प्रत्यक्षम् किम् प्रमाणम् है….;सम्मान का अपमान…….. (त्रिलोकीनाथ)

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उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कहा मिमिक्री से मेरी जाति का अपमान हुआ है..
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा मेरा तो 20 साल से अपमान हो रहा है…
ओलंपिक स्वर्ण विजेता साक्षी मलिक ने कहा अपमान की इंतहा हो गई, इसलिए संन्यास ले रही हूं….और बजरंग पूनिया ने कहा अपमान सार्वजनिक हो गया है इसलिए  पद्मश्री सम्मान प्रधानमंत्री के सामने  कर जा रहा हूं…

यह एक कविता नहीं है….
कविता तो इस प्रकार से है-

राजा बोला रात है.,
रानी बोली रात है..,
मंत्री बोला रात है…,
संत्री बोला रात है….,
यह सुबह-सुबह की बात है…..!
    हालात कुछ इसी प्रकार से बदहाल हो चले हैं,

   और सड़क पर पड़ा हुआ पद्मश्री याद दिलाता है की कैसे साहित्य अकादमी का सम्मान भी इसी दुर्दशा से गुजरा था…।बहरहालबजरंग पूनिया ने प्रधानमंत्री को लिखे अपने संदेश में कहा है;

…… बीती 21 दिसंबर को हुए कुश्ती संघ के चुनाव में बृजभूषण एक बार दोबारा काबिज हो गया है। उसने स्टेटमैंट दी कि ‘दबदबा है और दबदबा रहेगा।’ महिला पहलवानों के यौन शोषण का आरोपी सरेआम दोबारा कुश्ती का प्रबंधन करने वाली इकाई पर अपना दबदबा होने का दावा कर रहा था। इसी मानसिक दबाव में आकर ओलम्पिक पदक विजेता एकमात्र महिला पहलवान साक्षी मलिक ने कुश्ती से संन्यास ले लिया। हम सभी की रात रोते हुए निकले। समझ नहीं आ रहा था कि कहाँ जाएँ, क्या करें और कैसे जिएँ। इतना मान-सम्मान दिया सरकार ने, लोगों ने। क्या इसी सम्मान के बोझ तले दबकर घुटता रहूँ।

साल 2019 में मुझे पद्मश्री से नवाजा गया। खेल रत्न और अर्जुन अवार्ड से भी सम्मानित किया गया। जब ये सम्मान मिले तो मैं बहुत खुश हुआ। लगा था कि जीवन सफल हो गया। लेकिन आज उससे कहीं ज्यादा दुखी हूँ और ये सम्मान मुझे कचोट रहे हैं।कारण सिर्फ एक ही है, जिस कुश्ती के लिए ये सम्मान मिले उसमें हमारी साथी महिला पहलवानों को अपनी सुरक्षा के लिए कुश्ती तक छोड़नी पड़ रही है। खेल हमारी महिला खिलाड़ियों के जीवन में जबरदस्त बदलाव लेकर आए थे। पहले देहात में यह कल्पना नहीं कर सकता था कि देहाती मैदानों में लड़के-लड़कियां एक साथ खेलते दिखेंगे। लेकिन पहली पीढ़ी की महिला खिलाड़ियों की हिम्मत के कारण ऐसा हो सका। हर गाँव में आपको लड़कियाँ खेलती दिख जाएंगी और वे खेलने के लिए देश विदेश तक जा रही हैं। लेकिन जिनका दबदबा कायम हुआ है या रहेगा, उनकी परछाई तक महिला खिलाड़ियों को डराती है और अब तो वे पूरी तरह दोबारा काबिज हो गए हैं, उनके गले में फूल-मालाओं वाली फोटो आप तक पहुंची होगी। जिन बेटियों को बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ की ब्रांड का अंबेसडर बनना था उनको इस हाल में पहुंचा दिया गया कि उनको अपने खेल से ही पीछे हटना पड़ा। हम “सम्मानित” पहलवान कुछ नहीं कर सके। महिला पहलवानों को अपमानित किए जाने के बाद मैं ‘सम्मानित’ बनकर अपनी जिंदगी नहीं जी पाउंगा। ऐसी जिंदगी कचोटेगी ताउम्र मुझे। इसलिए ये ‘सम्मान’ मैं आपको लौटा रहा हूं।…”

क्योंकि हमारा लोकतंत्र शराब की एक घूंट से ज्यादा पैमाने बनता नहीं दिखाई दे रहा है… क्योंकि उन्हें नशा है.. उपरोक्त पूरी कयावद की शुरुआत उस वक्त हुई, जब गर्व के साथ यह कहा गया था की नई संसद भवन, जो उनके शौक से हजारों करोड़ों रुपए से बनी है; कहा गया था की परिंदा भी पर नहीं मार सकता… और भारत के बेरोजगार युवकों ने संसद में पकौड़ा तलने का रोजगार खोज निकाला.. और कूद कर अंदर जा पहुंचे, गैस का सिलेंडर फोड़ दिया और संसद भवन धुआं-धुआं हो गया।
और जब सरकार से इस सेंधमारी पर जनता के चुने हुए पूछने के लिए भेजे गए सांसदों से पूछा गया की गैस सिलेंडर कैसे फूटा…? तो नाराज साहब सरकार ने 75 साल का भारत का लोकतंत्र का इतिहास नहीं, दुनिया के इतिहास को तोड़ते हुए एक नया रिकॉर्ड कायम किया और 146 सांसदों को बाहर निकाल दिया गया कि तुम्हारी औकात कैसे हुई यह पूछने की….?
…अब बाहर आएंगे सांसद, तो स्वाभाविक है 22 जनवरी को अयोध्या में रामजी का शिलान्यास मंदिर का शुभारंभ हो रहा है तो भजन तो नहीं गाएंगे…. तो अपने-अपने तरीके से कला-पथिक का प्रदर्शन किया.. कला के धनी संस्कारी पश्चिम बंगाल के सांसद कल्याण मुखर्जी ने उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ की नकल कर दी… की कैसे उन्होंने, “इस स्टाइल…” में यह निर्णय लिया… और इस नकल को ही “मिमिक्री” करना कहते हैं।
संसद में हुई सेंधमारी पर उपराष्ट्रपति ने भाजपा में छाई ऐतिहासिक श्मसानी खामोशी के लिए छींके तोड़ने का काम किया.. कहा; “उनकी जाट जाति और किसान पृष्ठभूमि का लगे हाथ.. उपराष्ट्रपति पद का भी अपमान हुआ है…
” अंधा क्या चाहे, दो आंखें….” इस अंदाज में राम-राज्य की डंका-पति सरकार ने विधवा प्रलाप चालू कर दिया।
उपराष्ट्रपति ने कहा जाट जाति का अपमान हुआ है,
तो सरकार ने कहा जाट जाति का अपमान हुआ है।
और भाजपा तो कह ही रही थी कि हां जाट जाति का अपमान हुआ है
समय बड़ा बलवान होता है.. बलात्कार का आरोपी सांसद बृजभूषण सिंह का मोहरा संजय सिंह कुश्ती संघ में चुनाव जीत गया … बृजभूषण के दरवाजे में लिखा गया
“दबदबा कायम है…
दबदबा कायम रहेगा….
   इससे दुखी यौन प्रताड़ना की शिकार ओलंपिक स्वर्ण विजेता साक्षी मलिक की आत्मा साक्षी देने लगी कि अब रहने का नहीं और पत्रकार वार्ता कर अपने प्रिय खेल पहलवानी का जूता अलग करते हुए खेल से अलविदा कर दिया…
क्योंकि यह जाट जाति का अपमान था और महिलाओं का भी… क्योंकि साक्षी मलिक विनेश फोगाट और बजरंग पूनिया ने जो पहलवानी के विश्व विजेता का परचम भारत के और से फहरा रहे थे उन्हें भी और दोषी भाजपा सांसद के खिलाफ अनशन कर न्याय की गुहार लगा रहे थे… सरकार ने आश्वासन देने के बाद भी न्याय देने में फेल हो गई । इससे नाराज होकर इन्होंने अपना गुस्सा अपमान को सार्वजनिक कर दिया, सिस्टम को अलविदा कर दिया….
इस नई हालत में भाजपा की सरकार का रामराज्य भरभरा कर गिर पड़ा…, ताश के पत्तों की महल की तरह…
तो सवाल उठता है कि अकबर इलाहाबादी क्यों परेशान है.. तो लिखकर चले गए,
हंगामा है क्यों बरपा.. थोड़ी सी जो पी ली है, चोरी तो नहीं की है… डाका तो नहीं डाला..?

क्यों उन्हें लगता है कि अगर कला-पक्ष के धनी पश्चिमबंगाल के सांसद ने मिमिक्री की कला का प्रदर्शन कर ही दिया था उसे कौन सी आफत आन पड़ी… जो लोकतंत्र के इतिहास में अपमानित किए गए जनता जनार्दन के प्रतिनिधियों के अपमान को छुपाने के लिए उपराष्ट्रपति की जाति सामने आ गई…
यह अलग बात है कि वास्तव में जो जाट जाति का अपमान हुआ उसमें हमारे महामहिम राष्ट्रपति जी अथवा पूरा सरकार मौन साधना चुप्पी बनाए हुए रखे हैं …?
तो दोस्तों सब कुछ पारदर्शी है…. इतना ईमानदार प्रशासन जो रात के अंधेरे में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की तरह इमरजेंसी लगाने के लिए सुबह का इंतजार नहीं किया था बस स्टाइल अपना-अपना है एक तरह से इमरजेंसी की मिमिक्री ही है..… आज कहा जा सकता है कि आज की तारीख में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रायोजित कॉरपोरेट सरकार आने के बाद अगर इंदिरा गांधी इमरजेंसी को लगाई होती तो वह बेहद सफल प्रधानमंत्री होती…? इमरजेंसी के मामले में। आपातकाल तब मीठा कड़वा-सच होता.. यह भी अलग बात है कि आपातकाल में गिरफ्तार सभी लोगों को लाडली बहन मानकर मीशा बंदी के लिए वजीफा के लिए एक अलग मंत्रालय बनाना पड़ता है। यह पूरी तरह से अलग बात है की तब इमरजेंसी में जेल नहीं होती। यह वजीफा उनके घर में पहले से रेवड़ी की तरह से ससम्मान पहुंचा दिया जाता। क्योंकि “पेगासस” यह बता दिया होता की जमीर का कीड़ा किस-किस नागरिक में या नेताओं में जिंदा है…. यही आज काप्रत्यक्षम् किम् प्रमाणम् है….

और यही 2023 की विदाई समारोह का सबसे बड़ा सच है.. तो देखते चलिए आगे आगे होता है क्या 22 जनवरी को राम का सारंग धनुष सोने का होगा… यह अलग बात है कि उनकी तुरही के बाण पत्थर के होंगे यानी मूर्तिमान न होंगे।ना बाण निकलेगा ना धनुष चलेगा…, यह सबसे बड़ा कड़वा सच है राम राज्य का । राम, यह देश अब तुम्हारे ही नाम पर चलाया जाना है कृपा बनाए रखना… यही शुभकामना वर्ष 2024 की शुरुआत पर करी जानी चाहिये. क्योंकि सब पारदर्शी है…संसद की सेंधमारी भी, स्वर्ण विजेता रहीसाक्षी मलिक की जाट जाति का अपमान भी और सांसदों के अपमान को छुपाने के लिए उपराष्ट्रपति की जाट जाति का अपमान भी। और सरकार के दोहरे चरित्र की पारदर्शी कार्य प्रणाली पर कोई शिकायत का अवसर जनता को नहीं मिलेगा…

——————————-(त्रिलोकीनाथ )——————————–


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