“प्रत्यक्षम् किम् प्रमाणम्” ( त्रिलोकी नाथ) // राम के दरबार में सिर्फ प्रधानमंत्री…, तो हे राम के दरबार में सब ने लगाई हाजरी…

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रामलला की 5 साल के 'बाल स्वरूप' की मूर्ति ही क्यों स्थापित की गई? जानिए  इसके पीछे की खास वजह - ram lalla s idol-mobile   22 जनवरी को भारत के प्रधानमंत्री ने अयोध्या में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद राम जन्मभूमि स्थल में पूर्व से प्राण प्रतिष्ठित श्रीरामलला विराजमान विग्रह के पीछे एक बड़ी मूर्ति राघव सरकार की प्राण प्रतिष्ठित किया और इसे अरबो रुपए का इवेंट बनाकर प्रधानमंत्री ने राम मंदिर परिसर से ही आजाद भारत के बाद पहली बार लोकतांत्रिक भाषण किया। मुख्यमंत्री योगी नाथ ने अयोध्या की इस इवेंट को रामराज्य की स्थापना का दर्जा दिया तो इस मंदिर ट्रस्ट के सचिव चंपत राय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को “विष्णु की अवतार” होने की घोषणा की. किंतु इस अंतरराष्ट्रीय स्तर के वृहद कार्यक्रम में राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति ने हाजिरी लगाना उचित नहीं समझा…30 जनवरी को नई दिल्ली के गांधी के स्मारक जहां पर “हे राम..” लिखा है सभी लोकतंत्र के पीठाधीश राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री आदि इत्यादि लोगों ने अपनी हाजिरी लगाई …‌।जिससे यह तो साबित हुआ अयोध्या के लोकतंत्र के राम से उनका नाम “हे राम…” अभी भी आस्था का महासमुद्र है। बावजूद जिस विचारधारा ने महात्मा गांधी की हत्या करने की लिए गोडसे को प्रेरित किया उसी विचारधारा के अनुगामी लोग गांधी के सामने श्रद्धांजलि देने को विवस हैं। यानी स़विधान जिंदा है……।

————————-( त्रिलोकी नाथ)——————————–

आजाद भारत के भारतीय संविधान के 75 वर्ष पूरे होने पर और भी कई घटनाएं 10 दिनों में घट गई। सब कुछ पारदर्शी रहा। और इसे स्वीकृत बताने के लिए की कानून संबंध बनाने की घोषणा भी पारदर्शी तरीके से की गई । आज के समाचार पत्रों में इसका विवरण आया है ।
भ्रष्टाचार के सूचकांक को दर्शाने वाले ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की रिपोर्ट में 2023 में भी भारत दुनिया के 180 देशों में 93 स्थान पर बना हुआ है।
22 फरवरी राम मंदिर के जरिए राम राज्य की स्थापना कर अगले चुनाव में 400 पार को मोहर लगाया जा रहा था ठीक उसके दूसरे दिन कर्पूरी ठाकुर: सीएम बने, अंग्रेजी हटाया, आरक्षण लाया, फिर अप्रासंगिक हो गयेफटे कपड़े पहन कर बिहार में शासन करने वाले तत्कालीन समाजवादी नेता मुख्यमंत्री रहे कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न देने की घोषणा की गई। यह अमृतकाल में विरोधाभासी विचारों का संगम बन गया। जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लगभग हर दिन नए महंगे कपड़े पहनकर लोकतंत्र चलाने वाले व्यक्ति के द्वारा फटे कुर्ते पहनकर लोकतंत्र चलाने वाले मुख्यमंत्री को सम्मान देने की मजबूरी का प्रमाण पत्र रहा।
यह अलग बात है की कर्पूरी ठाकुर को विचार देने वाले डॉ राम मनोहर लोहिया को भारत रत्न देने पर विचार तक नहीं किया गया …?
इसका परिणाम यह रहा की बिहार के मिस्टर क्लीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इसी 10 दिन में फिर से पलटी मारते हुए लालू यादव की गठबंधन सरकार से इस्तीफा देते हुए भाजपा के गठबंधन के साथ नवमी बार “चट मंगनी- पट-ब्याह” के तर्ज पर मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इसी बिहार की धरती में कभी उपन्यासकार फणीश्वर नाथ रेणु ने 63 वर्ष पहले “पलटू बाबू रोड” का चरित्र चिंतन किया था यह पुस्तक 1979 में प्रकाशित हुई थी।इस उपन्यास में रेणु अपने गाँव-इलाक़े को छोड़कर बैरगाछी क़स्बे को कथाभूमि बनाते हैं। इस क़स्बे की नियति पल्टू बाबू जैसे काइयाँ, धूर्त, कामुक बूढ़े के हाथ में है। उसने क़स्बे के लिए ऐसी राह निर्मित की है जिस पर राजनीतिज्ञ, ठेकेदार, व्यापारी, वकील (पूरे क़स्बे के लोग ही) चल रहे हैं। लगता है, क़स्बावासी शतरंज के मोहरे हैं और पल्टू बाबू इनके संचालक।इस उपन्यास का लक्ष्य है उच्च वर्ग के अंतर्विरोधों, उसकी गिरावट, राजनीतिक और आर्थिक सम्‍बन्‍धों में यौन-व्यापार आदि का चित्रण। निम्न वर्ग छिटपुट आया है। आदर्शवादी पात्र विडम्बना से घिरे हैं।

यह अलग बात है की कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न देने के आभामंडल के पीछे पारदर्शी तरीके से बिहार की राजनीतिज्ञों पर भ्रष्टाचार पर काम करने वाली संस्था ईडी के माध्यम से पक्षपात तरीके से लालू यादव के परिवार और नीतीश कुमार के समर्थकों के ऊपर छापेमारी की गई और राजनीतिक पहलू बदलने के लिए दबाव बनाया गया।

यानी अयोध्या के लोकतंत्र के स्थापित राम का भरोसा, भाजपा को चुनाव जीतने की गारंटी… मोदी के गारंटी के नारे के सामने खोखला पड़ गया.. और उन्हें भारत रत्न के सहारे बिहार की धरती से कर्पूरी ठाकुर को लोकप्रियता का सहारा ढूंढना पड़ा…दिखाने के लिए ही सही लेकिन यह सर्कस करना पड़ा ताकि इसकी विश्वसनीय बनी रहे..
राहुल गांधी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा 28 जनवरी से होगी फिर शुरू - Live  Times News-Hindi News, Latest and Breaking News in Hindi    इसी 10 दिन में कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी को अपनी “भारत जोड़ो न्याय यात्रा” में अपने ही पार्टी के जन्मे राजनीतिक व्यक्ति भाजपा से असम के मुख्यमंत्री हेमंत विश्व शरमा के कार्टून-गिरी में उलझन पड़ा… और असम में कानून तोड़ने के लिए मुख्यमंत्री के इशारे पर पुलिस प्रकरण के आरोपी के रूप में रूप में दर्ज होना पड़ा।
यानी पारदर्शी तरीके से अयोध्या में “शंकराचार्य मुक्त उपस्थिति वाले” मंदिर में गर्भ-गृह पर दो विग्रह स्थापित प्रधानमंत्री ने कर दिए, वह विधि विरुद्ध था या नहीं…? यह विवादित है , लेकिन असम में राहुल गांधी की यात्रा से घबराए मुख्यमंत्री हेमंत ने उनके दो अवतार बस के अंदर घोषित कर दिए… मुख्यमंत्री का कहना था एक राहुल गांधी जो बस की सीट पर बैठता है वह अलग है और जो बस में अंदर आराम करता है वह अलग है। यानी राहुल के दो अवतार उन्होंने घोषित कर दिया। यह लोकतंत्र में थे दिखने वाला चमत्कार था।

इसी 10 दिन में राजनीति का एक और पारदर्शी चमत्कार भारत की सर्वाधिक व्यवस्थित पंजाब और हरियाणा राज्य की राजधानी चंडीगढ़ में नगर निगम पर मेयर चुने की प्रक्रिया में भाजपा का मेयर मनोज सोनकर को को जीत घोषित किया गया।INDI गठबंधन का पहला चुनाव हार गया, बीजेपी के मनोज सोनकर AAP-कांग्रेस के  उम्मीदवार को हराकर चंडीगढ़ के मेयर बने भ्रष्टाचार को बहुत ही पारदर्शी तरीके से कांग्रेस और आप की 20 मतों में से 8 मत निरस्त कर दिए गए और 16 मत की जीत दिखा करके पारदर्शी भ्रष्टाचार को स्वीकृति दिलाई गई। कहा जाता है चंडीगढ़ नगर निगम में 35 सदस्यों में से भाजपा के 14 पार्षद हैं जबकि 20 पार्षद में 13 आप के और 7 कांग्रेस के पार्षद पक्ष में होने के बावजूद भी विपक्ष के आठ मतों को निरस्त कर दिया गया। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इस घटना को “दिनदहाड़े हुई धोखा धड़ी” का दर्जा दिया है। वह न्याय पाने के लिए अब न्यायालय में गए हैं।
बहरहाल 22 जनवरी को अयोध्या में “लोकतंत्र के राम राज्य” की स्थापना की घोषणा के बाद दिल्ली में गांधी स्मारक में “हे राम..” तक श्रद्धांजलि देने की यात्रा के दौरान लोकतंत्र पारदर्शी तरीके से हर प्रक्रिया को अपनाकर अनैतिकता और मर्यादाहीन राजनीति की सार्वजनिक लोकप्रियता को स्वीकृत दिलाता हुआ नजर आया।

यही भारतीय वर्तमान लोकतंत्र की लोकप्रियता की गारंटी की गारंटी है। और इसी की गारंटी पर प्रश्न चिन्ह उठाते हुए विपक्ष के राजनीतिक नेताओं ने भारतीय निर्वाचन आयोग की कार्य प्रणाली पर गंभीर आरोप लगा दिए हैं। और उसकी निष्पक्षता को गौरवपूर्ण तरीके से चिन्हित करने का काम किया है। कांग्रेस और शिवसेना के नेताओं ने निर्वाचन आयोग को पत्र लिखकर कहा है की इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन ( ईवीएम) बनाने वाली भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड( बेल ) के बोर्ड मेंबर्स में चार लोग जो भारतीय जनता पार्टी से संबंधित हैं, उन्हें निदेशक पद से हटाया जाए, क्योंकि ऐसा होने से चुनाव की पवित्रता की रक्षा कौन करेगा। कृपया लोकतंत्र को बचाइए…। उन्होंने कहा है क्या आप जानते हैं कि बेल में चार स्वतंत्र निदेशक हैं जो भाजपा के नामित व्यक्ति हैं और कुछ भाजपा के पदाधिकारी भी हैं ..?
इस तरह “22 जनवरी के अयोध्या के राम, से महात्मा गांधी की समाज स्थल के “हे राम, तक..” की यात्रा के दसवें दिन में सुप्रीम कोर्ट ने वर्तमान राजनीतिक माहौल की परिपेक्ष में रोचक टिप्पणी की है उन्होंने एक राजनीतिक टिप्पणीकार की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि नेताओं को “मोटी चमड़ी वाला” होना चाहिए अर्थात लोगों की टिप्पणी से न प्रभावित रहने वाला होना चाहिए…. यह भी पारदर्शी न्याय की प्रक्रिया प्रणाली में राम राज्य को स्थापित करता प्रतीत होता है यही वर्तमान लोकतंत्र का कड़वा सच है जो प्रत्यक्ष है और प्रमाणित है… यानी यही वर्तमान का प्रत्यक्षम् किम् प्रमाणम् है…..


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