
शहडोल में मेडिकल कॉलेज बनने के बाद मरीज के प्रति जो संवेदना की लहर पैदा होनी चाहिए थी उसकी जगह एक ऐसी लूट की लहर पैदा हो गई है जिससे अस्पतालों में मानवता अलविदा होती दिखाई दे रही है…. इसकी शुरुआत दुर्घटना-बस ही सही मेडिकल कॉलेज से ही प्रारंभ हुई थी, जब करीब 25-30 30 व्यक्ति कोरोना के कार्यकाल में एक रात में ही ऑक्सीजन की कमी से मर गए और मेडिकल कॉलेज के प्रबंधन ने उसे छुपाने में सफलता प्राप्त कर ली.. क्योंकि तब कलेक्टर ने बिना जांच के ही कुछ घंटे के अंदर ही उस हत्याकांड को क्लीन चिट दे दी थी। इसके बाद मरीजों की मौत तक अथवा उनका शोषण एक परंपरा सी बन गई है। मरीज को प्रताड़ित करना उन्हें डॉक्टरी पेसे से भयभीत करना लगभग हर अस्पतालों में आम आदमी की लूट का जरिया बन गया है। अब इसकी एक नया उदाहरण जिला अस्पताल के परिसर से चर्चित हो रहा है… कलेक्टर शहडोल की ओर से इस पर किस प्रकार की पारदर्शी कार्यवाही होती है यह भी देखने लायक होगा…? क्योंकि जब भी मरीज के शोषण और लूट का मामला अखबारों के जरिए चर्चित होता रहा है तो प्रशासन का जनसंपर्क विभाग के जरिए उसका खंडन जिसे अस्पताल का स्पष्टीकरण कहा जाता है,अब तक अस्पताल प्रबंधन करता रहा है। ताकि एक दिखाने की पारदर्शिता बनी रहे। लेकिन वास्तव में इस शोषणकारी व्यवस्था को इस स्तर पर संरक्षण मिल गया कि अब यह मायने नहीं रखता की कौन व्यक्ति, सांसद या विधायक के निज सेवा क्षेत्र का व्यक्ति है अथवा यह मान लिया गया है की विधायक और सांसद भी एक मामूली से आम आदिवासी आदमी है इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता इसलिए उनका भी शोषण किया जा सकता है…? इसलिए यह खबर चर्चा में जरूर आई है किंतु यह कोई नई बात नहीं है।तो क्या पांचवी अनुसूची में शामिल शहडोल आदिवासी विशेष क्षेत्र लूट और शोषण का साम्राज्य बन चुका है…? देखते हैं कल मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव शहडोल आते हैं तो उनकी जानकारी में अगर यह बात आती है तो उनका क्या एक्शन होता है…?
फिलहाल खबर यह है….एक अखबार में प्रकाशित समाचार के अनुसार.दरअसल एक मामला सामने आया है, जिसमें पूर्व राजस्व मंत्रीऔर विधायक जय सिंह विधायक जैतपुर के वाहन चालक शिवा यादव से ऑपरेशन के नाम पर एक डॉक्टर ने 4000 रुपए ले लिए। वहीं जब इस बात की जानकारी विधायक को लगी तो वह अस्पताल पहुंचकर सिविल सर्जन को मामले से अवगत कराया, जिसके बाद मामला तूल पकड़ते देख चिकित्सक ने पैसे वापस करने की बात कही है। जानकारी में बताया गया कि विधायक के वाहन चालक से डॉक्टर 5000 रुपए की मांग की थी, जिसके एवज में चालक ने 4000 रुपए दे दिया। हालांकि चिकित्सक ने पैसा वापस किया या नहीं इस बात की जानकारी अस्पताल प्रबंधन ने नहीं दी है। बताया जाता है कि पैसा लेने वाला चिकित्सक एक सेवानिवृत चिकित्सा अधिकारी का बेटा है, जिसके कारण प्रबंधन उसे पर ठोस कार्रवाई करने में कतरा रहा है।
सूत्रों की माने तो जिला चिकित्सालय में विधायक के वाहन चालक से पैसा लेने का यह कोई पहला मामला नहीं है, इसके पहले एक शिक्षक से पेट में पथरी के ऑपरेशन के लिए जिला अस्पताल के एक डॉक्टर ने 15000 रुपये लेकर ऑपरेशन किया था। इस तरह अस्पताल में पूर्व में भी ऐसे कई मामले आ चुके हैं।
डॉक्टर हर्निया, हाइड्रोसील, पथरी, के अलावा अन्य सर्जरी के नाम पर मरीज से मोटी रकम लेने के बाद ऑपरेशन करते हैं। प्रबंधन को कई बार इसकी शिकायत भी की जा चुकी है, लेकिन अब तक पैसों के इस खेल में प्रबंधन अंकुश नहीं लगा पा रहा है। जिसका नतीजा अब यह हुआ कि डॉक्टर के हौसले इतने बुलंद हो गए की विधायक के वाहन चालक से भी ऑपरेशन के नाम पर पैसा ले लिया। इसे यह सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि जब जिला चिकित्सालय में पदस्थ डॉक्टर विधायक के वाहन चालक से पैसा ले सकते हैं तो अन्य मरीजों से ऑपरेशन के नाम पर कितने पैसे वसूलते होंगे। फिलहाल सिविल सर्जन डॉक्टर जीएस परिहार का कहना है कि मामला सामने आया है, मामले की जांच कराई जा रही

