
राहुल गांधी की ही नहीं आदिवासी विशेष क्षेत्र में विधानसभा चुनाव के पहली बड़ी रैली ब्यौहारी में संपन्न हुई जिसमें ब्यौहारी के स्थानीय नेताओं को तवज्जो नहीं मिलता देखा गया
यानी जमीनी धरातल के नेताओं को कांग्रेस पार्टी अभी भी महत्व देने की फिराक में नहीं है | यह बात तो राहुल गांधी की रैली से साबित हो रही है अन्यथा कोई कारण नहीं की कांग्रेस पार्टी के संतोष शुक्ला जैसे पुराने नेताओं को मंच में जगह सार्थक रूप से नहीं मिलती. .इसके विपरीत भारतीय जनता पार्टी में जो भी और जैसी भी आंतरिक व्यवस्था है उसमें अक्सर इस बात को तवज्जो मिलता रहा है कि चाहे उनके नेता जमीन का जैसा भी हो वह चुनाव के वक्त जरूर पोस्टर मन बनाया जाता है ताकि स्थानीय लोगों को देखकर लोगों को राजनीतिक दल के साथ आत्मीयताका संबंध बताया जा सके.
_______________________( त्रिलोकीनाथ )______________________________
तो क्या माना जाए कि भारतीय जनता पार्टी इस मामले में कांग्रेस से काफी आगे हो चुकी है…? यह अलग बात है पहले भाजपा में और अब कांग्रेस में स्थापित हो रही जो भी करगुजरी है उसकी एक झलक पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने बहुत ही पारदर्शिता के साथ स्थानीय-समस्या रेत खनन में माफिया गिरी को राहुल गांधी के मंच से उठाते हुए देखा गया यह भी पूरी तरह से अलग बात है कि जिस रेत माफिया की चर्चा कमलनाथ करते हैं वह उनकी अपनी पार्टी का विधायक है .यह दूसरी बात है कि यह विधायक बाहुबली होने के कारण भाजपा से जब टिकट नहीं मिला तो कांग्रेस की टिकट पर चुनाव जीतकर कांग्रेस का विधायक हैऔर इन सबसे इतर बहुत बहुत साफगोई और पारदर्शी तरीके से इस माफिया नुमा राजनीति को भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस से सत्ता छीनने के बाद रेत माफिया गिरी को भी अपहरण कर लिया.
अन्यथा कोई कारण नहीं है की कमलनाथ विशेष क्षेत्र ब्यौहारी में जहां की खनन माफिया ने इतिहास करते हुए करीब 56 हाईवा और बड़ी गाड़ियों के साथ एक साथ छापेमारी के दौरान पकड़ाया गया था, जिसका क्या किया…?, यह तो न कभी पारदर्शी रहा है ना कभी पारदर्शी रहेगा…. क्योंकि भारतीय जनता पार्टी इस छापा के साथ के बाद खनन माफिया गिरी को आंख मूंदकर प्रोत्साहित करती रही है, जैसे खनन माफिया का भाजपा के शासनकाल में अपहरण कर लिया गया हो. जिला खनिज अधिकारी जो उस वक्त थे वह माफिया के लिए गुलामों की तरह व्यवहार करते थे. स्थानीय छोटे-मोटे ट्रैक्टर आदि चलाने वाले लोग अगर रेत की चोरी करते थे तो उन्हें पकड़ कर के रेत माफिया के लिए रास्ते खोले जाते थे और उन्हें सहयोग किया जाता था. ताकि जो भी अवैध रेत माफिया गिरी का काम हो वह सर्टिफाइड माफिया के लिए ही होना चाहिए. इससे आदिवासी विशेष क्षेत्र की विशेषकर खनिज रेत माफिया गिरी पर का खनिज विभाग में कब्जा हो गया और लगभग पूरा खनिज विभाग माफिया का ही एक कार्यालय बनकर रह गया और शायद इसी पीड़ा को उनका रेत माफिया भाजपा ने हाईजैक कर लिया था.
पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ बहुत सही तरीके से इसका उल्लेख राहुल गांधी कर रहे थे.. तो क्या यही राजनीति आगे भी चलेगी, राजनीतिक दृष्टिकोण से .राजनीतिक कार्यकर्ताओं की राहुल गांधी के मंच में अनुपस्थिति क्या दर्शा रही थी स्थानी कार्यकर्ताओं को चुनाव में भी तवज्जो शायद ही दिया जाएगा…?
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने व्यवहारी कीअपनी यात्रा में पूरी ताकत जातिगत जनगणना उठाने में लगे उन्होंने पिछड़ा वर्ग के साथआदिवासी वर्गकी भागीदारी पर फोकस भी किया,की किस प्रकार से भारत में आदिवासियों की एक बहुत बड़ी भागीदारी होने के बाद भी विकास क्रम में निर्णय लेने के मामले में वह नाम मात्र का भी हिस्सा नहीं पता है….और यह चीज उनके खुद के मंच में स्पष्ट दिख रही थी कि आदिवासियों की भागीदारी राहुल गांधी के मंच में जिस प्रकार से उन्होंने आवाज उठाई है उसे प्रकार से दिखाई नहीं दे रही थी .फिर वह चाहे व्यवहारी की बात हो,शहडोल जिला की बात हो या सीधी जिला की अथवा मध्य प्रदेश की आदिवासियों का एक बड़ा तबका आदिवासियों की बात प्रखरता से उठाने वाले मंच में उठाई गई बात के अनुरूप दिख नहीं रही थी.
यह कांग्रेस पार्टी की एक बड़ी कमजोरी भी है .यह अलग बात है कि भाजपा की मुख्यमंत्री की प्रतियोगिता मेंउतारे गए उम्मीदवारों और18 साल केभाजपा के उबाऊ शासन में लोग निराश होकर कांग्रेस पार्टी के पक्ष में मतदान करें… अथवा बदलाव के लिए मतदान करें उसमें कांग्रेस पार्टी का जमीनी धरातल के साथ जो कनेक्टिविटी प्रदर्शित होना चाहिए, इसका अभाव भी इस विधानसभा के चुनावी रैली में स्पष्ट तौर पर देखने को मिला. रैली जबरदस्त रही है इसमें कोई शक नहीं है…बदलाव भी हो सकता है,इसमें शंका नहीं किया जा सकता…किंतु क्या यही आदिवासी विशेष क्षेत्र का राजनीति का चेहरा है…? इस पर प्रश्न चिन्ह लगाते हैं,ऐसे तो विकास-क्रम नहीं होता राजनीतिक-माफिया-गिरी नए रंग रूप में अवश्य प्रदर्शित होती है ..,वह चाहे कांग्रेस पार्टी में हो या फिर भारतीय जनता पार्टी में दोनों का चेहरा लगभग शहडोल क्षेत्र के राजनीति में एक जैसा दिखता है….

