
नई दिल्ली. किसान आंदोलन की वजह से वकीलों की आवाजाही में हो रही दिक्कत का मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने संज्ञान में ले लिया है. मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने इस मामले पर संज्ञान लेते हुए कहा कि अगर किसी भी वकील को आवाजाही की वजह से दिक्कत हो रही है तो हम उस हिसाब से समय में बदलाव करेंगे.
सीजेआई चंद्रचूड़ और जस्टिस जेबी पारदीवाला एवं जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच ने दिन की कार्यवाही की शुरुआत में वकीलों से कहा कि अगर किसी को ट्रैफिक जाम के कारण कोई समस्या होती है, तो ‘हम समायोजन कर लेंगे.’
सुप्रीम कोर्ट ने आज अपने दूसरे एक अहम फैसले में बहुचर्चित पारदर्शी तरीके से राजनीतिक पार्टियों को गुप्त रुप से फंडिंग (पैसा चंदा देने वाली)करने वाले सरकारी योजना इलेक्ट्रॉल बांड पर रोक लगा दी है और एसबीआई को निर्देश दिया है कि वह इलेक्ट्रॉल बांड से संबंधित सभी जानकारी तत्काल वेबसाइट पर डालें । सुप्रीम कोर्ट का मानना है की नागरिकों की जानकारी के अधिकार यानी सूचना की गारंटी को इस तरह के इलेक्ट्रोल बांड के जरिए रद्द नहीं किया जा सकता, जनता को यह जानने का हक है कि वास्तव में कौन उद्योगपति अथवा नागरिक किसी राजनीतिक पार्टी को कितना चंदा दे रहा है फिलहाल तत्काल इस योजना पर रोक लगाने का निर्देश दिया है
राजनीतिक दलों को गुमनाम रूप चंदा देने की अनुमति देने वाली इलेक्टोरल बॉन्ड या चुनावी बॉन्ड योजना की कानूनी वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट आज फैसलासुनाया. इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने पिछले साल 31 अक्तूबर से नियमित सुनवाई शुरू की थी. कोर्ट ने तीन दिन लगातार इस मामले पर सुनवाई की. मामले की सुनवाई प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पांच-सदस्यीय संविधान पीठ ने की. इस संविधान पीठ में सीजेआई के साथ जस्टिस संजीव खन्ना, जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा थे. सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ओर से दलीलें दी गईं. कोर्ट ने 31 अक्टूबर से2 नवंबर तक सभी पक्षों को गंभीरता से सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था. पहले सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि चुनावी बॉन्ड योजना के साथ एक दिक्कत ये है कि यह चयनात्मक गुमनामी और चयनात्मक गोपनीयता प्रदान करती है. इसकी जानकारी स्टेट बैंक के पास उपलब्ध रहती है औरउन तक कानून प्रवर्तन एजेंसियां भी पहुंच सकती हैं.

