
चंडीगढ़, 15 सितंबर (पीटीआई) “जय हिंद पापा।” कश्मीर घाटी में आतंकवादियों के साथ मुठभेड़ में शहीद हुए कर्नल मनप्रीत सिंह का शुक्रवार को पंजाब के मोहाली जिले में उनके गांव में अंतिम संस्कार करने से पहले सेना शैली की पोशाक पहने छह वर्षीय कबीर ने आखिरी बार अपने पिता को सलाम किया।सुबह से ही, भरौंजियन गांव में कर्नल सिंह के घर पर शोक मनाने वालों का तांता लगा रहा, जो उनकी अंतिम यात्रा में उनकी गमगीन पत्नी, मां और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ शामिल हुए। सेना के एक अधिकारी को कबीर को गोद में लिए हुए देखा गया, जबकि परिवार और अन्य लोग उन्हें अंतिम विदाई दे रहे थे, जबकि एक रिश्तेदार उनकी दो साल की बेटी बन्नी को गोद में लिए हुए था।बाद में कबीर को परिवार के अन्य सदस्यों के साथ अपने पिता के तिरंगे में लिपटे ताबूत से चिपके हुए देखा गया। दाह संस्कार से ठीक पहले उन्होंने अपने पिता के पार्थिव शरीर को नमन किया और “भारत माता के सपूत की जय” और “भारत माता की जय” के नारे गूंज उठे।
“खोजी पत्रकारिता, लगभग विलुप्त हो चुकी है”:उपराष्ट्रपति
भोपाल 
आज में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के चौथे दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि सभी जानते हैं पत्रकारिता व्यवसाय नहीं है, समाज सेवा है। लेकिन अफसोस व्यक्त करते हुए उन्होंने आगे कहा कि बहुत से लोग यह भूल गए हैं और “पत्रकारिता एक अच्छा व्यवसाय बन गयी है, शक्ति का केंद्र बन गयी है, सही मानदंडों से हट गयी है, भटक गयी है। इस पर सबको सोचने की आवश्यकता है।”श्री धनखड़ ने कहा कि पत्रकार का काम किसी राजनीतिक दल का हितकारी होना नहीं है। न ही पत्रकार का यह काम है कि वह किसी सेट एजेंडा के तहत चले या कोई विशेष नैरेटिव चलाये। सकारात्मक समाचारों को महत्व देने की ज़रूरत है पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि प्रेस की स्वतंत्रता तभी हो सकती है, जब प्रेस जिम्मेवार हो।
श्री धनखड़ ने कहा कि पत्रकारिता की वर्तमान दशा और दिशा गहन चिंता और चिंतन का विषय है। हालात विस्फोटक हैं और, अविलंब निदान होना चाहिए। आप प्रजातंत्र की बहुत बड़ी ताकत हैं, और अपनी ताकत से सभी को सजग कर सकते हैं। लेकिन उन्होंने चिंता व्यक्त की कि लोकतंत्र का यह वाचडॉग, अब व्यवसायिक हितों के आधार पर काम करने लगा है। “जब आप जनता के watchdog हो तो किसी व्यक्ति का हित आप नहीं कर सकते, आप सत्ता का केंद्र नहीं बन सकते। सेवा भाव से काम करना होगा। आवश्यकता है – सच्चाई, सटीकता और निष्पक्षता, इनके बिना कुछ होगा नहीं,” उन्होंने कहा।उपराष्ट्रपति ने कहा कि जिनका काम सबको आईना दिखाने का है, हम ऐसे हालात में पहुंच गए हैं कि हमें उनको आईना दिखाना पड़ रहा है I यह चिंता का विषय हैI
विकास को राजनीति से जोड़कर न देखने का आग्रह करते हुए उन्होंने कहा कि विकास की चर्चा करने का यह आशय नहीं है कि आप किसी राजनीतिक दल की प्रशंसा कर रहे हैं, बल्कि विकास एक जमीनी हकीकत है। विभिन्न आंकड़े देते हुए उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश ने विकास के क्षेत्र में कई मुकाम हासिल किए गए हैं जिन्हें राजनीतिक चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए जैसे कि सिंचाई में 20 साल में 6 गुना वृद्धि हुई और हर डिविजनल हैडक्वाटर, चार लेन से जुड़ा हुआ है।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पत्रकार अगर विकास को अपने रडार पर रखेगा तो समाज में जो सकारात्मक बदलाव आ रहा है, उसमें निश्चित रूप से गति आएगी और विकास के मामले में, राजनीतिक चश्मे को निकाल कर छोड़ देना चाहिए।उन्होंने वर्ल्ड बैंक के अध्यक्ष के बयान का जिक्र करते हुए कहा कि पिछले 6 साल में वित्तीय समावेशन में जो भारत ने किया है, वो 47 साल में भी संभव नहीं था। श्री धनखड़ ने कहा कि दस वर्ष पूर्व हम विश्व की पांच कमजोर अर्थव्यवस्थाओं (fragile five) में गिने जाते लेकिन आज विश्व की पांचवीं बड़ी अर्थव्यवस्था हैं।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि किसी मुद्दे पर सहमति हो या ना हो विचार विमर्श आवश्यक है। आपका अपना मत और विवेक है, आप सहमत – असहमत हो सकते हैं लेकिन विमर्श से मना नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि राज्यसभा के सभापति की हैसियत से “मैं लगातार इस ओर प्रयास कर रहा हूं, कि वहां क्या होना चाहिए – Dialogue, debate, discussion, deliberation, परंतु हो क्या रहा है? Disturbance, Disruption. संविधान सभा में तो 3 साल तक ऐसा कभी नहीं हुआ था। उन्होंने तो बहुत ही गंभीर मुद्दों का सामना किया था, उनका समाधान ढूंढा विचार विमर्श से।”उपराष्ट्रपति ने निराशा व्यक्त की कि मीडिया इस मुद्दे पर अपेक्षित ध्यान नहीं दे रही है। उन्होंने अपील की कि यह जन आंदोलन बनना चाहिए कि आपके जन प्रतिनिधि कैसे ऐसा आचरण कर सकते हैं और उस उत्तरदायित्व का निर्वाहन कर रहे हैं या नहीं जो संविधान ने उनको दिया है।
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