
अगर अखबारों की माने तो बुधवार 21 फरवरी का दिन भारतीय लोकतंत्र के लिए रोमांच और एक्शन से भरपूर रहा । एक तरफ जहां पंजाब-हरियाणा बॉर्डर में किसाने की हजारों लोगों की रैली पर राष्ट्रवादी भाजपा की डबल इंजन की सरकार ने दिल्ली जाने से रोकने के लिए आंसू-गैस-बम के गोले से हमला कर दिया दुर्भाग्य से बम ऐसा फटा जैसे दुश्मन राष्ट्र के नागरिकों की हत्या के लिए गया था… यह अलग बात है कि एक्सीडेंटल हुए इस बम कांड में एक युवा किसान की हत्या हो गई। और पुलिस की माने तो 12 जवान घायल हो गए
——————-(त्रिलोकीनाथ)——————-
तो दूसरी ओर विपक्षी पार्टी की पश्चिम बंगाल सरकार में कार्यरत एक सिख को ड्यूटी में पदस्थ आईपीएस ऑफिसर जसप्रीत सिंह को भारतीय जनता पार्टी के सदन की विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी द्वारा खालिस्तानी बोले जाने पर पश्चिम बंगाल में पूरा सिख समुदाय उग्र हो गया और राष्ट्रवादी भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ प्रदर्शन किया और यह कहा कि इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री और गृहमंत्री को माफी मांगनी चाहिए। जबकि मंगलवार को संदेशखाली में भाजपा का विरोध जुलूस के दौरान सुरक्षा इंतजाम देख रहे आईपीएस अधिकारी जसप्रीत सिंह ने शुभेंदु अधिकारी की खालिस्तान वाली टिप्पणी के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं से सवाल किया था कि “सिर्फ इसलिए कि मैं पगड़ी पहनी है आप लोग मुझे खालिस्तानी कह रहे हैं.. क्या आपने यही सीखा है… आपको शर्म आनी चाहिए…?”इस आशय का रिपोर्ट जनसत्ता ने किया है।
तो बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की उपस्थिति में नीतीश मुर्दाबाद के नारे लगाए जाने पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बेचैन हो गए जो इस समय भाजपा के गठबंधन की सरकार के साथ सत्ता पर पदस्थ हैं।
भारतीय लोकतंत्र को एक फिल्म नाटक नौटंकी की तरह देखने पर सबसे ज्यादा रोमांचक स्थिति और बयानबाजी भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने डबल इंजन सरकार को धमकी दे डाली और अपने अंदाज में उन्होंने कहा कि “केंद्र व हरियाणा की सरकार किसानों को दिल्ली नहीं जाने दे रही है मगर उन्हें यह नहीं भूलना चाहिए कि चुनाव के वक्त किसी भी भाजपा नेताओं को गांव में प्रवेश नहीं करने देंगे… वह मेरठ में प्रदर्शन कर रहे किसानों के समर्थन में प्रदर्शन कर रहे थे यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा किसानों को रोकने के लिए सरकार ने रास्ते पर किले बिछाए जाने की आलोचना की उन्होंने कहा…” किले बिछाना किसी भी स्थिति में उचित नहीं है वे अगर हमारे लिए कीलें लगाएंगे तो हम भी गांव में कीलें लगा देंगे, हमें भी अपने भी गांव की बेरीकेटिंग करनी होगी। टिकैत ने यह भी कहा कि, अगर वे दिल्ली नहीं आने दे रहे हैं तो चुनाव में हम भी उनका गांव नहीं आने देंगे आंदोलन को कुचलना का काम करेंगे तो उन्हें गांव कौन आने देगा..? भारतीय किसान यूनियन प्रवक्ता ने कहा भाजपा सरकार को उद्योगपतियों की सरकार है यह किसानों की सरकार होती तो एमएसपी की गारंटी देने का कानून कब का बना चुकी होती,….?
आंदोलन को देखते हुए किसानों को लालच देते हुए केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने बयान जारी किया यह गन्ना का मूल्य ₹25 बढ़कर 340 रुपए कर दिया गया है उसकी मंजूरी की गई है।
तो देश की राजनीति में भी उथल-पुथल के संदेश हैं कांग्रेस की प्रियंका गांधी ने अंतत उत्तर प्रदेश की समाजवादी नेता के साथ समझौता करके इंडिया गठबंधन को फिर से मजबूत करने का काम किया है। जबकि फिल्म स्टार कमल हसन ने दक्षिण भारत की राजनीति में एक संदेश दिया कि मैं विपक्षी गठबंधन में अभी शामिल नहीं हुआ हूं।
इस तरह बुधवार को भारत की राजनीति अपने ग्लैमर से भरी रही सिर्फ एक फिल्म और नाटक नौटंकी की तरह जिसमें लोकहित का कोई निर्णायक सकारात्मक कदम उठाता नहीं दिखा.. यह अलग बात है कि कृषि मंत्री अर्जुन मुंडा ने किसानों पर जाल फेंका है की पांचवी वार्ता किसानों से की जाएगी…
किंतु सबसे ज्यादा दुखद दिन का वह घाव रहा जो कभी प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी की हत्या के बाद बुरी तरह से सिखों के खिलाफ “खालिस्तानी “ शब्द से फैल गया था जिसे भारतीय जनता पार्टी के सुवेंदु अधिकारी ने जिस तरह से उपयोग किया उस फिल्म “तमस” की वह सीन याद आ गई जिसमें मुसलमान की मस्जिद में कुछ हिंदू सूअर का मांस फेंकते थे ,तो मुसलमान और मंदिरों में अपवित्र करने की घटनाओं को अंजाम देते थे…
अमृत काल में एक सिख को भाजपा नेता के द्वारा खालिस्तान कहा जाना कुछ इसी प्रकार की बेहद निंदनीय हरकत है। यह अलग बात है कि अब भाजपा नेता ऐसे बयान न कहे जाने पर अपनी बात बोल रहे हैं यह उससे भी अलग बात है की खालिस्तानी कहकर राष्ट्रभक्ति पर प्रश्न उठाने पर पश्चिम बंगाल का सिख समुदाय प्रदर्शन कर दिया है फिलहाल डबल इंजन की सरकार में घोषित तौर पर एक युवा किसान की हत्या पर किसी मुआवजा के घोषणा नहीं की है और इससे नए किसान आंदोलन में किसानों की हत्या की शुरुआत हो चुकी है… अब यह गिनती आगे ना बढ़े यही आशा करनी चाहिए… किंतु फिल्म अभी बाकी है अमृतकाल के राष्ट्रवादी लोकतंत्र की….

