
शहडोल नगर के समीप गांव में भू माफिया महोदय ने राजस्व माफिया महोदय के सहयोग से बर्मन परिवार के पारिवारिक विरासत के जमीन मकान-आरजी जो कथित तौर पर चार भाइयों की थी उसमें एक बड़े भाई को समझा बूझाकर, लालच देकर भ्रष्टाचार की महान परंपरा का अनुगमन करते हुए पूरी की पूरी आरजी बाकी भाइयों की सहमति के बिना रजिस्टार ऑफिस से रजिस्ट्री करवा दी।
धोखे से कानून यह कहता है कि अगर पारिवारिक विरासत की आराजी है तो उसका विधिवत बंटवारा होना चाहिए अथवा अन्य उत्तराधिकारियों की सहमति से संबंधित विक्रेता उत्तराधिकारी के हिस्से का भाग ही रजिस्ट्री की जा सकती है। किंतु राजस्व माफिया और भूमाफिया के संगम में बर्मन परिवार का आरजी बह गई । कहते हैं बर्मन परिवार के चार भाइयों में से एक ने आरजी बेचकर जो भी चोरी-चरमारी में मिला लेकर चलता बना। भूमाफिया खुश, राजस्व माफिया खुश और विक्रेता इस माफिया गिरी में बहुत खुश हुआ।
लेकिन बात तब पता चली जब भू माफिया महोदय, राजस्व माफिया महोदय से मिलकर मौका स्थल पर आरजी पर कब्जा करने पहुंचे तब परिवार के तीन भाइयों को पता चला की माफिया-गिरी में उनकी पूरी प्रॉपर्टी रजिस्टार ऑफिस से रजिस्टर होकर बिक चुकी है ।
कानून अब यहां यह कहता है की विक्रय सुदा अराजी की रजिस्ट्री की निरस्तीकरण का काम माननीय न्यायपालिका के द्वारा ही संपन्न हो सकता है किंतु न्यायपालिका में जाने के जोखम का मतलब है बहुत पैसा का बर्बाद होने की गारंटी। और और कब तक होगा या नहीं होगा न्यायालय से न्याय, इसका भी भरोसा नहीं…? ऐसी ढेर सारी चीज सोचकर परिवार में लड़कियों का ब्याह.. पारिवारिक जिम्मेदारी… घर की बीमारी और तमाम प्रकार की परेशानियां का जब भयानक वातावरण कैलाश बर्मन को भयभीत कर गया वह अंततः इस भयानक भ्रष्ट व्यवस्था में और माफिया गिरी के तंत्र में भयभीत होकर गस्त खाकर गिर पड़ा और अंततः है मौत की नींद सो गया।
—————————————————( त्रिलोकी नाथ )
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यह संयोग ही था परिवार की बची-खुची कमाई अस्पताल में गमाने के बाद जब वह मौत की चादर ओढ़कर शहडोल लौटा तभी मध्य प्रदेश सुबे के मुख्यमंत्री महाराज राव शिवराज का 40 समाज संस्थाएं अभिनंदन और स्वागत करने को तन-मन-धन से उत्साहित थी… माफिया तंत्र से प्रभावित अपना सब कुछ खोने के बाद यानी तन-मन-धन खोने के बाद वर्णन की लाश लेकर महाराज राव शिवराज के स्वागत के लिए तैयारी ही कर रहा था, तभी भाजपा को भनक लगी कि अपने माफिया तंत्र की सफलता से विचलित होकर बर्मन परिवार संपूर्ण समर्पण के भाव से लाश लेकर अभिनंदन को आतुर है।ऐसे में जो पुलिस व्यवस्था महाराज राव शिवराज की सेवा में लगी थी वह उस गांव की ओर चली गई जो लाश को लेकर अभिनंदन के लिए अपने मुख्यमंत्री के समक्ष न्याय पाने की आशा से आने वाली थी। ऐसा अगर होता है तो संभव है की महाराज राव शिवराज सिंह चौहान अपनी करुणा दृष्टि दिखाकर तत्काल अपने आदत के अनुसार मंच से ही संबंधित माफिया तंत्र को नेस्तनाबूद करने के लिए कोई फतवा जारी कर देते।
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और इस कट्टरपंथी न्याय से वर्षों से मेहनत से पल्वित बना बनाया माफिया तंत्र का ढांचा टूट सकता था। अतः तत्काल पॉलिटिकल माफिया महोदय से आहत लुट चुके बर्मन परिवार और उसे लाश के पास जा पहुंचे और लाश को जगा कर आश्वासन देने का उसके साथ गारंटी भी देने का काम किया कि, ठीक 11:00 बजे भू-माफिया महोदय रजिस्ट्री ऑफिस में पहुंच जाए और और बर्मन परिवार के साथ जो अन्याय हुआ है उसकी संपत्ति की रजिस्ट्री गलत हो गई है उसमें न्यायपूर्ण कार्यवाही का अनुबंध हो सके।
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ऐसा नहीं है की पॉलिटिकल माफिया महोदय का पार्ट-2 वहां नहीं पहुंचा , वह भी पहुंचा और पारिस्थिति में न्याय का भरोसा की आहुति डाली और परिणाम भी माफिया-तंत्र के आशा के अनुकूल निकल आया। लाश के साथ महाराज राव शिवराज सिंह का अभिनंदन समारोह अंततः बर्मन परिवार ने रोक दिया। क्योंकि उसे न्याय की गारंटी पूरा लोकतंत्र के माफिया महोदय दे रहे थे, राजस्व न्यायपालिका के लोग इसके साक्षी भी बने।
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और मुख्यमंत्री मध्य प्रदेश को भनक भी नहीं लगी की एक लाश उनके अभिनंदन को आतुर थी…. बहरहाल मुख्यमंत्री को उनके कार्यक्रम के अनुसार 11:00 बजे पहुंचना था और 2 घंटा शहडोल में मनोरंजन करना था इसके पहले ठीक 11:00 बजे पॉलिटिकल माफिया की गारंटी के आधार पर भू माफिया रजिस्ट्री ऑफिस पहुंच गया और एक जुमला-नुमा अनुबंध-पत्र बनवाकर बर्मन परिवार को झुनझुना बजाने को कहा बर्मन परिवार, तत्काल नवीन न्याय प्रणाली के अनुबंध पत्र का झुनझुना पकड़े हुए माफिया राज के गारंटी में लाश का अभिनंदन शिवराज के समक्ष न कर यमराज की बनाई कानून व्यवस्था में श्मशान घाट पहुंच गए और बर्मन जी को स्वाहा किया।
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अब सवाल यह है की क्या बर्मन परिवार को माफिया-तंत्र में लुटी अराजी मिलना संभव है..? यह शायद बहुत कठिन काम है क्योंकि उसके दो ही रास्ते हैं एक तो माफिया महोदय जो रजिस्ट्री के जरिए जमीन हथिया लिए हैं वह रजिस्ट्री के जरिए ही पूरा स्टैंप ड्यूटी लगा करके बर्मन परिवार को एक हिस्सा छोड़कर तीन हिस्सा वापस कर दें या फिर न्यायपालिका में इसका न्याय संभव हो तब तक मामला अंधेरे में फेंक दिया गया है… क्योंकि टाइम पास महाराज राव को इस प्रकार से दूर रखना था वह सफलतापूर्वक पॉलिटिकल माफिया द्वारा संपन्न कर लिया गया… तो इस पर फिर चर्चा करेंगे…. की परिवार बर्मन परिवार को माफिया राज की गारंटी के अनुरूप क्या कोई हक मिला…..?
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फिलहाल चर्चा करते हैं इस माफिया तंत्र से प्रताड़ित हुए राजस्व माफिया के पर्यायवाची बन चुके पटवारी पटेल जी जो पारिवारिक निराशा और हताशा की लूट-पिटा परिवार के बीच में जमीन संबंधी अधिकारों का चेहरा बनाकर वहां पहुंच गए थे, बीच में मीडिया के लोग मीडिया गिरी कर ही रहे थे की तभी पटवारी पटेल जी जवाब देने से बच रहे थे…
. दरअसल मीडिया के लोग पीड़ित परिवार की प्रताड़ना को प्रश्न पूछना चाहते थे और पटवारी पटेल जी उसे प्रश्न से भागते फिर रहे थे। उससे उत्तेजित बर्मन परिवार गांव समाज के लोग आक्रोशित हो गए और जवाब नहीं देने वाले पटवारी पटेल को जनता जनार्दन ने साक्षात तत्काल दंडित करना चालू कर दिया यानी सामूहिक पिटाई अभियान प्रतीकात्मक प्रारंभ हो गई।
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तब तक जनता जनार्दन के अंदर बैठा भगवान जागृत हो गया और पटवारी पटेल को बलपूर्वक पीटने से बचा लिया। अब राजस्व अमला पटवारी संघ इस बात से नाराज है की पटेल पटवारी क्यों पिट गए और उसमें उन्हें न्याय चाहिए।
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सवाल यह है की पटवारी पटेल जिस बात के लिए पिटे हैं उस बात में कितना अन्याय था और कितना न्याय था…? इस बात को पटवारी संघ क्यों नहीं चिंतन मनन करता है.. क्यों आखिर राजस्व अमला राजस्व माफिया का चेहरा बनता चला जा रहा है… उस पर जनता जनार्दन का ट्रस्ट खत्म होता चला जा रहा है.. जो, पटवारी के समक्ष हाथ जोड़कर गांव वाले घंटे खड़े रहते हैं उन लोगों ने उसकी पिटाई क्यों कर दी…?
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कहते हैं प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह इस “पटवारी” से इतना प्रताड़ित थे कि उन्होंने इस पद को ही उत्तर प्रदेश में खत्म कर दियारा जैसे अपने महाराज राव शिवराज सिंह चौहान जी ने अंततः तंग होकर व्यापम का भयानक चेहरा बदल दिया,यानी इसका भयानक चेहरा जो पटवारी माफिया तंत्र के रूप में विकसित हो चुका था उससे निजात दिलाने के लिए भारत के प्रधानमंत्री को रास्ता निकालना पड़ा…? तो कोई जरूरी नहीं है कि अगर प्रधानमंत्री अब भी रास्ता निकालेंगे ,जनता जनार्दन से प्रधानमंत्री ही चुनते हैं ऐसा मानकर अब भी बर्मन परिवार के साथ किस प्रकार से न्याय सुनिश्चित हो भू माफिया राजस्व माफिया और पॉलीटिकल माफिया को मिलकर सोचना चाहिए. ।
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यह ठीक है कि पुलिस और प्रशासन आपके साथ खड़ी दिखती है लेकिन न्याय का अंतिम अधिकार प्रताड़ित पक्ष का सुरक्षित होना ही चाहिए। अन्यथा, पटवारी-पटेल तो पिटते ही रहेंगे. प्रताड़ना से पीड़ित परिवार में ऐसी ही लाव निकलती ही रहेंगी ।
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तो पीटना जायज है या लाश निकलना जायज है यह सोचना चाहिए… हम तो कहते हैं यह दोनों नाजायज हैं… तरीका होना चाहिए की पटवारी जी को लाश को महाराज राव शिवराज सिंह चौहान के समक्ष जरूर प्रस्तुत करना चाहिए था और उनका जो चमत्कारिक निर्णय मंच से आता वह निश्चय ही मील का पत्थर साबित होता.
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और आने वाले विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के मुख्यमंत्री द्वारा स्थापित मानदंडों का एक उदाहरण भी बनता है और एक शानदार इवेंट भी … शायद उसकी लोकप्रियता से उनका वोट बैंक मध्य प्रदेश में बढ़ भी जाता। तो क्या शहडोल के स्थापित माफिया तंत्र ने मुख्यमंत्री का बहुत नुकसान किया है…?
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यह बात जब समझ में आएगी तब तक बहुत देर हो चुकी होगी अब भी वक्त नहीं गुजरा है मुद्दा मुख्यमंत्री के मंच पर पहुंचना चाहिए… कैसे मुख्यमंत्री अपने ही अधीन पनप रहे भू माफिया, राजस्व माफिया, पॉलिटिकल माफिया सिस्टम के बनी बड़ी बिल्डिंग को अपने बुलडोजर से ढहा सकते… हो सकता है पटवारी संघ को हड़ताल में जाने की नौबत भी नहीं आती अगर मुख्यमंत्री ईमानदारी से ईमानदार बने रह जाते….


