
शहडोल एडीजीपी शहडोल जोन डीसी सागर ने कहा कि हमें अपने अंदर छिपे गुणो को पहचाना चाहिए। सदैव उन पर काम करके उन्हें निखारना चाहिए। किसी कार्य को करने के लिए धैर्य होना बहुत जरूरी है, हमें धैर्य रखने के साथ-साथ सच बोलना भी अति आवश्यक है। उन्होंने कहा कि ऐसा कोई कार्य नहीं है जो इंसान नहीं कर सकता है। एडीजीपी डीसी सागर ने कहा कि किसी भी कार्य को करने से पहले उस तक पहुंचने के लिए लक्ष्य निर्धारित करें एवं डटकर पूरे मनोयोग से कार्य करें। उन्होनें कहा कि जब आप पूरे मनोयोग से कार्य करेंगे तो कोई वजह नहीं होती कि आप उसे करने में असफल होंगे। उन्होंने कहा कि इंसान को हमेशा एक दूसरे के भले के बारे में सोचना चाहिए। इंसान को अपनी गलतियों को भूलकर हमेशा अपने पथ पर आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने शिक्षकों से अपील करते हुए कहा कि शिक्षक पूरे समर्पण भाव से बच्चों को पढ़ाने का प्रयास करें, जिससे उन बच्चों के मां-बाप कभी भी यह सोचकर उदासीन ना हो कि उनके बच्चों को उच्च शिक्षा प्राप्त नहीं हुई। उन्होंने शिक्षकों से कहा कि आप अपने शिक्षक धर्म का पालन करते हुए बच्चों को गुणवत्ता युक्त शिक्षा प्रदान करने का कार्य करें एवं बच्चा जिस क्षेत्र में जाना चाहे, उस क्षेत्र में बच्चों को आगे बढ़ाने का प्रयास करें।
कलेक्टर शहडोल तरूण भटनागर ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि उन्मेष प्रशिक्षण में लेक्चर देकर समझाया ही नहीं गया बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में वर्षों से कार्य कर रहे अनुभवी लोगों से अनुभव लेकर प्रशिक्षण देेने का कार्य किया गया है। उन्होने शिक्षकों से कहा कि अपने कार्य क्षेत्र में जाकर शिक्षा को बेहतर बनाने का कार्य करें अपने कार्य क्षेत्र या स्कूलों में शिक्षा के लिए जो भी परिर्वतन कर सकते हैं उस पर पूरा प्रयास करें। कलेक्टर श्री तरूण भटनागर ने कहा कि इस उन्मेष प्रशिक्षण का पूरे शहडोल संभाग में एक अच्छा एवं अमूलचूक परिणाम देखने को मिलेगा।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कलेक्टर उमरिया धरणेन्द्र कुमार जैन ने कहा कि शिक्षक को समाज का सबसे सम्मानित एवं पूज्यनीय माना जाता है। उन्होनंे कहा कि इस प्रशिक्षण मतलब शिक्षक को शिक्षा देना नहीं है, सभी शिक्षक खुद अपने-अपने क्षेत्र में पारंगत हैं। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य शिक्षकों को उनके नैतिक मूल्यों को याद दिलाना है। इससे शिक्षक अपनी शिक्षा प्रणाली की गुणवत्ता में सुधार ला कर शिक्षा के क्षेत्र में एक नया परिवर्तन कर सकते हैं। उन्होनें कहा कि शिक्षक छात्रों को पढ़ाने के साथ-साथ छात्र की अभिरूचि की भी पहचान करें एवं छात्र को उसकी अभिरूचि के अनूरूप शिक्षा दे कर आगे बढ़ाने का प्रयास करें।

