
पटवारी प्रशन्न सिंह की हत्या के बाद अब शायद प्रशासनिक और पुलिस अमले को किसी नई हत्या का इंतजार है और इसीलिए व्यवहारी क्षेत्र में हत्यारी खनिज रेत की खदान को नए सिरे से चालू कर दिया गया है इसके लिए बकायदे रेत के जो प्राचीन पहाड़ हैं उनको पूरी तरह से काटकर रेत निकाल करके मैहर सतना व अन्य स्थानों पर स्मगलिंग की जा रही है क्योंकि यह क्षेत्र घड़ियाल अभयारण्य का क्षेत्र है जहां पर किसी भी प्रकार की कोई खनिज पट्टा स्वीकृत नहीं किया गया है ऐसी स्थिति में अगर यहां पर रेत निकालना है तो स्वाभाविक है बिना अभ्यारण के अधिकारियों, पुलिस और प्रशासन तथा स्थानीय नेताओं के संरक्षण के बिना यह यहां की रेत को नहीं निकाला जा सकता । रेत खदान के लिए बकायदे नदी पर करके एक कच्ची अस्थाई सड़क बनाई गई है जो शायद पहले तोड़ दी गई थी हालांकि इस मामले में शहडोल जिले के खनिज अधिकारी देवेंद्र पतले का कहना है कि इस प्रकार का कोई रेत का कारोबार शहडोल जिले में नहीं हो रहा है बल्कि यह जिले के बाहर की घटना हो सकती है, किंतु सूत्र बताते हैं कि यह पूरी तरह से शहडोल जिले की सीमा स्थित रेत की कालाबाजारी का पारदर्शी चित्रण है.
———–(त्रिलोकी नाथ )———–
यह बात भी सही है कि कलेक्टर शहडोल ने जब पटवारी की हत्या हो गई थी उसे वक्त घड़ियाल अभ्यारण अधिकारी, सीधी के साथ भी एक बैठक कर इस पर नियंत्रण करने का काम किया था इस पर इस बात में फोकस अवश्य रखना चाहिए की पूरी कथित तौर पर रेत जिले से निकाल कर मैहर,सतना जिला में पलटी होती है वहां से रेत के स्मगलर रातों-रात करोड़पति बनते हैं लेकिन क्योंकि यह घड़ियाल अभ्यारण क्षेत्र का मामला है जिसका मुख्यालय सीधी जिले में है इसलिए दोनों जिले के अधिकारियों को अभ्यारण क्षेत्र के मामले में काम करने में बेहद परेशानी जाती है.
जैसे वन क्षेत्र से रेत की स्मगलिंग का धंधा शहडोल की एक महिला रेंजर का वायरल ऑडियो सामने आया था जिसमें वह रेत के स्मगलर के साथ सौदेबाजी करती हैं कि किस प्रकार से वन क्षेत्र का रेत निकल जाए और खनिज विभाग या राजस्व अमला इस भ्रम में रहता है की वन क्षेत्र के लोग अपने कर्तव्यों का निर्वहन सही कर रहे हैं…? ठीक इसी प्रकार बड़का बहरा नाला घड़ियाल अभ्यारण क्षेत्र का मामला और भी पेचीदा है क्योंकि जिले की रेत सतना जिले में स्मगलिंग और सीधी जिले में घड़ियाल अभ्यारण का हेड क्वार्टर इसके क्षेत्र की रेत निकल जा रही है ऐसे में इस भ्रम का लाभ उठाकर स्मगलर पर्यावरण और पारिस्थितिकी को पूरी तरह से तोड़ने के लिए खुलेआम काम कर रहा है जो कि बिना स्थानीय नेताओं के संरक्षण के एक दिन नहीं चल सकता.. तो क्या राजनेता , प्रशासनिक अधिकारी और माफिया तंत्र मिलजुल कर घड़ियाल अभ्यारण क्षेत्र के रेत की तस्करी के कारोबार को संरक्षण दे रहे हैं, अन्यथा तत्काल अभ्यारण के अधिकारियों के साथ मिलकर इस रेत की कालाबाजारी और माफिया तंत्र पर कार्यवाही के लिए संयुक्त प्रयास किए जाने चाहिए. देखें आगे आगे होता है क्या फिलहाल “रेत की तस्करी का रामराज्य” व्यवहारी क्षेत्र में खूब फल फूल रहा है…? यह अलग बात है की सब कुछ पारदर्शी है यह भी अलग बात है कि इसमें क्षेत्रीय खनिज अधिकारियों वह कलेक्टर्स की भूमिका उतनी स्पष्ट नहीं दिखाई देती लेकिन जिम्मेदारी तो बनती ही है तो देखना है कैसे काम आगे बढ़ता है क्या इसकी योग्यता जो कलेक्टर पद पर अपनी धाक दिखाई है वह साबित हो पाएगी…? और रेत की तस्करी पर लगाम लगेगी..?
ज्ञातव्य है शहडोल जिले में टेंडर नहीं होने से रेत की निकासी पर प्रतिबंध था तो कैसे सरे आम रेत निकालते रहे..? तब कलेक्टर ने साफ कहा था की 17 डंपर रेत भर पकड़े गए थे यानी सैकड़ो की संख्या में प्रतिदिन डंपर निकल रहे थे तब कलेक्टर की माने तो ये क्षेत्र सीधी मुख्यालय वाला सोन घड़ियाल काक्षेत्र है जिसकी अपनी सुरक्षा व्यवस्था यानि सुरक्षा तंत्र भी है तो क्या सोन घड़ियाल से संबंधित सभी अधिकारी स्थापित माफिया तंत्र के लिए काम कर रहे थे ….?
इसकी जांच कौन करेगाऔर उससे ज्यादा गंभीर बात यह है की बाणसागर थाना का पुलिस अमला इस सोन घड़ियाल क्षेत्र के माफियातंत्र में आंख मूंदे रहता था…? अन्यथा कोई कारण नहीं की एक जवान ने इस माफिया गिरी से तंग आकर स्वयं बाणसागर में रिपोर्ट दिखाई तो उसकी रिपोर्टमात्र सूचना दर्ज करकेउसे सलाह दी गई कि वह माफिया के खिलाफ कोई कदम उठाने के पहले 100 बार सोच किंतु भारतीय सेना का जवान इस बात की शिकायत अपने अधिकारी से दिल्ली में किया और दिल्ली के अधिकारी ने सैनिक परिवार की सुरक्षा के लिए शहडोल प्रशासन को पत्र भी लिखा किंतु हो सकता है चुनाव की व्यस्तता के कारण उसे पत्र पर गंभीरता से कम ना किया गया हो..लेकिन बाणसागर थाना स्पष्ट तौर पर उस क्षेत्र में स्थापित माफिया तंत्र के लिए माफिया गिरी में शामिल था…….अगर उसने आई हुई शिकायतों में अब तक कोई कार्यवाही नहीं की तो जो स्थापित माफिया तंत्र है,इस तंत्र के संरक्षण के लिए पूरा लोकतंत्र अवैध कमाई का बंदरबांट करता रहा है जिसका परिणाम यह हुआ कि एक पटवारी की हत्या सरेआम हो गई …
आखिर उन सभी पहलुओं पर क्या श्वेत पत्र जारी नहीं होना चाहिए कि आखिर पटवारी की ड्यूटी रात ने बिना सुरक्षा के कैसे लगाई गई..एसडीएम ने इस बात पर गंभीरता से कार्यवाही क्यों नहीं की एसडीएम को मालूम था की माफिया तंत्र उस पटवारी कोकुछ नहीं करेगा आखिर किस बात के आश्वासन के चलते एसडीएम ने इतना जोखिम भरा काम पटवारी को अकेले करने दिया..? फिर पुलिस ने एसडीएम को साथ नहीं दिया….? कहीं ऐसी बातें इस घटना पर उभरती हैं.जिनसे स्थापित माफिया तंत्र के भंडाफोड़ होने की संभावना है…? हमारी टीम ने सुखाड क्षेत्र के पटवारी कल्याण सिंह से इस मामले में जानकारी जानना चाहा किंतु उन्होंने किसी भी प्रकार का जवाब नहीं दिया.. कहीं ऐसा ना हो की पटवारी जी अपने स्तर पर सिस्टम के हिस्सा हूं और उन्हें भी धोखा हो जाए…?

