
भोपाल : शुक्रवार, अगस्त 11, 2023
प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना के क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश देश में सबसे आगे है। योजना में ऐसे 1074 गाँवों को शामिल किया गया है जिनमें अनुसूचित जाति की जनसंख्या 50 प्रतिशत या उससे ज्यादा है। केन्द्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने हर गाँव के लिए 20 लाख रूपये का आवंटन उपलब्ध कराया है। इन 1074 ग्रामों में विकास के लिए रूपये 210 करोड़ 90 लाख केन्द्र सरकार से मिले है। इस राशि के साथ कन्वर्जेन्स कर 4500 विकास कार्य पूरे कर लिए गये हैं तथा 3000 कार्य चल रहे हैं।
परंतु आदिवासी क्षेत्र शहडोल के कुल कितने आदर्श गांव की क्या स्थिति है इस पर कोई बात नहीं कहीं गई है ईस तरह जिला बार किस तरह की स्थिति है इस पर प्रकाश नहीं डाला गया है
प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना का उद्देश्य अनुसूचित जाति बहुल गाँवों में समग्र रूप से विकास सुनिश्चित करना है। इन गाँवों के लिए सामाजिक सुरक्षा, पोषण, सड़कें, आवास, विद्युत प्रदाय, स्वच्छता, ईंधन की उपलब्धता, कृषि, वित्तीय समावेश, डिजिटल सुविधा, जीवन-यापन और कौशल विकास से संबंधित करीब 50 ऐसे निगरानी योग्य संकेतक तैयार किए गए हैं जिनके आधार पर गाँव के विकास की समीक्षा की जा रही है।केन्द्र सरकार की सभी संबंधित योजनाओं और राज्य सरकार की योजनाओं को मिलाकर गाँव विकास रोडमैप तैयार किया गया है। यह योजना वर्ष 2014-15 से प्रारंभ की गई है। शुरूआत में इसमें प्रदेश के 327 गाँवों को शामिल किया गया था। वर्ष 2022 से योजना मापदण्ड में बदलाव कर न्यूनतम 500 जनसंख्या वाले गाँवों में अनुसूचित जाति समुदाय की कम से कम 40 प्रतिशत संख्या का मापदण्ड रखा गया है। इस आधार पर प्रदेश के 619 गाँवों को शामिल करने की कार्रवाई चल रही है।
समन्वय समितियों का गठन
जिला स्तर पर कलेक्टर की अध्यक्षता में प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना कन्वर्जेन्स समिति और गाँवों में सरपंच की अध्यक्षता में कन्वर्जेन्स समितियाँ गठित की गई हैं। इन समितियों द्वारा सभी संबंधितों से योजना, उसके उदेश्य, क्रियान्वयन, फंड की व्यवस्था विभिन्न विभागों को उनकी नियमित योजना और प्राप्त होने वाले बजट के कन्वर्जेन्स आदि विषयों पर चर्चा कर गाँव विकास योजना तैयार कर विकास की गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। जिला स्तर पर जिला कलेक्टर योजना के प्रभारी एवं ग्राम पंचायत स्तर पर ग्राम सभा को योजना को जिम्मेदारी दी गई है इस योजना में मुख्य रूप से दो प्रकार के कार्य किये जाते हैं। पहला ग्राम की विकास योजना तैयार कर ग्राम के समुचित अधोसंरचनात्मक विकास के लिए विभिन्न विकास विभागों की योजनाओं का कियान्वयन कराना। ऐसे कार्यों के लिए जिनमें विकास कार्यों के लिए धनराशि उपलब्ध होने में दिक्कत हो, वहाँ गैप-फिलिंग निधि से कार्य कराना।
इस योजना में गाँवों के लोगों को विभिन्न विकास विभागों की योजनाओं का लाभ दिलाना। जैसे स्कूल जाने योग्य बच्चों का प्रवेश शालाओं में कराना। सभी बच्चों का टीकाकरण कराना। वृद्धावस्था एवं दिव्यांग जन पेंशन के लिए सभी पात्रों के बैंक खाते खुलवाना, आधार कार्ड बनवाना आदि। इसके अलावा पेयजल एवं सफाई व्यवस्था, ठोस एवं तरल कचरे के निराकरण, आँगनवाड़ियों में शौचालयों का निर्माण, आँगनवाड़ी भवनों का निर्माण, बारहमासी सड़कों का निर्माण, सोलर लाईट एवं स्ट्रीट लाईट की व्यवस्था करने जैसे कार्य किये जा रहे हैं।
रीवा राज्य शासन द्वारा मध्यप्रदेश नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम 1973 के तहत लोकहित में रीवा नगर सुधार न्यास की बस स्टेण्ड,
व्यवसायी एवं आवासीय योजना क्रमांक 6 कुल रकबा 91.375 एकड़ की सीमा, अर्जित भूमि 59.035 एकड़ तक सीमित रखते हुए शेष अप्राप्त भूमि 32.34 एकड़ को स्कीम क्रियान्वयन के दौरान उपांतरित कर मुक्त करने के निर्देश दिये गये हैं। आयुक्त नगर पालिक निगम रीवा द्वारा भूमि का भौतिक आधिपत्य भूमि के मालिक के पास होने और उस पर घर बने होने तथा मुआवजा भुगतान न करने की स्थिति में 32.34 एकड़ भूमि डिनोटिफाईड करने का प्रस्ताव दिया गया था।
अप्राप्त 32.34 एकड़ भूमि, जो कि निजी भूमि है के अधिकतम भाग पर निजी व्यक्तियों द्वारा घर बना लिये गये हैं। यह भूमि नगर पालिक निगम रीवा के आधिपत्य में प्राप्त नहीं हुई है।

