
“पैसा खुदा तो नहीं लेकिन खुदा से कम भी नहीं…” इस तर्ज में फिल्म इंडस्ट्री में कहा जा सकता है की हेमा मालिनी, अमिताभ बच्चन तो नहीं, लेकिन अमिताभ बच्चन से कम भी नहीं… इसलिए भी की हेमा मालिनी का मतलब ही है फिल्मी दुनिया यानी बॉलीवुड और हेमा मालिनी इसलिए महत्वपूर्ण हो जाती हैं क्योंकि वह 10 वर्ष से भारतीय जनता पार्टी के सांसद के रूप में मथुरा लोकसभा क्षेत्र से संसद सदस्य रहीं हैं और इस बार मथुरा लोकसभा क्षेत्र से भाजपा की उम्मीदवार भी है।
———————-(त्रिलोकी नाथ)————————-
मजे की बात यह है की हेमा मालिनी को लाभ इस बात का मिलता है कि वह कृष्ण की मीरा के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की थी इसलिए मथुरा वासी बृजवासी उन्हें चाहतेहैं…हाल में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनके चुनाव क्षेत्र में गए तो भी वह अदाकारा के रूप में कृष्ण की भक्ति के रूप में अपने को प्रस्तुत की थी यही उनका परिचय है कम से कम हेमा मालिनी तो यही सोचती है।इसके बावजूद इतना बड़ा ऊंट, जब आध्यात्मिक पहाड़ के नीचे से निकला तो उनका परिचय कंफर्म करने के लिए वर्तमान में वृंदावन के आध्यात्मिक ब्रह्मचारी राधा दासी बाबा प्रेमानंद के पार्षद ने उन्हीं यानी हेमा मालिनी से कंफर्म किया कि वे वर्तमान में सांसद हैं या नहीं है..?
यही पूरा जीवन फिल्मी दुनिया और वर्तमान भाजपा की राजनीति में अपना जीवन खत्म करने को तत्पर दुनिया की मशहूर अदाकारा का वास्तविक परिचय है। और चलते-चलते उन्हें बाबा प्रेमानंद ने यह सीख भी दिया कि वह लोगों के लिए समय निकालें क्योंकि वोट उन्हीं से मिलता है….।( इसका वीडियो को उनके यूट्यूब में जाकर देखा जा सकता है।)
आध्यात्म के वर्तमान भीष्म पितामह के रूप में उभरे बाबा प्रेमानंद को दुनिया में जरा भी आध्यात्मिक का परिचय रखने वाला कोई भी व्यक्ति सहज रूप से जानता होगा। खुद बाबा प्रेमानंद के अनुसार यह लाडली जीराधा जी का प्रताप है जो चल रहा है प्रेमानंद के रूप में। जितना लूटो तो लूट लो कब तक रहेगा कहां नहीं जा सकता ।
यानी बाबा प्रेमानंद पूर्ण जागृत व्यक्ति के रूप में ऐसे एकमात्र ब्रह्मचारी संत हैं जिनका मुकाबला दिखने वाले किसी भी संत के साथ नहीं हो सकता। उनकी विनम्रता, उनकी सरलता, उनकी सहजता और ब्रज के प्रति उनका समर्पण और उनकी आध्यात्मिक उन्नति का कोई मुकाबला नहीं है। उन्हें एक झलक देखने के लिए वृंदावन में रात को हजारों लोग की भीड़ खड़ी रहती है। क्योंकि वह साक्षात मानव जीवन का पूर्ण प्रतिबिंब है।
ऐसे शख्स से मिलने के लिए जब हेमा मालिनी अपने वोट मांगने की दौर में उसके पासपहुंची तब बाबाजी को भी नहीं मालूम था कि यह महिला कौन है..? समान रूप से वे मास्क लगाकर भीड़ में बैठी हुई थी। और पहली बार बाबा प्रेमानंद के यहां पहुंची थी। क्योंकि वृंदावन से हजारों किलोमीटर दूर उनके भाई चेन्नई में उनके यानी बाबा प्रेमानंद के मुरीद हो चुके थे। ऐसा खुद हेमा मालिनी ने बाबा जी से विनती करके आग्रह किया। शायद भाई के आग्रह में ही वे एक पंथ दो काज यानी यानी “वोट का वोट और दरबार का दरबार” के तौर तरीके से बाबा के दरबार सत्संग में आई थी।
दुनिया में अपने शोहरत ड्रीम गर्ल के रूप में स्थापित करने वाली हेमा मालिनी का परिचय जब बाबा प्रेमानंद के पार्षद ने उनसे कराया तो उसे पार्षद को भी नहीं मालूम था की हेमा मालिनी वर्तमान में सांसद है या नहीं है..? इसलिए उन्होंने हेमा मालिनी से कंफर्म भी किया कि वह सांसद हैं या नहीं है… तो हेमा मालिनी ने कहा कि फिलहाल वह प्रत्याशी है।
इसी को कहते हैं “ऊंट को पहाड़ के नीचे आ जाना..” कोई बड़ी बात नहीं है। आध्यात्मिक की दुनिया में हालात कुछ इस प्रकार के हैं की सदी का महानायक खुद अमिताभ बच्चन भी अगर बाबा के दरबार में पहुंचे तो शायद ही बाबा उन्हें पहचान पाए…? जब तक उनके पार्षद उन्हें अमिताभ बच्चन का परिचय नहीं देंगे.., वह अमिताभ बच्चन को नहीं जानेंगे…. …
और अध्यात्म की दुनिया में यह चमकता हुआ सितारा बाबा प्रेमानंद का उनके चमक के सामने सब के सब फीके हैं यह स्थापित भी होता दिखता है। पिछले दिनों राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत जब वहां पहुंचे थे तब उनका परिचय भी पार्षद ने ही प्रेमानंद जी को दिया था।
यह भारतीय परंपरा की विरासत का तेज है धर्म की ध्वजा है जहां सब अपरिचित है किंतु सब उनके अपने हैं। राजनीति का पाखंड नहीं, जहां नेताओं के शरण में साधु संत के नकाब में लोग अपनी रोटी सेंकते दिखते हैं …और यह तय नहीं हो पाता की “धर्म का पाखंड”, “राजनीति” को मूर्ख बना रहा है या धूर्त राजनीतिज्ञ नकाबपोश धार्मिक नेताओं को टूल्स की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं … ?बहरहाल बाबा प्रेमानंद का आध्यात्मिक का चमक इतना ही तेज है उनके धुंध में कोई कितने चमकदार व्यक्ति भी क्यों ना आ जाए उसे अपनी औकात का अंदाजा लग जाता है यही आध्यात्मिक चमक है। जय श्री राधे।

