
करीब दो दशक यानी 20 साल भारतीय जनता पार्टी के जमीनी आदमी शिवराज सिंह को मुख्यमंत्री बने हुए,
उनके साथी कहते हैं जब वह शहडोल पहली बार आए थे तो पजामा कुर्ता में घूमा करते थे। उनसे शहडोल की हकीकत छुपी हुई नहीं है यह इस बात को तस्दीक करती है। और चूकिं वे इसी प्रकार से अपने संघ के निर्देश पर घुमक्कड़ रहे।तो हम उदाहरण शहडोल का लें, क्योंकि शहडोल प्राकृतिक संसाधनों पर टॉप 10 या टॉप 5 जिला होगा…;( जैसे विश्व के तीन बड़े आदमियों में पहुंचने के लिए उद्योगपति अदानी को पूरे भारत की संसाधन पर कब्जा करना जरूरी था) ऐसे शहडोल को कुछ कब्जा करने की जरूरत नहीं था। वह विरासत का धनाढ्य जिला रहा… उसे सिर्फ लूट-खसोट करके और डाका डाल करके लूटा जा सकता था तो भी उसका धन खत्म नहीं होने वाला था… किंतु देश और देश की राजनीति ने जो राजनेता पैदा किया उसे उन्होंने जो नीतियां बनाई वह सिर्फ लूटने की राजनीति ही रही।, आम आदमी को इससे कोई फायदा नहीं हुआ हां, कुछ टुकड़े यानी जूठन भिखारी की तरह उन्हें फेंका जाता रहा। जो भिखारी होशियार होता था वह ज्यादा जूठन इकट्ठा करके खुश हो जाता था ।
शहडोल के नागरिक और यहां की राजनीति से पैदा हुए नेता इन भिखारी से ज्यादा कोई औकात आज भी नहीं रखते और यही कारण है कि वह बाहरी आतताइयों के लूट-खसोट की संस्कृति के मात्र चौकीदार रहे… जैसे अंग्रेजो के लिए कुछ सिपाही भारतीय पैदा हो जाते थे और उनके लिए काम करते थे शहडोल का विकास क्रम इसी परंपरा का हिस्सा आज भी है। हां, भाषा जरूर बदल गई है। उन्हें, उन्होंने जनसेवक ,चौकीदार ,जनता जनार्दन का पुजारी. ।।। आदि-आदि तमाम भ्रामक शब्दों से सजा दिया है, अन्यथा कोई कारण नहीं है की वैभवशाली प्राकृतिक संसाधन के प्रक्षेत्र में आम नागरिक स्वाभिमान पूर्ण रोजगार के लिए आज भी तरस रहा है कि उसका पेट भर जाएसरकार ने भी भीख बांटने की नीतियां 5 किलो राशन और अन्य प्रकार से भीख देने के लिए पूरे ब्यूरोक्रेट्स को मानसिक रूप से गुलाम बना रखा है और यह भाजपा की 20 साल की सरकार में जमकर फला फूला है । यही निष्कर्ष है।
यह बात हम यूं ही नहीं कह रहे हैं बल्कि अनुभव बताता है की 20 साल पहले 110 करोड रुपए की लागत में उसमें करीब आधी रकम नगद सरकार ने ठेकेदार को काम शुरू करने के पहले की थी , ताकि बंटवारा ,घूस का ईमानदारी से हो सके। उस वक्त चुनाव होने थे। 25 वर्ष के लिए रीवा-अमरकंटक सड़क मार्ग की लंबाई करीब ढाई 270किलोमीटर की रही होगी यानी एक करोड रुपए से भी कम और सड़क 15 साल स्वयं बना कर चलानी थी बाद 10 साल की गारंटी थी । सरकार कांग्रेस ने योजना में अमल में लाई थी ठेकेदार सड़क की लीपा पोती करके चार 5000 करोड रुपए लूट, कुछ टुकड़े-जूठन यहां के नेताओं को भी देकर चलता बना; 10 साल सड़क का प्रबंध एम पी आर डी सी को करना था जो करती इसके पहले ही शिवराज सरकार ने नई सड़क योजना लाकर करोड़ों रुपए प्राकृतिक संसाधन को नष्ट करके लूटने की नई योजना बना दी।
इसलिए 10 साल सरकार का प्रबंध का प्रमाण पत्र था की 56 आम नागरिक सोन नदी के नहर में डूब कर मर गए। शिवराज सरकार ने मर गए लोगों के परिवार के लिए कोई गारंटी नहीं थी कुछ जूठन फेंकने के अलावा और ठेकेदार यह सरकारी तंत्र पर कोई आरोप दंडात्मक सिद्ध नहीं हुआ। यह कम अनेक योजनाओं में अनेक प्रकार से खनिज ,वन संसाधन ,उद्योग आदि आदि में भी चला रहा है।
हाल में ओरिएंट पेपर मिल में दुर्घटना से एक व्यक्ति मर गया और कई घायल हो गए, पेपर मिल की बिरला ,रिलायंस के मुकेश अंबानी के मुकाबले काफी गरीब है इसलिए पुलिस प्रकरण दर्ज हो गया या सेटलमेंट नहीं हो पाया ।
लेकिन हमें याद है कि रिलायंस में ऐसी ही एक मौत के कारण पुलिस प्रकरण तो दर्ज हो गया था इसके बाद रातों-रात वापस हो गया। बहरहाल हम बात कर रहे थे रेगुलर चलने वाली इस नीतिगत व्यवस्था में अब बारी अमरकंटक जोन कहै।
वहां पर शिवराज ने करीब 100 करोड रुपए का कोई महाकाल-लोक जैसा कॉरिडोर बनाने और उसमें उच्च स्तरीय बंदर-बांट करने की योजना लाए हैं…(महाकाल लोक उज्जैन में भ्रष्टाचार का एक बड़ा नमूना है जो आंधी तूफान में साधू सन्यासियों की बनी मूर्तियों पर टूट पड़ा था) , गुलाम कार्यकर्ता और नेता जोर से जयकारा लगाकर उसे स्वीकार भी कर लिए हैं, जनता तो भिखारी बना दी गई है उसे प्राकृतिक संसाधनों की क्षति से कोई लेना देना नहीं है कि सिर्फ रीवा अमरकंटक सड़क मार्ग की योजना को माने तो एक करोड रुपए से भी कम कीमत और दिल्ली में बहुचर्चित ढाई सौ करोड रुपए प्रति किलोमीटर की सड़क के मध्य नजर आधा किलोमीटर सड़क निर्माण से भी कम कीमत पर शहडोल क्षेत्र में अमरकंटक कॉरिडोर के नाम पर टुकड़े में भ्रष्टाचार की बंदर बांट की योजना लाई गई है। ताकी अमरकंटक के विकास का सपना दिखाकर धर्म का लवादा ओड़कर पर्यावरण संरक्षण की दृष्टिकोण से अति संवेदनशील अमरकंटक जॉन की पर्यावरण और पारिस्थितिकी को क्षतिग्रस्त किया जा सके।
रीवा अमरकंटक सड़क निर्माण के मार्ग में तत्कालीन कांग्रेस सरकार को विधानसभा चुनाव के लिए फंडिंग की जरूरत थी इसी प्रकार से 100 करोड रुपए के अमरकंटक कॉरिडोर योजना में उनके अपने ठेकेदार जिन्हें उन्होंने टुटपुंजिया ठेकेदार से उठाकर करोड़पति या अरबपति बना दिया है जैसे अदानी दुनिया का तीसरा बड़ा आदमी बन गया था; इसी प्रकार के ठेकेदारों को ऐसी योजनाओं पर अमल लाने का पारदर्शी तरीके से काम दिया जाएगा…. स्थानीय अमरकंटक क्षेत्र लोगों को अपने पर्यावरण और परिस्थिति को जीवन भर नष्ट करने के लिए जूठन फेंक दिया जाएगा। ताकि उन्हें आभास रहे इस सरकार ने उनके लिए काम किया ।ऐसी योजनाएं भ्रष्टाचार की दुनिया में “आमों के आम और गुठलियों के भी दाम ” यानी नागरिकों के वोट बैंक लूटने का भी धंधा बन जाती है। इससे ज्यादा कुछ नहीं होता …
उन्हें मालूम है इसमें कोई स्थाई लोकप्रियता भी नहीं होती इसीलिए 20 साल शासन करने के बाद महाराज-शिवराज ने जुमा-जुमा 40 ईमानदार समाज संगठनों को भी बता पाने में असफल रहे हैं… जो उनकी अपनी गुलामी पूर्ण संस्थाएं अलग-अलग हैं उसमें ब्राह्मण नाम से जन-दर्शन के लिए प्रकाशित की गई है जो इस प्रकार की हैं ।
शहडोल के लोग जानते हैं इसमें बहुतायत फर्जी सामाजिक संगठन है जो उनके अपने गुलाम हैं यह दुर्भाग्य है कि ऐसे संगठनों में आदिवासियों की तरह ब्राह्मण समाज का भी नाम जोड़ दिया गया है स्वाभाविक है कुछ ब्राह्मण उनके गुलाम की लिस्ट में होंगे। उनके नाम से जयकारा घोष के लिए नाम प्रकाशित किया गया है ।
किंतु ब्राह्मणों का उपयोग करने के पहले यह आवश्यक सोचा जाना चाहिए था की मूर्खता-पूर्ण नीतियां बनाने से जो सामाजिक संरचना क्षतिग्रस्त हुई है उसके कारण शिवपुरी का विकास शर्मा नाम का एक युवा जाति-पात की युद्ध में उसे वक्त शहीद हो गया जब वह पानी की प्यास के उसे कुआं में गया था जहां दलित बहुसंख्यक समाज थे… उसे युवक को पानी की जगह पेशाब पीने पर मजबूर किया गया और
इसके बाद विकास शर्मा ने स्वाभिमान और अपने हिंदुत्व के गर्व को लेकर आत्महत्या कर ली।
वास्तव में लोकतंत्र की सरकारों के विकास की यह आत्महत्या थी। बाद में उसके परिवार को अपना गांव इसलिए छोड़ना पड़ा, क्योंकि दलित हितों में बने कानून में उन्हें धमकाया गया की फंसा दिया जाएगा और वह जीवन भर जेल में सड़ते रहेंगे। यह हमारे लोकतंत्र की सरकारों द्वारा बनाई गई नीतिगत विकास का भयानक चेहरा है ….. क्योंकि सरकार ने भी इस परिवार को कोई भयानक आक्रमण के लिए बड़ी राहत नहीं दी। जैसा की अपनी पूर्ण समर्पण भावना से कृष्ण और सुदामा बनकर सीधी जिले के किसी दलित को “पेशाब-स्नान” के बाद महाराज शिवराज ने अपने राजमहल में बुलाकर चरण पखारते हुए वंदना की थी और इस वंदना को अपने वोट बैंक के लिए सोशल मीडिया में सरकारी पैसे से वायरल भी कराया था।
आज जब चुनाव होने हैं और फर्जी संगठन की लिस्ट बनती है तो जो ब्राह्मण समाज का प्रतिनिधित्व कर संगठन के प्रतिनिधि बनते हैं उन्हें यह प्रश्न शिवराज से पूछना चाहिए कि उन्होंने ऐसा क्यों किया…? किंतु जैसे पूरा नागरिक समाज गुलाम बनाए जाने की नीतियों पर अमल हो रहा है वैसे ही गुलाम बन गई संस्थाएं, कॉर्पोरेट-पॉलिटिकल-इंडस्ट्री के सिर्फ गुलाम नौकर हैं इसके अलावा कुछ नहीं…. और इसका ही एक बड़ा हिस्सा विकास के नाम पर अमरकंटक जोन में अमरकंटक कॉरिडोर कि पर्यावरण और पारिस्थितिकी को बर्बाद करने के लिए सिर्फ भ्रष्टाचार उद्देश्य पूर्ति हेतु लाया जा रहा है। इसे समझने की जरूरत आखिर क्यों नहीं है… किससे पूछ कर यह सब हो रहा है इसीलिए शिवराज पजामा कुर्ता पहना हुआ वह 20 साल पुराना सड़क शहडोल की गलियों में घूमने वाला व्यक्ति नहीं है वह महाराज शिवराज हो चुका है। उसे फर्क नहीं पड़ता अमरकंटक बर्बाद हो, अमरकंटक रीवा सड़क मार्ग बर्बाद हो या फिर आम नागरिक बर्बाद हो…? वह अपने अंग्रेज साहब बहादुर के लिए गुलाम महाराजाओं की तरह लोकतंत्र निर्णय ले रहा है क्या इस पर आम नागरिक से नहीं पूछा जाना चाहिए कि आप ऐसा क्यों करते हैं।
चलते चलते यह खबर गर्म हो चली है कि शिवराज सिंह के आगमन पर कोटा के किसी एक ग्रामीण की लाश समर्पित की जाएगी क्योंकि एक भू माफिया के कारण वह व्यक्ति मर गया है यह खबर भी आदिवासी क्षेत्र में विकास की कील गाड़ती है|
होगा क्या…? महाराज राव शिवराज को खुश करने के लिए कुछ लोगों के मकान ढह जाएंगे तो कुछ लोग संपन्न हो जाएंगे…
भाजपा पूर्ण अनुशासित होने का दाम रखने वाली राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ; “मदर ऑफ डेमोक्रेसी” से अनुशासित है जो हिन्दू धर्म का पाखंड के भ्रम पर विश्वास करती है किंतु वृंदावन के इस समय साक्षात राधा-कृष्णा जी की कृपा पाने वाले सोशल मीडिया में सर्वाधिक लोकप्रिय वास्तविक सन्यासी प्रेमानंद जी महाराज धर्म की व्याख्या में “परमात्मा से आत्मा और आत्मा से परमात्मा पर पारदर्शी संबंध चाहते हैं”, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और उसकी भारतीय जनता पार्टी इन दोनों के बीच में “कॉर्पोरेट-इंडस्ट्री जिसमें राजनीति उद्योग का धंधा देखी है, ऐसे में प्राकृतिक संसाधनों से भरा-पूरा हमारा शहडोल क्षेत्र और उसकी गौरवशाली अमरकंटक की परंपरा ऐसे लोकतंत्र के विकास में अगर आत्महत्या या उसकी हत्या नहीं होती है तब जरूर आश्चर्य होता है और कोई बात नहीं है….?


