
नयी दिल्ली: समाचार एजेंसी भाषा के अनुसार उच्चतम न्यायालय में बुधवार को एक याचिका दायर कर कोविशील्ड टीके के किसी भी संभावित दुष्प्रभाव और जोखिम कारकों की जांच के लिए शीर्ष अदालत के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की देखरेख में एक चिकित्सा विशेषज्ञ समिति गठित करने का अनुरोध किया गया।याचिका के अनुसार, ब्रिटेन मुख्यालय वाली दवा कंपनी ‘एस्ट्राजेनेका’ ने कहा है कि कोविड-19 के खिलाफ उसका टीका “बहुत दुर्लभ” मामलों में कम प्लेटलेट काउंट और रक्त के थक्के बनने का कारण बन सकता है। इस टीके को भारत में कोविशील्ड के रूप में लाइसेंस के तहत बनाया गया था।
भिंड (मप्र): समाचार एजेंसी भाषा के अनुसार कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने मंगलवार को कहा कि अगर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) केंद्र की सत्ता में लौटती है तो वह गरीबों, दलितों, आदिवासियों और ओबीसी को अधिकार देने वाले ‘‘संविधान को फाड़ कर फेंक देगी। उन्होंने संविधान की एक प्रति हाथ में लेते हुए कहा कि मौजूदा लोकसभा चुनाव कोई सामान्य चुनाव नहीं है, बल्कि दो विचारधाराओं के बीच की लड़ाई है। उन्होंने कहा कि आजादी और संविधान का मसौदा तैयार होने से पहले गरीबों, दलितों, आदिवासियों, पिछड़ों और किसानों के पास कोई अधिकार नहीं था और 1950 में कानून लागू होने पर उन्हें ये अधिकार दिए गए राहुल गांधी ने कहा, “संविधान गरीबों की आत्मा है और इसे कोई छू नहीं सकता। दुनिया की कोई ताकत इसे बदल नहीं सकती। कांग्रेस नेता ने दावा किया कि केंद्र में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार ने 22 से 25 लोगों के 16 लाख करोड़ रुपये के लोन माफ कर दिए हैं। यह राशि किसानों के 25 वर्षों तक लोन माफ करने और 24 वर्षों तक मनरेगा के तहत लाभ दिए जाने के लिए पर्याप्त थी। कहा, “लेकिन मैं पूछना चाहता हूं कि क्या किसानों, श्रमिकों, छोटे व्यापारियों का कर्ज माफ किया गया? एक गरीब व्यक्ति निजी अस्पताल में जाता है और कर्ज में डूब जाता है, लेकिन क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कभी कहा है कि वह गरीबों का कर्ज माफ कर देंगे?” राहुल ने कहा, “इन 22 लोगों (अरबपतियों) के पास 70 करोड़ भारतीयों के बराबर पैसा है। जब राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह का हुआ तो ये सभी लोग वहां बैठे थे। क्या आपने वहां कोई गरीब मजदूर या किसान देखा? बॉलीवुड अभिनेता, भारतीय क्रिकेट टीम के सदस्य वहां थे, लेकिन कोई गरीब, पिछड़ा, आदिवासी लोग वहां नहीं दिखे।”
आवश्यक रस्मों के बिना हिंदू विवाह वैध नहीं : उच्चतम न्यायालय
नयी दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि हिंदू विवाह ‘‘नाचने-गाने, खाने-पीने’’ या वाणिज्यिक लेनदेन का अवसर नहीं है और वैध रस्मों को पूरा किए बिना किसी शादी को हिंदू विवाह अधिनियम के तहत मान्यता नहीं दी जा सकती है।न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने कहा कि हिंदू विवाह एक संस्कार और पवित्र बंधन है जिसे भारतीय समाज में काफी महत्व दिया जाता है।
एक फैसले में, भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने भारतीय समाज के भीतर हिंदू विवाह की पवित्र प्रकृति को दोहराया है, इसे केवल उत्सव के बजाय एक संस्कार के रूप में उजागर किया है। यह स्पष्टीकरण तलाक के एक मामले के दौरान आया, जहां न्यायालय ने इस बात पर जोर दिया कि हिंदू विवाह को कानून के तहत वैध माने जाने के लिए उचित अनुष्ठानों और परंपराओं के साथ आयोजित किया जाना चाहिए।

