक्ष के नारों के बीच भी प्रधानमंत्री मणिपुर पर चर्चा नहीं कर रहे थे तब विपक्ष ने लोकसभा से वाकआउट कर लोकसभा से सदन से बाहर चले गए।
तब प्रधानमंत्री मोदी उनके वाक-आउट होने के तत्काल बाद हताश और निराश होकर मणिपुर मुद्दे पर अपनी बात रखना चालू की। मणिपुर हिंसा में संवेदना और न्याय की घोषणा के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि किस तरह 1966,1962 और डॉक्टर राम मनोहर लोहिया के नार्थ ईस्ट की उपेक्षा पर कहे हुए का उल्लेख किया तथा कहा,
कि मोदी मंत्रिमंडल के सदस्य करीब 400 बार और खुद नरेंद्र मोदी 50 बार मणिपुर होकर आए हैं, इसलिए वहां का दुख दर्द जानते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस राजनीति कर रही है इसके पूर्व करीब 2 घंटा अपने लंबे चौड़े वक्तव्य में उन्होंने कांग्रेस और विपक्ष पर तंज भी कसे तथा लोकसभा की सदन के अंदर 2028 में विपक्ष को अविश्वास प्रस्ताव लाने का निमंत्रण भी दिया और विकास की गारंटी का एक प्रकार का चुनावी वादा भी किया । नरेंद्र मोदी ने कहा कि गृहमंत्री ने विस्तार से मणिपुर की स्थिति बता दी है।
इंफाल, 10 अगस्त (भाषा) हिंसा प्रभावित मणिपुर के 40 विधायकों ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर कहा है कि राज्य में शांति और सुरक्षा का माहौल बनाने के लिए सेना को हटाया जाना जरूरी है।.विधायकों में से अधिकतर विधायक मेइती समुदाय से हैं। उन्होंने कुकी उग्रवादी समूहों के साथ किए गए ‘अभियान निलंबन’ (एसओओ) समझौते को वापस लेने, राज्य में राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) को लागू करने और स्वायत्त जिला परिषदों (एडीसी) को मजबूत बनाए जाने की भी मांग की।.


