
नयी दिल्ली: नौ जुलाईसमाचार एजेंसी भाषा के अनुसाररक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जम्मू-कश्मीर के कठुआ में आतंकवादी हमले में पांच जवानों की मौत पर मंगलवार को ‘गहरा दुख’ व्यक्त किया। वहीं, रक्षा सचिव गिरिधर अरमाने ने कहा कि कठुआ हमले में पांच जवानों की मौत का बदला लिया जाएगा और भारत इसके पीछे की बुरी ताकतों को हराएगा।सोमवार को कठुआ के बदनोटा इलाके में भारी हथियारों से लैस आतंकवादियों ने एक गश्ती दल पर घात लगाकर हमला किया था, जिसमें पांच जवान शहीद हो गए थे और कई घायल हो गए थे।उन्होंने कहा, “शोक संतप्त परिवारों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं, इस कठिन समय में राष्ट्र उनके साथ मजबूती से खड़ा है। आतंकवाद विरोधी अभियान जारी है। हमारे सैनिक क्षेत्र में शांति और व्यवस्था कायम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”रक्षा मंत्री ने कहा, “मैं इस कायरतापूर्ण आतंकवादी हमले में घायल हुए जवानों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करता हूं।”(फोटो सौजन्य से नवभारत टाइम्स)
कांग्रेस ने जम्मू-कश्मीर के कठुआ में आतंकी हमले को लेकर मंगलवार को कहा कि कश्मीर घाटी के बाद अब जम्मू क्षेत्र आतंकवादी गतिविधियों का नया केंद्र बन गया है और सरकार को इसे गंभीरता से लेते हुए उपयुक्त कदम उठाना चाहिए।पार्टी सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि इस मामले पर सरकार को देश को भरोसे में लेना चाहिए कि वह आंतरिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठा रही है।
सीधी जिले के मृतकों में पांच लोग परिजनों को चार-चार लाख रुपये
भोपाल: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने गुजरात के सूरत शहर में एक इमारत ढहने की घटना में मारे गए राज्य के पांच लोगों के परिजनों को चार-चार लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की है। एक अधिकारी ने मंगलवार को यह जानकारी दी। पुलिस ने पहले बताया था कि सूरत के पाल इलाके में छह मंजिला आवासीय इमारत शनिवार दोपहर ढह गई, जिसमें सात लोगों की मौत हो गई। इनमें से ज्यादातर मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कपड़ा मजदूर थे। अधिकारी ने बताया कि मृतकों में पांच लोग मध्य प्रदेश के सीधी जिले के थे।
फ्लाईऐश निपटान के लिए थर्मल पावर प्लांटों को 19 कोयला खदानें आवंटित की गईं
पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की 3 नवंबर 2009 की अधिसूचना के अनुसार, “फ्लाई ऐश” शब्द के अर्थ में इलेक्ट्रोस्टेटिक प्रीसिपिटेटर (ईएसपी) राख, सूखी फ्लाई ऐश, बॉटम ऐश, तालाब की राख और टीले की राख जैसी सभी उत्पन्न राख शामिल हैं।
सिलिकॉन डाइऑक्साइड, कैल्शियम ऑक्साइड और एल्युमिनियम ऑक्साइड से भरपूर इसकी संरचना इसे विभिन्न अनुप्रयोगों के लिए मूल्यवान बनाती है और संभावित कचरे को उपयोगी सामग्री में भी बदल देती है। प्रभावी प्रबंधन निर्माण गतिविधियों में इसके उपयोग को बढ़ावा देता है, जिससे अपशिष्ट को कम करने के साथ-साथ प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण किया जा सकता है और कार्बन फुटप्रिंट को भी कम किया (कोरबा क्षेत्र के मानिकपुर ओ.सी. की पुरानी परित्यक्त खदान में फ्लाई ऐश की भराई) जा सकता है।कोयला दहन के पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने के लिए, कोयला मंत्रालय फ्लाई ऐश के उचित निपटान को बढ़ावा दे रहा है। व्यापक अनुसंधान और विकास के कारण खाली पड़े स्थान को भरने और निर्माण सामग्री में एक घटक के रूप में फ्लाई ऐश के प्रभावी उपयोग सक्षम हुआ है। यह न केवल इसके पर्यावरणीय प्रभाव को कम करता है बल्कि सतत विकास कार्यप्रणालियों का भी समर्थन करता है।

