
नई दिल्ली, 11 जनवरी। जब सैकड़ो सांसद भारतीय संसद से निलंबित कर दिए गए थे संसद के अंदर नए कानून को मंजूरी दी गई थी इस कानून की एक बानगी हमें 2 दिन ड्राइवर के हंगामा से देखने को मिली थी ,जिसमें पूरा प्रशासन हक्का-बक्का रह गया था .इन कानून को आम जनता में अभी पूरी तरह से प्रकाशित नहीं किया गया है आईए देखते हैं कि इस कानून में कहां, किस प्रकार से,कैसे भारी मात्रा में बदलाव किया गया है..अखबार दैनिक जनसत्ता ने इस पर प्रकाश डाला हैअखबार के अनुसार भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा कानून और भारतीय साक्ष्य अधिनियम को राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद इन कानून को देश में लागू कर दिया गया है।
गृह मंत्रालय के मुताबिक इन कानूनों से संबंधित किताबें छपकर तैयार हैं और जल्द ही इनकी पढ़ाई देश के कालेजों में की जाएगी। कानून विभाग के रजिस्ट्रार को गृह सचिव की तरफ से एक पत्र भी भेजा गया है। संभावना जताई जा रही है कि इन कानूनों के आधार पर जल्द ही शिक्षण व प्रशिक्षण कार्य शुरू हो जाएगा। गृह मंत्रालय ने शिक्षा मंत्रालय को पुराने कानूनों का इतिहास समझाने के लिए इस कानून की पढ़ाई में एक हिस्सा रखने के दिशा निर्देश दिए गए हैं ताकि नए पुराने कानून की तकनीकी बारीकियां और उससे होने वाली परेशानियां जानकारी में रहे।
भारतीय न्याय संहिता 358 धाराएं हैं व 20 नए अपराधों को जोड़ा गया है| 33 अपराधों में जेल की सजा को बढ़ाया गया है 83 अपराधों में जुर्माने की राशि बढ़ाई गई है। 23 अपराधों में अनिवार्य न्यूनतम सजा का प्रावधान ,19 धाराओं को नए कानून में निरस्त किया गया है
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता सीआरपीसी में कुल 484 धाराएं थे, अब 531 धारा हैं कुल 177 प्रावधानों प्रावधानों में बदलाव किया है। नौ नए सेक्शन और 39 नए सब सेक्शन जोड़े गए हैं 44 नए प्रावधान को जोड़े, 14 धाराएं निरस्त की गई 35 जगहों पर वीडियो की धाराओं को जोड़ा गया है
भारतीय साक्ष्य अधिनियम नए अधिनियम में अब कुल 167 की जगह पर 170 धाराएं होंगी कुल 24 धाराओं में बदलाव किया गया है। 2 नई धाराएं और 6 उप चाराएं जोड़ी गई हैं 6 धाराएं इस अधिनियम के तहत निरस्त की गई हैं
केंद्र सरकार ने भारतीय दंड संहिता 1860 की जगह भारतीय न्याय संहिता, दंड प्रक्रिया संहिता 1898 की जगह भारतीय नागरिक सुरक्षा और इंडियन एविडेंस एक्ट (1972) की जगह भारतीय साक्ष्य अधिनियम तैयार हैं। इन कानूनों को लोकसभा ने 19 व 20 दिसंबर 2023 और राज्यसभा ने 21 दिसंबर 2023 को ध्वनिमत से पारित किया था। इसके बाद 25 दिसंबर 2023 को राष्ट्रपति की मंजूरी इन कानूनों को दी गई थी। केंद्र सरकार का दावा है कि इन कानूनों को लाने का मकसद निष्पक्ष, समयबद्ध और त्वरित गति से न्याय दिलाना है।
वर्ष 2019 में शुरू की गई थी नए कानून लाने की प्रक्रिया गृह मंत्रालय के मुताबिक देश में इन पुराने कानूनों को बदलने की प्रक्रिया वर्ष 2019 से चल रही है। इन कानून पर गृह मंत्री ने सभी देश के राज्यपालों, उपराज्यपालों, मुख्यमंत्रियों और प्रशासकों को पत्र लिखकर राय ली थी और इसके बाद जनवरी 2020 से भारत के प्रधान न्यायधीश, हाई कोर्ट के मुख्य न्यायधीश, बार काउंसिल और विधि विश्वविद्यालयों से चर्चा की और सांसदों से भी इस पर सुझाव मांगे थे। इन कानून पर कुल 3200 सुझाव प्राप्त हुए थे, इनमें 18 राज्य, छह संघ शासित प्रदेशों, 27 न्यायिक अकादमियों से सुझाव मिले थे।

