
लोकसभा चुनाव के चलते बृजभूषण ने लिया संन्यास ले लिया। किसी नैतिकता के चलते यह कार्य नहीं किया गया है इसे भी बृजभूषण ने साबित किया है।खिलाड़ियों ने राजनीतिज्ञों को अंततः परास्त कर दिया। चाहे लालच लोकसभा का चुनाव जीतने का हो या भाजपा की आने वाले राम मंदिर लोकार्पण अथवा अन्य इवेंट कारी मुद्दों का हो…; पर कड़वी सच्चाई संविधान परक दिखने की अंततः साबित हो गई। और पिछले एक साल से अपनी जमीर की लड़ाई लड़ रहे भारतीय पहलवानों को पहली बार उनका दबदबा दिख रहा है। और कारण कुश्ती संघ में चुनाव जीतने वाले संजय सिंह के नाम पर अपने घर के सामने पोस्टर लगाने वाले की दबदबा कायम है, दबदबा कायम रहेगा, भगवान की ऐसी ही मर्जी है।
इसे लोकतंत्र ने फिलहाल धता बता दिया है और खिलाड़ियों का दबदबा कायम है। फिलहाल यह साबित कर दिया है।
भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह ने रविवार को यहां कहा कि उनका अब इस खेल से कोई लेना-देना नहीं है क्योंकि उनके पास कई अन्य जिम्मेदारियां हैं जिनमें अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव भी शामिल हैं. उन्होंने कहा कि मैं अब कुश्ती से संन्यास ले रहा हूं.
भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह ने रविवार को यहां कहा कि उनका अब इस खेल से कोई लेना-देना नहीं है क्योंकि उनके पास कई अन्य जिम्मेदारियां हैं जिनमें अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव भी शामिल हैं. उन्होंने कहा कि मैं अब कुश्ती से संन्यास ले रहा हूं.बृजभूषण ने BJP के अध्यक्ष जेपी नड्डा से मिलने के बाद यह टिप्पणी की.
इससे पहले खेल मंत्रालय ने WFI को अगले आदेश तक निलंबित कर दिया था. WFI के निलंबन का आधार ‘उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना और खिलाड़ियों को तैयारी के लिए नोटिस दिए बिना’ अंडर-15 और अंडर-20 राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के आयोजन की ‘जल्दबाजी में की गई घोषणा’ बताया गया है.

