
प्रतीत होता है भाजपा और आरएसएस के बीच में शीत युद्ध प्रारंभ हो चुका है इसकी घोषणा भी मोहन भागवत के द्वारा कर दी गई है। पहले चरण में सत्ता कब्जाने के लिए 20 और 21 जुलाई को आरएसएस और भाजपा की बैठक होने वाली है। जिसमें खुली चुनौती भी दी गई है कि फलां,फलां, फलां व्यक्ति शहर छोड़ कर न जाए ।क्योंकि आरएसएस यह अब समझने लगी है मोदी सरकार वाली भाजपा ने न सिर्फ चुनाव के पहले अब मंत्री जेपी नड्डा के जरिए घोषणा करवा दी थी कि उसे आरएसएस की जरूरत नहीं है। बल्कि उसने चुनाव के बाद मनमानी तरीके से तीन राज्यों में मुख्यमंत्री का निर्धारण भी कर दिया था। हालांकि बाद में इंटरनल कंप्रोमाइज के दौर में एक प्रमाण पत्र के रूप में शिवराज सिंह चौहान को मंत्री बनाकर भाजपा की मोदी सरकार ने हथियार डालने के संकेत दिए थे। किंतु वे इससे संतुष्ट नहीं दिखते। जिसका विस्फोटक परिणाम स्पष्ट तौर पर अब दूसरी बार मोहन भागवत ने संदेश देकर किया है।
————–(त्रिलोकी नाथ)——————-
झारखंड के गुमला में ग्राम स्तरीय कार्यकर्ता संवाद के दौरान कथित तौर पर गैर पंजीकृत संस्था आरएसएस के प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है प्रगति का कोई अंत नहीं है। लोग अतिमानव बनना चाहते हैं, लेकिन भी यह नहीं रुकते वे देवता बनना चाहते हैं, फिर भगवान ;भगवान चाहते हैं विश्व रूप बनना कोई नहीं जानता कि इससे बड़ा कुछ भी है या नहीं। विकास का कोई अंत नहीं है हमें यह सोचना चाहिए कि हमेशा और अधिक की गुंजाइश होती है। बाहर के विकास और अंदर के विकास का कोई अंत नहीं है.. भागवत ने स्पष्ट तौर पर बिना किसी के नाम लिए कहा कि लोगों को मानव जाति के कल्याण के लिए प्रयास करना चाहिए उन्होंने यह भी कहा कि कुछ लोग इंसान होते हुए भी मानवीय गुणों से रहित हैं उन्हें पहले इसे अपने अंदर विकसित करना चाहिए।
स्मरणीय है चुनाव के दौरान आत्मसम्मोहित मोदी सरकार के प्रमुख नरेंद्र मोदी ने अपने प्रवक्ता-मीडिया के जरिए स्पष्ट कहा था कि वह भगवान के दूत है और और नॉन बायोलॉजिकल है…। इसका संसद के प्रथम सत्र में प्रतिपक्ष नेता राहुल गांधी ने जमकर खिल्ली उड़ाई थी। और नरेंद्र मोदी को किरकिरी का सामना करना पड़ा था।
मोहन भागवत ने आदिवासियों को लक्ष्य में रखते हुए कहा आदिवासी पिछड़े हुए हैं जंगल के इलाकों में जहां आदिवासी पारंपरिक रूप से रहते हैं वहां लोग शांत सरल स्वभाव के होते हैं, जो बड़े शहरों में नहीं मिलते। यहां मैं ग्रामीणों का आंख मूदकर भरोसा कर सकता हूं। लेकिन शहरों में हमें सावधान रहना होगा।
कुछ दार्शनिक स्वभाव में वृंदावन के प्रसिद्ध संत बाबा प्रेमानंद की भाषा बोलते हुए उन्होंने कहा भारत के लोगों का अपना अलग स्वभाव है कई लोग बिना किसी नाम या प्रसिद्ध की इच्छा के देश के कल्याण के लिए काम कर रहे हैं… उन्होंने कहा हमारे यहां पूजा की अलग-अलग शैलियां हैं 33 करोड़ देवी देवता हैं 3800 से अधिक भाषाएं बोली जाती हैं खान-पान और आदतें अलग-अलग हैं इन सारे अंतर के बावजूद हमारा मन एक है..।उन्होंने कहा यह दूसरे देशों में नहीं पाया जाता ।
इस पूरी भाषण बाजी में मोहन भागवत ने स्पष्ट कर दिया है कि मोदी सरकार को भारतीयता के दायरे में उसके गौरव को ध्यान में रखकर काम करना पड़ेगा। इसके पहले भी उन्होंने अपने भाषण में कड़े शब्दों में हिंसा से ग्रस्त मणिपुर में एक वर्ष से ज्यादा शांति के इंतजार किए जाने का संदेश दिया था, जहां नरेंद्र मोदी ने एक भी दौरा नहीं किया। लोकतांत्रिक संसद में बदलाव के बाद भी मोदी सरकार के अडि़यल स्वभाव को समझने की दृष्टिकोण में पित्र संस्था आरएसएस ने अपने पुत्र भाजपा के प्रमुख प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को यह संदेश दिया है ऐसा माना जाता है जिसके प्रथम चरण में यह भी संदेश है कि उत्तर प्रदेश की भाजपा आरएसएस की बैठक कार्य प्रणाली में उन्हें शांति से करने दिया जाए। क्योंकि आरएसएस ने अनुभव में भी पाया कि मध्य प्रदेश राजस्थान और छत्तीसगढ़ तीन राज्यों में मनमानी तरीके से मुख्यमंत्री नियुक्त किए गए थे।
कांग्रेस की इस पर टिप्पणी आई है।कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने इंसान पहले सुपरमैन बनना चाहता है फिर भगवान। मोहन भागवत के इस बयान को अग्नि मिसाइल बताया उन्होंने ट्वीट कर कहा मुझे यकीन है कि स्वयंभू नॉन बायोलॉजिकल प्रधानमंत्री को इस ताजा अग्नि मिसाइल की खबर मिल गई होगी ,जिसे नागपुर के झारखंड से लोक कल्याण मार्ग को निशाना बनाकर दागा है ।
बहरहाल लोकसभाचुनाव के पहले से जो युद्ध भाजपा और आरएसएस में गुप्त तौर से चल रहा था। अब वह शीत युद्ध में बदल गया है और कांग्रेस की माने तो उसके लिए पहली अग्निमिसाइल आरएसएस ने नरेंद्र मोदी के ऊपर दाग दिया है देखना होगा अब इस घोषित सेट में 20 और 21 तारीख के बाद कितना भाजपा की मोदी सरकार मैनेज कर पाती है। अथवा अथवा वह जैसे आडवाणी व अन्य को अलग-अलग कर दिया था अपनी जिद में आकर नॉन बायोलॉजिकल धुन में कोई नया मिसाइल आरएसएस के ऊपर छोड़ती है फिलहाल उत्तर प्रदेश से इसका उत्तर का इंतजार करना चाहिए लोग कहते हैं प्रधानमंत्री की कुर्सी का रास्ता उत्तर प्रदेश से होकर जाता है लगता है रास्ता तैयार किया जा रहा है नए प्रधानमंत्री के लिए भी….?

