
शहडोल इन दिनों शहडोल जिले के आदिवासी विभाग में रामराज्य की कल्पना को आकर मिल रहा है। बताया जाता है इस राम-राज्य में सभी भ्रष्टाचारियों को पारदर्शी तरीके से सुख का भोग कर रहे हैं। और अधिकारी और कर्मचारी दोनों मिलकर दलित उत्थान के लिए नीति-गत तरीके से सरकारी कार्यों को अंजाम दे रहे हैं।
हाल की घटना में इस प्रकार के निर्देश आए की लंबित लोगों के प्रमोशन तत्काल किए जाएं और इसको गति देते हुए सहायक आदिवासी विभाग सिंन्हा जी ने एक ऐसा आदेश पारित किया जिससे लोगों को तथास्तु का सुख मिलने लगा। किंतु प्रमोशन में यह बात लगा दी गई कि जो जहां है वहीं पर पदोन्नति होकर सहायक के रूप में अपनी जोइनिंग दे।
बस फिर क्या था जो जहां था वहीं पर पदोन्नति हो गया पर इस लफड़े में समस्या वहां हो गई जहां पर पद ही नहीं थे। और लोग पदोन्नति होकर हवा में पद को महसूस करते हुए ज्वाइन कर लिए किंतु जो पद रिक्त हुए उन्हें अब वह कार्य करने में दवाब भी खत्म हो गया। जैसे छात्रावासों सहायक लिपिक के कोई पद नहीं होते किंतु पदोन्नति होकर लोगों ने ज्वाइन तो कर लिया, अब जाए कहां…?
इसलिए लौट के बुद्धू घर को आया के तर्ज पर वे सहायक आयुक्त कार्यालय पहुंचे, जहां पर संबंधित क्लर्क जो पूर्व में भ्रष्टाचार के लिए पदोन्नति होकर सस्पेंड हो चुका था अब वह अपनी योग्यता को दर्शाते हुए उसी जगह आ गया है जिस जगह से उसे सस्पेंड किया गया था।
परिणाम स्वरूप जो भी अपनी पदोन्नति की समस्या लेकर आता है उसे एक सम्मानजनक धनराशि के साथ जिसका बंटवारा उच्च अधिकारी तक कैसे होता है विवरण बताकर पदोन्नति के आदेश अप्रत्यक्ष रूप से विक्रय किया जा रहे हैं। और इस प्रकार जारी आदेश से “रेत में तेल” निकाला जा रहा है।
देखना होगा कि भ्रष्टाचार को कितनी पारदर्शी तरीके से नैतिक जामा पहनाकर कब तक अंजाम दिया जाएगा। फिलहाल जिन्हें पदोन्नति चाहिए वह सब सम्मानजनक भेंट देकर उसे प्राप्त कर सकते हैं।

