
क्या ओलंपियाड पेरिस में स्वर्ण पदक हासिल करने के लिए विनेश फोगाट के साथ उनके अपने लोगों ने जानबूझकर धोखाधड़ी की या फिर भारतीय टीम में अंधभक्त भरे थे.. जो ओलंपियाड के नियमों को समझने में चूक गए थे..? यह अगर जांच होगी तब वक्त बताएगा फिलहाल कड़वा सत्य के साथ इस खबर ने और भी मन को गिरा दिया है कि भारत, यहां कुछ नहीं होने वाला.. ओलंपियाड में स्वर्ण पदक का दरवाजा खटखटाना के पहले विनेश फोगाट की करियर की हत्या कर दी गई. उनकी खेल में तय सीमा 50 किलो वजन से ज्यादा 100 ग्राम अतिरिक्त वजन होने के कारण न सिर्फ उन्हें गोल्ड मेडल की कुश्ती से वंचित किया गया बल्कि उनकी पोजीशन भी गिरा दी गई. इस आक्रमण से महिला पहलवान विनेश फोगाट बेहोश हो गई और जब नींद खुली तो उन्होंने निर्णय लिया और अपना संदेश जारी करते हुए कुश्ती खेल से सन्यास ले लिया।
विनेश फोगाट अंतरराष्ट्रीय स्तर में जिस जंतर-मंतर के काले जादू की शिकार हुई है वह 1 साल पहले दिल्ली के जंतर मंतर में उनके खिलाफ प्रयोग होने लगा था क्योंकि उन्होंने सच्चाई के साथ स्वाभिमान की लड़ाई के लिए भारतीय जनता पार्टी के तत्कालीन बाहुबली सांसद बृजभूषण सिंह के द्वारा महिला खिलाड़ियों के साथ यौन प्रताड़ना के गंभीर प्रश्न पर जांच की मांग की थी। हालांकि न्यायपालिका ने तब महिला पहलवानों के पक्ष में आदेश पढ़ने करते हुए भाजपा सांसद के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया था इसके बाद उसे (बृजभूषण सिंह) भारतीय जनता पार्टी की मोदी सरकार आंख मूंद कर समर्थन मिला इसके खिलाफ जंतर मंतर में महिला पहलवान और अन्य रेसलर धारण किए जो महीना चल और उसका अंत इस तरह हुआ कि तब महिला पहलवान साक्षी मलिक ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में संन्यास ले लिया तो कुछ पहलवानों ने प्रधानमंत्री के इस अन्याय के खिलाफ अपना जीता हुआ पदक सड़क पर छोड़ आए थे यह किसी भी महिला खिलाड़ी के लिए डिप्रेशन में जाने के लिए पर्याप्त दोष था.
किंतु भारतीय नारी में जो शक्ति का प्रतीक है उसका प्रदर्शन करते हुए इन महिला खिलाड़ियों ने न सिर्फ जंतर मंतर में ही अपने अभ्यास का प्रदर्शन किया बल्कि एक लंबी लड़ाई के तहत अंततः ओलंपियाड पेरिस के लिए चयनित की गई किंतु यह भी बेहद शर्मनाक और खतरनाक है कि जब पूरी दुनिया में भारत को स्वर्ण पदक मिलने जा रहा था यानी रजत पदक की गारंटी हो गई थी विनेश फोगाट की शानदार खल खल प्रदर्शन से तब भी भाजपा की मोदी सरकार ने जिस प्रकार का प्रोत्साहन और संरक्षण विनेश फोगाट को मिलना चाहिए था वैसा नहीं दिया गया बल्कि जो नकारात्मकता पैदा हुई उसने ओलंपियाड खेल परिसर में कितना जबरदस्त संपूर्ण टीम पर अपना कब्जा कर लिया था की टीम ने यह तय नहीं किया कि यदि किसी कारण से खेल नियमों के तहत यदि वह 50 किलो सीमा में नहीं आ रही हैं तो उन्हें गोल्ड मेडल के लिए तैयार न किया जाए उनका रजत पदक सुरक्षित रहता ऐसा खेल नियमों में बताया जाता है किंतु जो जंतर मंतर ओलंपियाड के अंदर बना उसे शतरंज की बिसात में विनेश फोगाट बुरी तरह से फस गई और उन्हें नियमों का हवाला देकर तकनीक की त्रुटि यानी 100 ग्राम वजन अधिक होने के कारण खेल से हाथ धोना पड़ा और इसका असर यह हुआ कि विनेश फोगाट ने खेल से संन्यास की घोषणा कर दी..
जिस प्रकार भारत में आरक्षण एक अच्छी मंशा को लेकर के लागू किया गया था किंतु वह बुरे षड्यंत्र के कारण वोट बैंक का हिस्सा बन गया इस तरह अनजाने में भारतीय राजनीति में विनेश फोगाट ने सत्य की लड़ाई में सत्ताधारी नेताओं की नकारात्मक विचारधारा की शिकार हो गई जिसका परिणाम यदि सही होगा तो भारतीय टीम के उन तमाम सहयोगियों को जिन्हें यह सुनिश्चित करना होता है की सभी खेल नियमों को पालन करते हुए खिलाड़ी को खेल के लिए आगे बढ़ाया जाए भारतीय टीम ने ऐसा नहीं किया स्वाभाविक है यदि टीम ने ऐसा नहीं किया तो या तो गलती है तो उसके लिए दंडात्मक कार्यवाही होनी चाहिए अथवा अगर शरण यंत्र है तो यह भारतीय राजनीति की पतन की चरम सीमा को पर करने की घोषणा भी है कि अगर देश का गौरव खत्म होता है तो होने दिया जाए किंतु तमाम घमंडियों का घमंड न टूटने पावे हालांकि यह अनुमान है और काल्पनिक है ईश्वर करें ऐसे परिणाम सामने ना आवे।
किंतु जिन तकनीकी कर्म के हवाला देकर के उन्हें गोल्ड मेडल और कुश्ती खेल से ही अलविदा होना पड़ा यह बेहद शर्मनाक है और निराशाजनक भी। यह सही है भारतीय ओलंपिक संघ की अध्यक्ष पीटी उषा ने इस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश में सक्षम तरीके से विरोध प्रकट करने का काम कर रही हैं। यह वही पीटी उषा हैं जब दिल्ली के जंतर-मंतर में विनेश फोगाट अन्य खिलाड़ियों के साथ अपमानजनक तरीके से संघर्ष का सामना कर रही थी तो दबाव में ही सहीपीटी उषा ने मिलकर अपनी सद्भावना प्रकट की थी।
इन सब के बावजूद शायद गोल्ड मेडल मिलने से लोग तात्कालिक तौर पर अत्यंत गौर वन्मित हो जाते और उसकी धक भी एक लंबे समय तक बनी रहती किंतु जिस प्रकार से ओलंपियाड में विनेश फोगाट को हाथ में आया हुआ गोल्ड मेडल किनाया गया है उसके कारण विनेश फोगाट गोल्ड मेडल से बड़ा तमगा हासिल कर लिया है उनके अपने गृह राज्य हरियाणा के मुख्यमंत्री सैनी ने तो बकायदे घोषणा कर दी है की विनेश फोगाट का स्वागत रजत पदक विजेता की तरह ही किया जाएगा और उनका सम्मान भी इस तौर पर बरकरार रहेगा हरियाणा सरकार भाजपा की होने के बावजूद ऐसा घोषणा करके भारतीय खिलाड़ियों के बीच में अपना सम्मान बढ़ाने का काम की है क्योंकि वह उसे प्रताड़ित महिला का सम्मान सुरक्षित कर रहे हैं या कहना चाहिए आरक्षित कर रहे हैं जिसे उनके अपने अकाउंट ने ही जलील करने का काम किया था यह वक्त की बात होगी की हरियाणा सरकार अपने निर्णय पर कितनी देर तक टिकी रहती है
हरियाणा के सीएम नायब सिंह सैनी ने कहा कि विनेश फोगाट को वो सारे लाभ मिलेंगे, जो रजत पदक विजेता को मिलते हैं। उन्होंने लिखा, ‘हरियाणा की हमारी बहादुर बेटी विनेश फोगाट ने जबरदस्त प्रदर्शन करके ओलंपिक में फाइनल में प्रवेश किया था। किन्हीं भी कारणों से वो भले ही ओलंपिक का फाइनल नहीं खेल पाई हो लेकिन हम सबके लिए वो एक चैंपियन हैं।’
दुनिया भर और भारत के तमाम लोगों ने खेल प्रेमियों ने विनेश फोगाट को एक गोल्ड मेडलिस्ट की तरह ही देखने का काम किया है ओलंपियाड की इस तकनीकी त्रुटि को यदि वह ठीक नहीं करती है तो उसे अस्वीकार भी कर दिया है। ऐसा समझ जाना चाहिए कम से कम भारत में तो ओलंपियाड के इस खेल नियम के निर्णय को अस्वीकार किया है प्रसिद्ध मुक्केबाज और ओलंपियाड पदकविजेता
ने इस पर आश्चर्य भी जाते हैं और इस निर्णय को खारिज करते हैं राजनीतिक लोगों ने और आम लोगों ने भी ओलंपियाड के इस निर्णय को खारिज कर दिया है। इन सब के बावजूद जिस अन्याय को प्रमाण पत्र देने का काम किया गया है की ओलंपियाड के तकनीकी पूर्ण नियमों को भी शिथिल करना चाहिए। बहरहाल विनेश फोगाट ने ओलंपियाड में स्वर्ण पदक हारने के बाद एक ऐतिहासिक जीत को स्थापित कर दिया है जो भारत के लिए मील का पत्थर साबित होगा रही बात कुश्ती खेल में भ्रष्टाचार, यौन प्रताड़ना और बलात्कार के धंधे को प्रोत्साहन देने वाले राजनेताओं को या पावरफुल अन्य लोगों को अगर दंडित किया जाता है तो भी यह विनेश फोगाट के खेल के साथ हुए विश्वासघात की क्षतिपूर्ति कहलाएगी, फिलहाल; विनेश एक है और हमेशा एक ही रहेगी…. इसमें कोई शक नहीं है उसे तोड़ने वाला कम से कम कायरता पूर्ण राजनीति तो अवश्य पराजित हो गई है. भारतीय लोकतंत्र में यह भी साबित हुआ है उनकी कुश्ती के खेल समर्पण के संघर्ष से।
हालांकि कठपुतली सांसद कंगना रनौत ने इस अवसर पर भी अपने आका के प्रति वफादारी का प्रदर्शन करने का काम किया है शायद उसे भविष्य में बहुत जल्दी पद मिल जाए इस समय भाजपा में इसकी प्रतियोगिता तेजी से चल रही है कठपुतली कंगना रनौत ने लिखा, “भारत के पहले गोल्ड मेडल के लिए फिंगर्स क्रॉस कर रखी हैं। विनेश ने कभी विरोध प्रदर्शनों में हिस्सा लिया था, जिनमें मोदी तेरी कब्र खुदेगी जैसे नारे लगाने के बाद भी उन्हें यह मौका दिया गया कि वह अपने देश का प्रतिनिधित्व कर सकें और बेस्ट ट्रेनिंग, कोच और सुविधाएं पा सकें। यही तो लोकतंत्र और एक महान नेता की खूबसूरती है।”
नई दिल्ली: दिल्ली उच्च न्यायालय ने गुरुवार को मशहूर पहलवान बजरंग पुनिया, विनेश फोगट, साक्षी मलिक और उनके पति सत्यव्रत कादियान की याचिका पर सुनवाई के लिए 12 सितंबर की तारीख तय की है। याचिका में पिछले साल भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) के पदाधिकारियों के चुनाव को रद्द करने और अवैध घोषित करने की मांग की गई है। न्यायमूर्ति पुरुषेंद्र कुमार कौरव ने पहलवानों से, जो पिछले साल जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन में सबसे आगे थे, सात महिला पहलवानों के कथित यौन उत्पीड़न के लिए डब्ल्यूएफआई प्रमुख बृज भूषण शरण सिंह की गिरफ्तारी की मांग कर रहे थे, साथ ही केंद्र और डब्ल्यूएफआई से इस बीच मामले में दलीलें पूरी करने को कहा। याचिकाकर्ताओं के वरिष्ठ वकील ने दावा किया कि डब्ल्यूएफआई को “प्रॉक्सी द्वारा संचालित” किया जा रहा है और पेरिस के ओलंपिक गांव में मौजूदा महासंघ के अध्यक्ष संजय सिंह की उपस्थिति पर आपत्ति जताई, जहां वह विनेश के संबंध में “निर्णय ले रहे थे”, जिसे 50 किलोग्राम वर्ग के स्वर्ण पदक मुकाबले से पहले 100 ग्राम अधिक वजन होने के कारण अयोग्य घोषित कर दिया गया था।
नई दिल्ली:
विपक्षी पार्टी के सदस्यों द्वारा हंगामा और वॉकआउट के बाद गुरुवार को सुबह के सत्र के दौरान नाराज राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ कुछ समय के लिए सदन से चले गए, जिन्हें विनेश फोगट को ओलंपिक से अयोग्य ठहराए जाने से संबंधित मुद्दा उठाने की अनुमति नहीं दी गई।सूचीबद्ध पत्रों को सदन में पेश किए जाने के तुरंत बाद, विपक्ष के नेता और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे फोगट की अयोग्यता का मुद्दा उठाने के लिए खड़े हुए और जानना चाहते थे कि “इसके पीछे कौन है”।हालांकि, धनखड़ ने खड़गे को मुद्दा उठाने की अनुमति नहीं दी।

