
शहडोल।
5 अक्टूबर को निश्चित तारीख में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की हरी झंडी दिखाये जाने पर शहडोल से शहडोल- नागपुर तक की ट्रेन चल पड़ी। यह ट्रेन की टाइमिंग को लेकर स्थानीय व्यक्तियों में बहुत उत्साह नहीं है। क्योंकि मूल रूप से बीमार नागरिकों को चिकित्सा सेवा हेतु नागपुर पहुंचने वाली है। ट्रेन रात में नागपुर पहुंचती है और पूरी रात नागरिकों को अतिरिक्त भार नागपुर में ठहरने का उठना पड़ता है।
बहरहाल इस ट्रेन की मांग तब ज्यादा उठी थी जब शहडोल क्षेत्र से नागपुर जाने की कोई सुविधा नहीं थी। अब सड़क मार्ग भी बन गया है और जो भी व्यक्ति सक्षम होगा नागपुर जाने के लिए वह जल्द से जल्द नागपुर पहुंचना चाहेंगे ।क्योंकि मामला चिकित्सा सेवा से जुड़ा होता है । इस रेलगाड़ी का हालांकि वजन वैसे कम हो जाना चाहिए था क्योंकि शहडोल में मेडिकल कॉलेज एक बड़ा चिकित्सा केंद्र के रूप में स्थापित हो गया है। यह अलग बात है कि पर्याप्त वेतन नहीं होने से अच्छे चिकित्सा के यहां पर सेवाएं नहीं दे पा रहे हैं। बल्कि मेडिकल कॉलेज भी सरकारी चिकित्सा केदो की तरह एक बड़ा चिकित्सा केंद्र मरीजों की बुकिंग सेंटर के रूप में स्थापित हो गया है। जहां बीमार लोग मेडिकल कॉलेज का नाम सुनकर के आते हैं और निजी चिकित्सकों के हवाले एन केन प्रकारेण कर दिए जाते हैं।अन्यथा यदि उच्च गुणवत्ता वाले चिकित्सक इस मेडिकल कॉलेज में सेवा देते तो शायद ही इस ट्रेन की मांग भी न होती। फिलहाल शहडोल जबलपुर के लिएराहत भरी है शहडोल-नागपुर ट्रेन
फिर भी शहडोल सांसद श्रीमती हिमाद्री सिंह के लेटर हेड पर भारत सरकार ने इस आदिवासी विशेष क्षेत्र को यह ट्रेन देकर सिर्फ तुष्टिकरण का बड़ी खानापूर्ति की है किंतु जिस तरह यात्री ट्रेनों का वर्तमान में यात्री ट्रेनों का नकली संकट खड़ा किया गया है उसे दौर में शहडोल कटनी मार्ग के लिए एक और अच्छी ट्रेन के रूप में इसे सुविधाजनक माना जा सकता है। देर ही सही आदिवासी क्षेत्र की मांग सुनी जा रही है इसलिए ट्रेन को मिली हरी झंडी का महत्व थोड़ा बढ़ जाता है तो कहां जा सकता है शहडोल क्षेत्र की समस्याओं में छोटी सी मांग बड़े इवेंट के रूप में मुख्यमंत्री द्वारा पूरी की गई है; कब तक चलेगी यह ट्रेन, सिर्फ शुभकामनाएं दी जा सकती हैं।

