आचार संहिता में भी, आयरन मैन के सामने आयरन लेडी विश्वविद्यालय में कमजोर हो गई..?-( त्रिलोकीनाथ )

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Chhattisgarh Foundation Day 2021: इंदिरा गांधी और वल्लभ भाई पटेल करेंगे  याद, प्रदर्शनी 31 अक्‍टूबर को - Chhattisgarh Foundation Day 2021 Indira  Gandhi and Vallabhbhai Patel will be remembered ...जब कंगना रनौत को पद्मश्री पुरस्कार मिला तो उसने कहा देश की आजादी 2014 में आई है। और इसी आजादी के मद्देनजर गुजरात से स्वतंत्रता आंदोलन के नेता आयरन मैन (लौह पुरुष)  सरदार वल्लभभाई पटेल को “स्टैचू ऑफ यूनिटी” में बदलकर दुनिया का सबसे बड़ा लोहे का पुतला बना दिया गया और उनके जन्मदिवस 31 अक्टूबर1875 का दिन राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाया जाने लगा।

 संयोग बस इसी दिन भारत की आयरन लेडी श्रीमती इंदिरा गांधी देश में शहीद हो गई थी तो यह तिथि पुण्यतिथि के रूप में मनाई जाती रही।भारत की प्रधानमंत्री रहीं श्रीमती इन्दिरा गाँधी का 31 अक्टूबर 1984 मे़ निधन हुआ था ।वर्ष 1966 से 1977 तक लगातार 3 पारी के लिए भारत गणराज्य की प्रधानमन्त्री रहीं और उसके बाद चौथी पारी में 1980 से लेकर 1984 में उनकी राजनैतिक हत्या तक भारत की प्रधानमंत्री रहीं। वे भारत की प्रथम और अब तक एकमात्र महिला प्रधानमंत्री रहीं।इस तिथि को लेकर कोई विवाद नहीं है। विवाद, इस राजनीति को लेकर के है की पुण्यतिथि मनाई जाए या जन्म तिथि.. अथवा  दोनो…? 

———( त्रिलोकीनाथ )——————-

यहां तक तो सही था। लेकिन अगर मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़  में निर्वाचन आयोग की आचार संहिता लगी हुई है इस बात की परवाह न करते हुए

भारत का संभवतः  एकमात्र राष्ट्रीय इंदिरा गांधी जनजाति केंद्रीय विश्वविद्यालय अमरकंटक  में उपलब्ध तमाम बुद्धिजीवी कुलपति प्रोफेसर्स और पत्रकारिता शिक्षा से जुड़े लोग भी अपनी गुलामी का अजीब नमूना प्रस्तुत कर डाले। जब उन्होंने इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय एकता दिवस यानी सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती तो जोर-शोर से मनाई क्योंकि वे लोह पुरुष थे। किंतु लौह महिला के रूप में स्थापित श्रीमती इंदिरा गांधी को श्रद्धा सुमन देना क्यों भूल गए..? जबकि विश्वविद्यालय ही उनके नाम पर है।

वह यह बहाना भी नहीं कर सकते कि केंद्र सरकार का दबाव था हम मजबूर हैं या हम गुलाम हैं..? क्योंकि मध्य प्रदेश में चुनाव आचार संहिता लगी हुई है जो हमारे संविधान में स्वतंत्रता की निष्पक्ष होने की गारंटी देता है.. फिर क्या कारण था कि जिन महान नेता के नाम पर विश्वविद्यालय में वह काम कर रहे हैं वह उन्हें ही श्रद्धा सुमन देना भूल गए.. और भाजपा के ट्रेडमार्क लीडर सरदार वल्लभभाई पटेल को पूरे उत्साह से  न सिर्फ जयंती मनाई गई बल्कि उसका प्रकासन भी समाचार पत्रों में मतदाताओं को उनके त्याग और बलिदान के रूप में हमेशा याद करने के लिए प्रकाशित कराया गया। फिर श्रीमती इंदिरा गांधी का जो भारत की आयरन लेडी हैं उन्हें क्यों कमजोर कर समझ गया, बाबजूद इसके भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पेशल संसद के सत्र बुलाकर वर्तमान संसदीय प्रणाली में महिलाओं के लिए आरक्षित देकर उन्हें सशक्तिकरण करने की पूरी निष्ठा का परिचय दिया था ।Janjateeye university regional campus will be open in Mahrajganj - गुड  न्‍यूज़: महराजगंज में खुलेगा जनजातीय विश्वविद्यालय का रीजनल कैंपस , उत्तर  प्रदेश न्यूज

तो क्या प्रधानमंत्री की निष्ठा पर अमरकंटक विश्वविद्यालय  ने प्रश्न उठाया है… या फिर वह इस महान लेडी को उनके ही विश्वविद्यालय में खारिज कर दिया…? क्योंकि वह भाजपा की ट्रेडमार्क लीडर ना होकर कांग्रेस की स्थापित नेता रही अथवा मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की सीमा में स्थित इस विश्वविद्यालय से भाजपा के ट्रेडमार्क लीडर सरदार वल्लभभाई पटेल के आड़ में विश्वविद्यालय प्रशासन ओबीसी बोट बैंक को ध्यान में रखकर राष्ट्रीय एकता दिवस को प्रमुखता से प्रचारित और प्रसारित कराया..?

यह काम चुनाव आचार संहिता का भी है लेकिन मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के निर्वाचन अधिकारी अथवा इस क्षेत्र  के लिए निर्धारित प्रेक्षक ओबीसी वोट बैंक को ध्रुवीकरण करने वाली विश्वविद्यालय की इस घटना को कितनी गंभीरता से देखते हैं..? यह उन पर निर्भर करता है‌।

लेकिन यह प्रश्न खत्म नहीं हो जाता कि आखिर आयरन मैन के सामने आयरन लेडी अपने ही नाम पर चल रहे विश्वविद्यालय में कैसे कमजोर हो गई..?क्योंकि इंदिरा गांधी की पुण्यतिथि के संबंध में विश्वविद्यालय प्रशासन की तरफ से उसका कोई प्रकासन नहीं कराया गया। भारतीय राजनीति की यह भी एक बड़ी दुर्दशा है और उसे भी ज्यादा दुखद और पतित दुर्दशा विश्वविद्यालय में स्थापित उस गुलाम मानसिकता की है जो विद्यार्थियों को गुलाम बनाने का काम कर रहा है..? बजाए इसके कि वह स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव आचार संहिता में सशक्त संदेश देता… विश्वविद्यालय प्रशासन ने अपनी गुलामी निष्ठा का अभूतपूर्व प्रदर्शन किया है..?

देखना यह होगा की निष्पक्ष चुनाव के लिए निष्पक्ष निर्वाचन की प्रक्रिया कितनी संदेह जनक प्रणाली से अपनी कार्यवाही को अंजाम देती है। फिलहाल अमरकंटक विश्वविद्यालय में निर्वाचन आयोग ने कोई एक्शन लिया है…?,इसकी कोई सूचना नहीं है….

 


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