
.यह सही है कि दिल्ली कैपिटल्स ने क्रिकेट के खेल में महिला प्रीमियर लीग में बाजी मार ली है और मुंबई इंडियंस को 29 रन से हराया है ।। यह तो खेल है खेल में ऐसा होता रहता है हमें यह देखना है कि पूंजीवादी व्यवस्था में जहां क्रिकेट के खिलाड़ी नीलामी के जरिए पूंजीपतियों द्वारा खरीदे जाते हैं। जहां उनकी व्यक्तिगत पहचान कम हो जाती है उनकी बोली लगती है उसे हार और जीत के बीच में हमारे खिलाड़ी अपना कितना रोमांचकारी प्रदर्शन अपनी योग्यता के साथ करते रहते हैं तो बताना उचित होगा।
की शहडोल जैसे दलित और आदिवासी क्षेत्र की लड़की पूजा वस्त्राकर मुंबई इंडियंस की तरफ से खेलते हुए अपनी सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी का प्रदर्शन किया और समाचार जगत में मुंबई इंडियंस की हार के बावजूद पूजा वस्त्राकर की उसके खेल की तारीफ कई बार छपी है। एक राष्ट्रीय समाचार पत्र लिखता है दिल्ली कैपिटल ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 29 रनों से अंततः मुंबई इंडियंस को हरा दिया और वह आगे यह भी लिखता है की मुंबई इंडियंस के लिए पूजा वस्त्राकर ने सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी की उन्होंने चार ओवर में 20 रन देकर एक विकेट भी लिया। अख़बार आगे यह भी लिखता है कि जब मुंबई इंडियंस के खिलाड़ियों ने नवमी ओवर में 68 रन तक पांच विकेट में दिए तब पूजा और अमनजोत कौर ने इसके बाद संभाल कर टीम के स्कोर को आगे बढ़ाने पर ध्यान दिया। पूजा ने 22 गेंद में 17 रन जहां तेजी से बनाने के लिए संघर्ष करते हुए मुंबई इंडियंस का पक्ष मजबूत किया।
इस तरह बहुत क्रिकेट को रुचि न होने के बावजूद भी शहडोल की निवासी होने के कारण अपनी पूजा वस्त्राकर की खेल के कारण हम क्रिकेट को थोड़ा बहुत समझते रहते हैं। और जब जीत हार होती है तो यह देखते हैं कि हमारे खिलाड़ी पूजा वस्त्राकर ने अपने खेल का प्रदर्शन किस स्तर का किया..? निश्चित तौर पर शहडोल की पूजा हार कर जीत गई। हमारे लिए यही खेल है क्योंकि इसी से खेल भावना को शहडोल में प्रेरणा मिलती है…..
अभी हाल में नागपुर में रणजी ट्रॉफी में शहडोल के हिमांशु मंत्री ने तारीफे काबिल अपने क्रिकेट खेल का प्रदर्शन किया था अब यह अलग बात है शहडोल के क्रिकेट के खिलाड़ी इसे क्या सीख पाते हैं।

