
हम हमारे प्रधानमंत्री जीबार-बार इस बात को दोहराते हैं कि हम दुनिया की तीसरी अर्थव्यवस्था बनने जा रहे हैं ऐसी हालत में स्वाभाविक है हमारा लोकतांत्रिक परिवेश का सबसे बड़ा मंदिर भारत की संसद लोकतंत्र की सबसे बड़े मंदिर के रूप में सर्वोच्च सुरक्षा के केंद्र के रूप में देखी जाती है ,लेकिन जो बार-बार हो रहा है और घट रहा है और हमारी व्यवस्था उसे पर रोक नहीं लग पा रही है उसे यह स्पष्ट होता जा रहा है कि क्या हम सब खोखले दावे कर रहे हैं.
अन्यथा क्या कारण था कि एक बड़ा अनुभव होने के बाद की संसद में आतंकवादी घुसकर हमला कर देते हैं इस दिन एक लंबे अंतराल के बाद नई अत्यधिकटेक्नोलॉजी से परिपक्व नई संसद भवन में अपनी बातों को रखने के लिए अंततः भगत सिंह बनाकर कुछ नए युवक अपने-अपने तरीके से प्रस्तुत किए हैं .प्राथमिक दृष्टिकोण से इसे गलत कहा जा सकता है किंतु अगर इसे डेमो के रूप में लिया जाए यह निश्चित तौर पर इस बात को इंगित करती है की संपूर्ण सुरक्षा प्रणाली ढोल की तरह है और जितनी परिपक्व उसे होनी चाहिए नहीं है यानी कभी जब चाहेगा वह भारतीय संसद की सुरक्षा प्रणाली को लात मारकर सामने आ सकता है . समस्त लोक प्रतिनिधि बिल्कुल सुरक्षित नहीं है भारत के सांसद भवन में इस प्रकार का अतिक्रमण प्रदर्शित यह भी करता है की अगर कोई आतंकवादी होतातो वह इस पूरी संसद को कितना क्षतिग्रस्त कर सकता था
इस बात को कितनी गंभीरता से हमारे लोकतंत्र को चलाने वाले लेते हैं यह तो भविष्य बताएगा किंतु वर्तमान ने यह सिद्ध किया है कि यदि आप लोकहित में अपनी चेतना को समर्पित नहीं करते हैं तो आज इन युवाओं ने एक डेमो की तरह संसद की सुरक्षा व्यवस्था के उड़ा दिए तो कल कोई भी आतंकवादी संसद भवन को और सभी माननीय सांसदों को तहस-नहस कर सकता है.क्या इस पर गंभीरता से पक्ष और विपक्ष एक साथ बैठकर अपना निष्कर्ष निकलेंगे अथवा संसदीय प्रणाली में मतभेद इतनी ज्यादा मनभेद की तरह उजागर हो चुके हैं की कोई भी लोकतंत्र के मंदिर को बर्बाद कर सकता है और हम सिर्फ जांच और जांच करते रह जाएंगे…?
अनुभव से व्यक्ति सीखना किंतु हमारी संस्कृति हमारा लोकतंत्र अपने सर्वोच्च लोकतांत्रिक संस्था संसद भवन को भी सुरक्षा नहीं दे पाया है…? यह अत्यंत चिंता का विषयहै…. और उससे ज्यादा चिंता का विषय यह है कि ना तो संसदीय मंत्री ने इस्तीफा दिया है और ना ही लोकसभा अध्यक्ष ने…? इस पर विचार किया है..
अन्यथा इस बात के लिए तत्काल निलंबित कर देना चाहिए और एक नई सुरक्षा प्रणाली को विकसित करना चाहिए.अन्यथा वह पुलवामा सैनिक हमले की तरह सांसदों पर भी हो सकती है…और जिस तरह से नक्सलवादियों ने नेताओं कीएक पीढ़ी को छत्तीसगढ़ में बम से उड़ा दिया इस तरह से विपक्ष मुक्त भारत कभी भी हो सकता है…?
यह कहने में और सोचने में जरा भी संकोच नहीं करना चाहिए कि सत्ता पक्ष के लोग भी इसके गंभीर शिकार हो सकते हैं चाहे वह अपने आप को कितना भी सुरक्षित समझे आतंकवादी के बम और उनके हथियार भारत संसद भवन में जब हमला करते हैं तो यह नहीं देखतेकी कौन सा सांसद सत्ता पक्ष का है और कौन विपक्ष का है…इसलिए तत्काल जो भी इसके लिए जिम्मेदार हैं उन्हें पहली नजर में निलंबित करके इस जांच प्रक्रिया को आगे बढ़ना चाहिए ताकि निष्पक्ष तरीके से यह स्पष्ट और पारदर्शी भी हो सके कि आखिर सुरक्षा प्रणाली में इतनी बड़ी पोल क्यों रह गई थी…?
रही बात उन युवाओं की जिन्होंने यह साहस दिखाया है ऐसे लोगों को चिन्हित भी करना चाहिए जो ऐसी सुरक्षा प्रणाली को सेंधमारी करके लोकतंत्र की सुरक्षा की पॉल को तार तार कर देते हैं यानी धुआ धुआ कर देते हैं लेकिन इस दुनिया के धुंध में अपनी राजनीत चमकाने का काम किया जाएगा तो यह एक खतरनाक प्रयोग होगा जिसमें भविष्य में कुछ भी गठित हो आश्चर्य नहीं करना चाहिए और सीधी साफ सरल बात यह संदेश भी जाता है कि जब आप एक लोकतंत्र के सर्वोच्च संसद भवन को सुरक्षा नहीं दे पा रहे हैं तो आपकी सुरक्षा गारंटी की क्या गारंटी मानी जाए …?

